{"_id":"61ea88095c637d15d625f02e","slug":"ex-servicemen-express-mixed-reactions-on-merger-of-amar-jawan-jyoti-with-nwm-s-eternal-fame","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amar Jawan Jyoti: युद्ध स्मारक में अमर जवान ज्योति के विलय पर पूर्व सेनाधिकारियों की अलग-अलग राय, किसी ने कहा रद्द करें फैसला, तो किसी ने सराहा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Amar Jawan Jyoti: युद्ध स्मारक में अमर जवान ज्योति के विलय पर पूर्व सेनाधिकारियों की अलग-अलग राय, किसी ने कहा रद्द करें फैसला, तो किसी ने सराहा
Fri, 21 Jan 2022 03:50 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 21 Jan 2022 03:50 PM IST
सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी 2019 को एनडब्ल्यूएम का उद्घाटन किया था, जहां ग्रेनाइट की पट्टियों पर 25,942 सैनिकों के नाम सुनहरे अक्षरों में अंकित हैं।
विज्ञापन
national war memorial
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
पूर्व सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (एनडब्ल्यूएम) की लौ के साथ इंडिया गेट पर स्थित अमर जवान ज्योति के विलय के केंद्र के फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पूर्व एयर वाइस मार्शल मनमोहन बहादुर ने ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग किया और उनसे इस फैसले को रद्द करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, सर, इंडिया गेट पर चिरस्थायी लौ भारत के मानस का हिस्सा है। आप, मैं और हमारी पीढ़ी वहां हमारे बहादुर जवानों को सलाम करते हुए बड़े हुए हैं। जहां राष्ट्रीय युद्ध स्मारक महान है, वहीं अमर जवान ज्योति की यादें अमिट हैं।
विज्ञापन
इंडिया गेट पहले विश्व युद्ध के शहीद नायकों का स्मारक: पूर्व ले, जनरल सतीश दुआ
हालांकि, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने अमर जवान ज्योति को एनडब्ल्यूएम की शाश्वत लौ के साथ विलय करने पर बहुत संतोष जताया। दुआ ने कहा, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जिसने एनडब्ल्यूएम के डिजाइन चयन और निर्माण को आगे बढ़ाया था, मेरा यह विचार था कि इंडिया गेट पहले विश्व युद्ध के शहीद नायकों का स्मारक है। अमर जवान ज्योति को 1972 में जोड़ा गया था क्योंकि हमारे पास दूसरा स्मारक नहीं था। उन्होंने कहा कि एनडब्ल्यूएम देश की आजादी के बाद कार्रवाई में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि देता है और सभी श्रद्धांजलि समारोहों को पहले ही नए स्मारक में स्थानांतरित कर दिया गया है।
विज्ञापन
25 फरवरी 2019 को एनडब्ल्यूएम का उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी 2019 को एनडब्ल्यूएम का उद्घाटन किया था, जहां ग्रेनाइट की पट्टियों पर 25,942 सैनिकों के नाम सुनहरे अक्षरों में अंकित हैं। पूर्व सेना प्रमुख जनरल वेद मलिक ने भी आग की लौ के विलय के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने ट्विटर पर कहा, अब आग की लौ का विलय होना स्वाभाविक बात है क्योंकि एनडब्ल्यूएम की स्थापना हो चुकी है और कार्रवाई में शहीद सैनिकों के स्मरण और सम्मान से संबंधित सभी समारोह वहां आयोजित किए जा रहे हैं। पूर्व कर्नल राजेंद्र भादुड़ी ने कहा कि अमर जवान ज्योति पवित्र है और इसे बुझाने की जरूरत नहीं है। भादुड़ी ने ट्विटर पर कहा, इंडिया गेट में भारतीय सैनिकों के नाम हैं जो युद्धों में शहीद हुए थे। यह मायने नहीं रखता कि इसे किसने बनवाया।
विज्ञापन
1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीदों की याद में बना था अमर जवान ज्योति
अमर जवान ज्योति का निर्माण भारतीय सैनिकों के लिए एक स्मारक के रूप में किया गया था जो 1971 के भारत-पाक युद्ध में कार्रवाई में शहीद हुए थे। इस युद्ध को भारत ने जीता था, जिससे बांग्लादेश का निर्माण हुआ था। इसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 26 जनवरी 1972 को किया था। पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल कमल जीत सिंह ने कहा कि एनडब्ल्यूएम के उद्घाटन के बाद दोनों ज्वालाओं का एक होना तर्कसंगत है।