{"_id":"644a5085c4d3d252280c0a89","slug":"ex-cbi-joint-director-shantonu-sen-says-anti-corruption-agencies-staring-at-permanent-interference-2023-04-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"CBI: भ्रष्टाचार रोधी एजेंसियां स्थायी हस्तक्षेप का सामना कर रही, सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक का दावा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
CBI: भ्रष्टाचार रोधी एजेंसियां स्थायी हस्तक्षेप का सामना कर रही, सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक का दावा
Thu, 27 Apr 2023 04:08 PM IST
देव कश्यप
पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 27 Apr 2023 04:08 PM IST
सार
सेन ने एक साक्षात्कार में बताया कि भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियां अब अपने जांच के अधिकार के लिए दूसरे प्राधिकरण पर निर्भर हैं, जबकि कानून में पुलिस को अपराध की जांच करने के लिए किसी पर निर्भर नहीं होना चाहिए क्योंकि एक थाने (पुलिस स्टेशन) को किसी हत्या या दुष्कर्म के मामले की जांच के लिए किसी की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती है।
विज्ञापन
सीबीआई (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व संयुक्त निदेशक शांतनु सेन ने दावा किया है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो और देश की अन्य भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियां स्थायी हस्तक्षेप की स्थिति का सामना कर रही है। शांतनु सेन ने कहा कि अगर 2018 के भ्रष्टाचार विरोधी कानून को चुनौती नहीं दी जाती है, तो केंद्रीय जांच ब्यूरो और देश की अन्य भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियां "स्थायी हस्तक्षेप" की स्थिति को देख रही हैं।
विज्ञापन
सेन ने यह भी कहा कि सीबीआई को जांचकर्ताओं का अपना कैडर रखने की प्रथा को बहाल करना चाहिए, क्योंकि राज्यों से जांच एजेंसी में शामिल किए गए लोग 'सशर्त' हस्तक्षेप होने के लिए बाध्य हैं। सेन ने एक साक्षात्कार में पीटीआई को बताया कि भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियां अब अपने जांच के अधिकार के लिए दूसरे प्राधिकरण पर निर्भर हैं, जबकि कानून में पुलिस को अपराध की जांच करने के लिए किसी पर निर्भर नहीं होना चाहिए क्योंकि एक थाने (पुलिस स्टेशन) को किसी हत्या या दुष्कर्म के मामले की जांच के लिए किसी की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती है।
विज्ञापन
सेन एक लेखक और स्तंभकार भी हैं। उन्होंने जुलाई 2018 में और बाद में 2021 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसीए) में धारा 17 (ए) को शामिल करने का जिक्र करते हुए कहा कि इस धारा के तहत मामलों के प्रोसेसिंग के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस धारा में कहा गया है कि भविष्य में पीसीए में वर्णित भ्रष्टाचार के किसी भी कृत्य, सिवाय इसके कि अगर कोई फंसा हुआ है, नियुक्ति प्राधिकारी की अनुमति के बिना किसी पुलिस अधिकारी द्वारा पूछताछ या जांच नहीं की जाएगी। यानी की एक पुलिस अधिकारी, सीबीआई या भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसी जिसे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी होती है और उसकी जांच करनी है, वह ऐसा नहीं कर सकता। यह कानून का असमान अनुप्रयोग है।
विज्ञापन
धारा 17 (ए) के तहत एसओपी सितंबर 2021 में लागू हुई थी। केंद्र सरकार की एक अधिसूचना में कहा गया था कि एसओपी को इस खंड के तहत पूर्व अनुमोदन प्रक्रियाओं के लिए समान और प्रभावी कार्यान्वयन प्राप्त करने की दृष्टि से प्रक्रियाओं को मानकीकृत और संचालित करने के लिए पेश किया गया है। सेन ने 2007 से 2013 तक दिल्ली के उपराज्यपाल के ओएसडी के रूप में भी काम किया था, वह एसओपी को लेकर आशंकित हैं।
उन्होंने कहा कि इसमें कहा गया है कि कुछ रैंक के पुलिस अधिकारियों द्वारा सत्यापन उनके अनुबंध के अनुसार किया जाएगा। उदाहरण के लिए, एक न्यायाधीश या एक कैबिनेट मंत्री के मामले में सत्यापन स्वयं डीजीपी द्वारा किया जाएगा। वह सत्यापन करेगा और अनुमति मांगेगा। इसी तरह, अन्य मामलों के लिए रैंक तय की जाती है। यह कानून का समान उपयोग नहीं है। और फिर भी, अभी तक इसे किसी ने भी इसे चुनौती नहीं दी है।
सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियां कम उपयोगी होती जा रही हैं, क्योंकि सरकार के आदेश के बिना अब किसी लोक सेवक की जांच नहीं की जा सकती है। सेन ने आगे कहा कि 1970 के दशक से ही एक धारणा थी कि सीबीआई के मामले में हस्तक्षेप किया जा रहा है। इसलिए, यह हस्तक्षेप कोई नई बात नहीं है। हमारे सामने सवाल यह है कि अगर यह नया कानून बना रहता है तो सीबीआई और सभी भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों में स्थायी रूप से हस्तक्षेप किया जाएगा। क्या इसे चुनौती नहीं दी जानी चाहिए?