फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   equal property rights under the amended hindu succession act, Know the main points, What Supreme Court said

बेटियों को भी मिला बराबरी का हक, जानिए संपत्ति में अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के प्रमुख बिंदु

Tue, 18 Aug 2020 05:28 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित कुमार Updated Tue, 18 Aug 2020 05:28 PM IST
विज्ञापन
equal property rights under the amended hindu succession act, Know the main points, What Supreme Court said
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

बीते सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने बेटियों के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने बेटी को भी पिता की संपत्ति में बराबरी का अधिकार दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संशोधित हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत बेटियों को भी बेटों के समान ही हिस्सा मिलेगा। 

विज्ञापन


अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि बेटियों का संयुक्त हिंदू परिवार की पैतृक संपत्ति पर उतना ही हक है, जितना कि बेटों का। बेटी जन्म के साथ ही पिता की संपत्ति में बराबर की हकदार हो जाती है। तीन जजों की पीठ ने स्पष्ट किया कि भले ही पिता का निधन हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून, 2005 लागू होने से पहले हो गई हो, फिर भी बेटियों का माता-पिता की संपत्ति पर अधिकार होगा। 
विज्ञापन


इस कानून के आने से क्या बदलाव होंगे? यह कानून कब बना? सुप्रीम कोर्ट ने अपने नए फैसले में क्या-क्या कहा? आइए जानते हैं...

संपत्ति में बंटवारे का कानून 1956 में बना 

  • हिंदू धर्म में पैतृक संपत्ति में बंटवारे को लेकर सबसे पहले कानून 1956 में बना था।
  • इससे हिंदू परिवारों, जिनमें बौद्ध, जैन और सिख भी शामिल हैं की महिलाओं को विरासत में मिलने वाली संपत्ति में उत्तराधिकार को मान्यता मिली।
  • हालांकि मुस्लिम, ईसाई, पारसी या फिर ईसाइयों पर यह कानून लागू नहीं होता है। 
2005 में कानून में किया गया संशोधन 
  • साल 2005 में विधि आयोग ने अपनी सिफारिश में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में संशोधन करते हुए बेटी को भी विरासत में मिलने वाली संपत्ति में बराबर का भागीदार बनाया।
  • इसके माध्यम से बेटियों को भी संपत्ति में बराबर का अधिकार देकर हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 6 में मौजूद भेदभाव को दूर किया गया। 
पैतृक संपत्ति और खुद की कमाई संपत्ति में अंतर 
  • किसी पुरुष को विरासत में मिलने वाली संपत्ति को पैतृक संपत्ति कहा जाता है। जबकि उसके खुद के प्रयासों से कमाई गई संपत्ति स्वअर्जित संपत्ति कहलाती है।
  • पैतृक संपत्ति में बेटी अपने आप ही हिस्सेदार हो जाती है जबकि स्वअर्जित में व्यक्ति जिसे चाहे, उसे उत्तराधिकारी बना सकता है।  

सुप्रीम कोर्ट ने बेटियों को दिए ये अधिकार 

  • सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 में 2005 में संशोधन कर बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबरी का हक देने की जो व्यवस्था की गई थी। 
  • 2005 के बाद जन्म लेने वाली बेटियों के लिए तो यह फैसला संशोधन के बाद से ही लागू हो चुका है। 
  • हालांकि इसे लेकर एक विवाद यह था कि अगर पिता की मृत्यु 2005 के पहले हो गई तो क्या ये कानून बेटियों पर लागू होगा या नहीं।  
  • अब अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि पैतृक संपत्ति में बेटी को हिस्सा देने से इस आधार पर इनकार नहीं किया जा सकता कि उसका जन्म 2005 में बने कानून से पहले हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed