{"_id":"627bdb686e830e613a2086c5","slug":"ernst-and-young-report-says-rising-cost-of-goods-services-in-india-influencing-the-buying-decision-of-consumers","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिपोर्ट: वित्तीय स्थिति को लेकर उत्साहित हैं भारतीय उपभोक्ता, लेकिन बढ़ती महंगाई बढ़ा रही है चिंता","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
रिपोर्ट: वित्तीय स्थिति को लेकर उत्साहित हैं भारतीय उपभोक्ता, लेकिन बढ़ती महंगाई बढ़ा रही है चिंता
Wed, 11 May 2022 09:21 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 11 May 2022 09:21 PM IST
सार
भारत के लिए ईवाई फ्यूचर कंज्यूमर इंडेक्स के नौवें संस्करण के परिणामों में कहा गया है कि बढ़ती जीवन लागत को प्रबंधित करने को लेकर अनिश्चितता होने के चलते 80 फीसदी से अधिक लोग बचत कर रहे हैं।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पिक्साबे
विस्तार
देश के अधिकांश उपभोक्ता आने वाले एक साल के लिए अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर उत्साहित हैं, लेकिन वस्तुओं और सेवाओं की बढ़ती लागत को लेकर उन्होंने चिंता व्यक्त की है। यह जानकारी सलाहकार कंपनी अर्नस्ट एंड यंग (ईवाई) की ओर से जारी एक रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वस्तुओं और सेवाओं की बढ़ती कीमत उपभोक्ताओं के खरीद निर्णयों को प्रभावित कर रहा है।
विज्ञापन
भारत के लिए ईवाई फ्यूचर कंज्यूमर इंडेक्स के नौवें संस्करण के परिणामों में कहा गया है कि बढ़ती जीवन लागत को प्रबंधित करने को लेकर अनिश्चितता होने के चलते 80 फीसदी से अधिक लोग बचत कर रहे हैं। यह सर्वे भारतीय उपभोक्ताओं के सकारात्मक दृष्टिकोण की पुष्टि करता है क्योंकि 77 फीसदी लोगों को अगले एक साल में अपनी वित्तीय स्थिति में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है।
विज्ञापन
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह भारतीय उपभोक्ताओं के वैश्विक समकक्षों से बेहतर है। वैश्विक स्तर पर ऐसी राय जताने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 48 फीसदी है। यह सर्वे फरवरी 2022 में 1000 से अधिक भारतीय उपभोक्ताओं पर किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार इस सर्वे में सामने आया है कि भारत के अधिकांश उपभोक्ताओं ने वस्तुओं और सेवाओं की बढ़ती लागत को लेकर चिंता व्यक्त की है।
विज्ञापन
सर्वे के अनुसार भारत में यह हालात सबसे ज्यादा कम आय वाले लोगों को प्रभावित करती है। इस तरह के लोगों की संख्या 72 फीसदी है। इसके बाद उच्च आय वर्ग के 60 फीसदी और मध्यम आय वर्ग के 58 फीसदी उपभोक्ता इससे प्रभावित हैं।