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Marriage Age: शादी की कानूनी उम्र बढ़ाने संबंधी विधेयक पर गठित समिति में मात्र एक महिला, सांसदों ने उठाए सवाल

Mon, 03 Jan 2022 05:54 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Mon, 03 Jan 2022 05:54 PM IST
सार

विधेयक पर विचार कर रही संसदीय समिति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद सुष्मिता देव के साथ 31 सदस्य हैं जो पैनल में अकेली महिला हैं। 

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Ensure more participation of women in discussion on bill to increase marriageable age: Priyanka Chaturvedi
कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी - फोटो : social media

विस्तार

शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सोमवार को महिलाओं के लिए शादी की कानूनी उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल करने के विधेयक पर गठित संसदीय पैनल में एकमात्र महिला सांसद को शामिल किए जाने पर कड़ा विरोध जताया। महाराष्ट्र से सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को लिखे एक पत्र में कहा कि यह निराशाजनक है कि महिलाओं और भारतीय समाज से संबंधित एक विधेयक पर विचार के लिए गठित समिति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अत्यधिक कम है। 

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कनिमोझी ने भी जताई नाराजगी
द्रमुक नेता और लोकसभा सदस्य कनिमोझी ने भी पैनल में महिलाओं के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, कुल 110 महिला सांसद हैं, लेकिन सरकार देश की हर युवा महिला को प्रभावित करने वाले विधेयक पर विचार के लिए जो समिति बनाती है उसमें 30 पुरुष और केवल एक महिला है। पुरुष महिलाओं के अधिकारों का फैसला करना जारी रखेंगे और महिलाएं मूकदर्शक बनी रहेंगी। 
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पैनल में सुष्मिता देव एकमात्र महिला सांसद 
शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल संबंधी विभाग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति में महिलाओं के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने वेंकैया नायडू से बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक पर चर्चा में महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया। विधेयक पर विचार कर रही संसदीय समिति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद सुष्मिता देव के साथ 31 सदस्य हैं जो पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद हैं, जो अकेली महिला हैं।
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प्रियंका चतुर्वेदी ने नायडू को लिखे अपने पत्र में कहा, मैं आपसे यह सुनिश्चित करने का अनुरोध करती हूं कि भारत में महिलाओं के सामने आने वाले मुद्दों से संबंधित विधेयक पर चर्चा में महिलाओं का अधिक प्रतिनिधित्व और भागीदारी होनी चाहिए। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि सभी हितधारकों के हितों को ध्यान में रखा जाए और सभी की आवाज, विशेष रूप से महिलाओं की आवाज समिति द्वारा सुनी और समझी जाए। 

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