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प्रणब के संघ में दिए भाषण के बाद भी कांग्रेस में दो फाड़, मनीष ने दागे सवाल तो चिदंबरम ने दी शाबाशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 08 Jun 2018 02:06 PM IST
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- फोटो : PTI
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नागपुर जाने और भाषण से पहले भी विवाद और उसके बाद भी विवाद, कुछ ऐसा रहा पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का आरएसएस मुख्यालय का दौरा। पिछले डेढ़ हफ्तों से ज्यादा से कांग्रेस पार्टी में प्रणब मुखर्जी के आरएसएस मुख्यालय में भाषण दिए जाने को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। आखिरकार प्रणब दादा ने बुधवार को भाषण दिया और सारे कयासों पर विराम लगा दिया लेकिन फिर भी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
एक तरफ पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने जहां खुशी जाहिर की है वहीं वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी की प्रणब मुखर्जी से नाराजगी दूर होने का नाम नहीं ले रही है। मनीष तिवारी ने गुस्सा जाहिर करते हुए एक के बाद एक तीन ट्वीट किए और तीन सवाल भी पूछे। नाराज तिवारी ने प्रणब से पूछा है कि राष्ट्रवाद पर बात करने के लिए उन्होंने संघ मुख्यालय ही क्यों चुना? उन्होंने पूछा कि आज अचानक संघ अच्छा कैसे हो गया?
बता दें कि कल शाम दिए गए भाषण में दादा ने उन्होंने राष्ट्रीयता, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर अपनी बात रखी। अपने भाषण में उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, लोकमान्य तिलक, सुरेंद्र नाथ बैनर्जी और सरदार पटेल के बारे में भी बात की।
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अपने पहले ट्वीट में मनीष ने पूछा एक सवाल जो लाखों धर्मनिरपेक्ष वादियों और बहुलवादियों को परेशान कर रहा है और जिसका जवाब आपने अभी तक नहीं दिया है कि आपने राष्ट्रवाद पर अपनी बात रखने के लिए आरएसएस मुख्यालय को ही क्यों चुना?
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एक तरफ पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने जहां खुशी जाहिर की है वहीं वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी की प्रणब मुखर्जी से नाराजगी दूर होने का नाम नहीं ले रही है। मनीष तिवारी ने गुस्सा जाहिर करते हुए एक के बाद एक तीन ट्वीट किए और तीन सवाल भी पूछे। नाराज तिवारी ने प्रणब से पूछा है कि राष्ट्रवाद पर बात करने के लिए उन्होंने संघ मुख्यालय ही क्यों चुना? उन्होंने पूछा कि आज अचानक संघ अच्छा कैसे हो गया?
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बता दें कि कल शाम दिए गए भाषण में दादा ने उन्होंने राष्ट्रीयता, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर अपनी बात रखी। अपने भाषण में उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, लोकमान्य तिलक, सुरेंद्र नाथ बैनर्जी और सरदार पटेल के बारे में भी बात की।
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अपने पहले ट्वीट में मनीष ने पूछा एक सवाल जो लाखों धर्मनिरपेक्ष वादियों और बहुलवादियों को परेशान कर रहा है और जिसका जवाब आपने अभी तक नहीं दिया है कि आपने राष्ट्रवाद पर अपनी बात रखने के लिए आरएसएस मुख्यालय को ही क्यों चुना?
2/2 thru 80’s &90’s about the intent & designs of https://t.co/LfXXRNck0b were a part of the Govt that banned RSS in 1975 & then again in 1992. Don’t you think you should tell us what was evil about RSS then that has become virtuous now? Either what we were told then was wrong2/2
— Manish Tewari (@ManishTewari) June 8, 2018
manoj tiwari
अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने पूछा कि आपकी पीढ़ी ने 80 और 90 के दशक में आरएसएस की सोच को लेकर कई चेतावनियां दी थीं। 1975 और 1992 में आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था, उस समय आप सरकार का हिस्सा भी रहे थे। क्या आपको नहीं लगता कि हजारों लाखों लोगों का यह सवाल कि जो कभी गलत था आज अच्छा कैसे हो गया। या फिर हमें ये मान लेना चाहिए कि कल तक जो हम कहते आ रहे थे वह गलत था?
वहीं उनका तीसरा ट्वीट कुछ ज्यादा ही रोचक है और बड़े सवाल खड़े कर रहा है। उन्होंने पूछा है कि आरएसएस के कार्यक्रम में आपका शामिल होना वैचारिक पुनरुत्थान की कोशिश है या फिर राजनीति में आ रही गिरावट को दूर करना। क्या ऐसा करके क्या आप कड़वाहट दूर करना चाहते हैं?
क्या आपकी कोशिश से आरएसएस को धर्मनिरपेक्ष और बहुलतावादी मान लिया जाएगा?" इसके साथ उन्होंने नाजी काल का उदाहरण दिया। उन्होंने लिखा कि इतिहास बताता है कि जब नाजी यूरोप में अपनी अकड़ दिखा रहे थे। चेंबरलेन (पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री) ने सोचा कि 1938 के म्यूनिख पैक्ट से उन्होंने अपने दौर में शांति को लेकर सबसे बड़ा काम किया है। कितनी गलत साबित हुई थी उनकी सोच।"
मनीष तिवारी के अलावा चिदंबरम ने ट्वीट किया, 'खुश हूं कि प्रणब मुखर्जी ने संघ को बताया कि कांग्रेस की विचारधारा में सही क्या है। उन्होंने बातों बातों में आरएसएस को बताया कि उनका तरीका क्या है और उनकी विचारधार में गलत क्या है। बता दें कि जब मुखर्जी के आरएसएस के न्योते पर पार्टी में विरोध हो रहा था तब चिदंबरम ने दादा से अनुरोध किया था कि वह आरएसएस को बताएं कि उसकी विचारधारा में गलत क्या है।
वहीं उनका तीसरा ट्वीट कुछ ज्यादा ही रोचक है और बड़े सवाल खड़े कर रहा है। उन्होंने पूछा है कि आरएसएस के कार्यक्रम में आपका शामिल होना वैचारिक पुनरुत्थान की कोशिश है या फिर राजनीति में आ रही गिरावट को दूर करना। क्या ऐसा करके क्या आप कड़वाहट दूर करना चाहते हैं?
क्या आपकी कोशिश से आरएसएस को धर्मनिरपेक्ष और बहुलतावादी मान लिया जाएगा?" इसके साथ उन्होंने नाजी काल का उदाहरण दिया। उन्होंने लिखा कि इतिहास बताता है कि जब नाजी यूरोप में अपनी अकड़ दिखा रहे थे। चेंबरलेन (पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री) ने सोचा कि 1938 के म्यूनिख पैक्ट से उन्होंने अपने दौर में शांति को लेकर सबसे बड़ा काम किया है। कितनी गलत साबित हुई थी उनकी सोच।"
मनीष तिवारी के अलावा चिदंबरम ने ट्वीट किया, 'खुश हूं कि प्रणब मुखर्जी ने संघ को बताया कि कांग्रेस की विचारधारा में सही क्या है। उन्होंने बातों बातों में आरएसएस को बताया कि उनका तरीका क्या है और उनकी विचारधार में गलत क्या है। बता दें कि जब मुखर्जी के आरएसएस के न्योते पर पार्टी में विरोध हो रहा था तब चिदंबरम ने दादा से अनुरोध किया था कि वह आरएसएस को बताएं कि उसकी विचारधारा में गलत क्या है।
Happy that Mr Pranab Mukherjee told the RSS what is right about Congress' ideology. It was his way of saying what is wrong about RSS' ideology
— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) June 8, 2018