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Jungles: वन कानूनों के बाद भी 10.26 लाख हेक्टेयर जंगल खत्म, दशकों बाद दुनिया भर के वन्यजीवों की आबादी में कमी

Wed, 03 Jan 2024 05:37 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Wed, 03 Jan 2024 05:37 AM IST
सार

पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय के अधिकृत आंकड़ों के अनुसार पिछले 15 वर्षों (2008 से 2023) में 3,05,756 हेक्टेयर वन भूमि का डायवर्जन हुआ है। पिछले पांच साल में देशभर के 33 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की सबसे अधिक 90 हजार हेक्टेयर वन भूमि सड़क और खनन के लिए ली गई है।

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Even after Forest Conservation Act 10.26 lakh hectares of forests destroyed
Forests - फोटो : Social Media

विस्तार

साल 1980 में वन संरक्षण अधिनियम बनने के बाद देशभर में अब तक करीब 10 लाख 26 हजार हेक्टेयर जंगल खत्म हो चुके हैं। यह वन भूमि दिल्ली के भौगोलिक क्षेत्रफल से लगभग 7 गुना अधिक है। सबसे ज्यादा वन भूमि का डायवर्जन 1990 में 1.27 लाख हेक्टेयर हुआ है। दूसरा सबसे बड़ा डायवर्जन साल 2000 में हुआ। इस साल 1 लाख 16 हजार से अधिक वन भूमि गैर वनीय उपयोग के लिए खत्म कर दी गई।

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पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय के अधिकृत आंकड़ों के अनुसार पिछले 15 वर्षों (2008 से 2023) में 3,05,756 हेक्टेयर वन भूमि का डायवर्जन हुआ है। पिछले पांच साल में देशभर के 33 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की सबसे अधिक 90 हजार हेक्टेयर वन भूमि सड़क और खनन के लिए ली गई है। इसमें सड़क के लिए 19,497 हेक्टेयर और खनन के लिए 18,790 हेक्टेयर वन भूमि का डायवर्जन हुआ है। इसी तरह ट्रांसमिशन लाइन व सिंचाई के लिए 10 हजार हेक्टेयर, रक्षा से जुड़ी परियोजनों के लिए 7,631 हेक्टेयर, हाइड्रो परियोजनों के लिए 6,218 हेक्टेयर और रेलवे के लिए 4,770 हेक्टेयर भूमि का डायवर्जन किया गया है। इंसान हर मिनट 27 फुटबॉल मैदान के बराबर जंगलों को साफ कर रहा है।

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जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदारी
रिपोर्ट के अनुसार वनों की कटाई से वन्यजीवों के निवास स्थान की क्षति, जैव विविधता की हानि और शुष्कता में वृद्धि हुई है। वनों की कटाई से वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड का बायोसेस्ट्रेशन भी कम हो जाता है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग में योगदान देने वाले नकारात्मक प्रतिक्रिया चक्र बढ़ जाते हैं ।

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दो तिहाई वन्यजीव खत्म
वर्ल्डवाइड फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की रिपोर्ट के अनुसार इंसानी गतिविधियों की वजह से 1970 से अब तक दुनियाभर के जंगली जीवों की आबादी में 69 फीसदी यानी दो-तिहाई खत्म हो चुकी है। इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं। पहला जलवायु परिवर्तन, दूसरा जंगलों का खात्मा और तीसरा प्रदूषण। जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन (जेडएस एल) में कंजरवेशन एंड पॉलिसी के डायरेक्टर एंड्र्यू टेरी ने कहा कि यह खतरनाक है। हम अपनी दुनिया को खाली करते जा रहे हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने जेडएसएल के डेटा का विश्लेषण करके बताया है कि 5000 से ज्यादा प्रजातियों के 32 जंगली जीवों की आबादी में 69 फीसदी की कमी हुई है।

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