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इंजीनियरिंग की ऐसी चूकें, जो बनीं जानलेवा: भोपाल में 90 डिग्री का टर्न तो कहीं पुल पर मौत के ब्लाइंड स्पॉट
Sun, 29 Jun 2025 02:44 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sun, 29 Jun 2025 02:44 PM IST
सार
देशभर में गलत इंजीनियरिंग और डिजाइनिंग में लापरवाही के कारण कई ओवरब्रिज और फ्लाईओवर जानलेवा साबित हो रहे हैं। इसमें भोपाल का 90 डिग्री टर्न वाला ब्रिज, नागौर का 70-80 डिग्री के खतरनाक मोड़, गुजरात के तीन ब्लाइंड स्पॉट, बाड़मेर का संकरा पुल, लखनऊ में पुल के बीच अटका मकान और मुंबई के गोखले ब्रिज की ऊंचाई में फर्क, सभी मामले गंभीर सवाल खड़े करते हैं। आइए इस रिपोर्ट में जानते हैं कि आखिर ब्रिज बनाने में कैसे और क्यों इतनी बड़ी समस्याएं आती हैं।
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भोपाल का 90 डिग्री वाला रेल ओवरब्रिज
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
देशभर में सड़कों और पुलों पर हर दिन लाखों लोग सफर करते हैं। कहीं ये सफर आसान बनाते हैं तो कहीं इनकी गलत इंजीनियरिंग लोगों की जान पर बन आती है। बीते कुछ महीनों में देश के अलग-अलग शहरों से ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग की खामियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भोपाल, नागौर, गुजरात, बाड़मेर, लखनऊ और मुंबई… हर जगह एक जैसी लापरवाही दिखी है। आइए, विस्तार से समझते हैं इन खामियों को और उनके खतरों के बारे में...
भोपाल का 90 डिग्री वाला रेल ओवरब्रिज
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ऐशबाग इलाके में 18 करोड़ रुपये की लागत से बना 648 मीटर लंबा रेल ओवरब्रिज अपने अजीब 90 डिग्री टर्न की वजह से चर्चा में आ गया। ये ब्रिज रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम से राहत के लिए बनाया गया था, लेकिन जब खुला तो इसकी बनावट देख लोग हैरान रह गए। सोशल मीडिया पर इसका खूब मजाक बना।
मुख्यमंत्री ने मानी तकनीकी खामी की बात
वहीं जब मुख्यमंत्री मोहन यादव से अमर उजाला ने मध्य प्रदेश संवाद 2025 में सवाल किया, तो इस दौरान उन्होंने माना कि इसमें तकनीकी खामी है और सुधार का काम शुरू हो चुका है। इस मामले में पीडब्ल्यूडी ने बताया कि मेट्रो स्टेशन के पास जमीन की कमी के कारण ऐसा डिजाइन देना पड़ा। हालांकि, अब रेलवे की तरफ से अतिरिक्त जमीन देने पर ब्रिज को फिर से डिजाइन किया जा रहा है। राहत की बात ये रही कि पुल का अभी तक लोकार्पण नहीं किया गया था, जिससे इसका उपयोग नहीं शुरू हो सका था। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि इतनी तीव्र मोड़ पर बड़ा हादसा होना स्वाभाविक है।
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मुख्यमंत्री मोहन यादव की सख्त कार्रवाई
बता दें कि अमर उजाला के मध्य प्रदेश संवाद 2025 में इस मुद्दे के उठने के दो दिन बाद ही सीएम मोहन यादव ने इस विवादित रेल ओवरब्रिज के मामले में सख्त कार्रवाई की। ब्रिज के 90 डिग्री के खतरनाक डिजाइन पर सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए सात इंजीनियरों को बर्खास्त किया और एक के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही, निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि तकनीकी खामियों को पूरी तरह सुधारने के बाद ही ब्रिज का लोकार्पण होगा।
यह भी पढ़ें - MP News: 90 डिग्री वाले ROB को लेकर CM का बड़ा एक्शन, सात इंजीनियर निलंबित, अमर उजाला संवाद में उठा था मुद्दा
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भोपाल का 90 डिग्री वाला रेल ओवरब्रिज
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ऐशबाग इलाके में 18 करोड़ रुपये की लागत से बना 648 मीटर लंबा रेल ओवरब्रिज अपने अजीब 90 डिग्री टर्न की वजह से चर्चा में आ गया। ये ब्रिज रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम से राहत के लिए बनाया गया था, लेकिन जब खुला तो इसकी बनावट देख लोग हैरान रह गए। सोशल मीडिया पर इसका खूब मजाक बना।
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मुख्यमंत्री ने मानी तकनीकी खामी की बात
वहीं जब मुख्यमंत्री मोहन यादव से अमर उजाला ने मध्य प्रदेश संवाद 2025 में सवाल किया, तो इस दौरान उन्होंने माना कि इसमें तकनीकी खामी है और सुधार का काम शुरू हो चुका है। इस मामले में पीडब्ल्यूडी ने बताया कि मेट्रो स्टेशन के पास जमीन की कमी के कारण ऐसा डिजाइन देना पड़ा। हालांकि, अब रेलवे की तरफ से अतिरिक्त जमीन देने पर ब्रिज को फिर से डिजाइन किया जा रहा है। राहत की बात ये रही कि पुल का अभी तक लोकार्पण नहीं किया गया था, जिससे इसका उपयोग नहीं शुरू हो सका था। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि इतनी तीव्र मोड़ पर बड़ा हादसा होना स्वाभाविक है।
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मुख्यमंत्री मोहन यादव की सख्त कार्रवाई
बता दें कि अमर उजाला के मध्य प्रदेश संवाद 2025 में इस मुद्दे के उठने के दो दिन बाद ही सीएम मोहन यादव ने इस विवादित रेल ओवरब्रिज के मामले में सख्त कार्रवाई की। ब्रिज के 90 डिग्री के खतरनाक डिजाइन पर सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए सात इंजीनियरों को बर्खास्त किया और एक के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही, निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि तकनीकी खामियों को पूरी तरह सुधारने के बाद ही ब्रिज का लोकार्पण होगा।
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राजस्थान में 70 से 80 डिग्री का मोड़
राजस्थान के नागौर जिले में बीकानेर रोड रेलवे ओवरब्रिज पर 70 से 80 डिग्री के दो खतरनाक मोड़ हैं। बीते साल जनवरी में एक एसिड टैंकर पलट गया था और पांच बाइक सवारों की मौत हो गई थी। वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो इतने तीव्र मोड़ पर वाहन का संतुलन बिगड़ना तय है और बिना सही ढलान के ऐसे पुल बेहद असुरक्षित होते हैं। इंजीनियरों का कहना है कि इस पुल में मोड़ पर 'सुपर एलिवेशन' यानी गाड़ियों को संतुलित रखने वाली ढलान नहीं दी गई। इससे वाहन एक तरफ झुक जाते हैं। जिसके चलते वे दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं।
बाड़मेर में चौड़ाई कम, मोड़ ज्यादा खतरनाक
एक ऐसा ही खतरनाक पुल राजस्थान के बाड़मेर जिले में भी है। बाड़मेर के चौहटन रोड पर बना ओवरब्रिज भी इंजीनियरिंग की बड़ी लापरवाही का उदाहरण है। इसे कम से कम 10 मीटर चौड़ा होना था, लेकिन 7.4 मीटर में ही बना दिया गया। साथ ही, चढ़ाई और ढलान वाले हिस्से में घुमावदार मोड़ देने की बजाय सीधा 90 डिग्री का तीव्र मोड़ दे दिया गया। इंजीनियर मानते हैं कि कम चौड़ाई और इतने तीव्र मोड़ पर बड़े वाहनों का निकलना बेहद मुश्किल होता है। यह स्थान हादसों का 'हॉटस्पॉट' बन चुका है।
यह भी पढ़ें - नब्बे डिग्री का मोड़: अमर उजाला संवाद में सीएम ने कहा- खामियां सुधारेंगे; ऐशबाग ब्रिज मामले में अब आगे क्या
एक ब्रिज पर तीन-तीन ब्लाइंड स्पॉट
गुजरात के सुरेंद्रनगर में एक ब्रिज पर 45 और 90 डिग्री के ऐसे तीखे मोड़ हैं कि वहां तीन बड़े ब्लाइंड स्पॉट बन गए हैं। इंजीनियरों के अनुसार, चढ़ाई-उतराई के दौरान 45 डिग्री का मोड़ है, जहां भारी वाहनों के मोड़ लेते समय आगे का दृश्य बाधित होता है। वहीं, ब्रिज के बीचों-बीच दोनों तरफ 90-90 डिग्री के मोड़ हैं। इसी कारण एक छात्रा की जान जा चुकी है। वैज्ञानिक तौर पर जब मोड़ इतने तीखे होते हैं तो ड्राइवर को सामने का दृश्य साफ नहीं दिखता, जिससे हादसे की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
राजस्थान के नागौर जिले में बीकानेर रोड रेलवे ओवरब्रिज पर 70 से 80 डिग्री के दो खतरनाक मोड़ हैं। बीते साल जनवरी में एक एसिड टैंकर पलट गया था और पांच बाइक सवारों की मौत हो गई थी। वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो इतने तीव्र मोड़ पर वाहन का संतुलन बिगड़ना तय है और बिना सही ढलान के ऐसे पुल बेहद असुरक्षित होते हैं। इंजीनियरों का कहना है कि इस पुल में मोड़ पर 'सुपर एलिवेशन' यानी गाड़ियों को संतुलित रखने वाली ढलान नहीं दी गई। इससे वाहन एक तरफ झुक जाते हैं। जिसके चलते वे दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं।
बाड़मेर में चौड़ाई कम, मोड़ ज्यादा खतरनाक
एक ऐसा ही खतरनाक पुल राजस्थान के बाड़मेर जिले में भी है। बाड़मेर के चौहटन रोड पर बना ओवरब्रिज भी इंजीनियरिंग की बड़ी लापरवाही का उदाहरण है। इसे कम से कम 10 मीटर चौड़ा होना था, लेकिन 7.4 मीटर में ही बना दिया गया। साथ ही, चढ़ाई और ढलान वाले हिस्से में घुमावदार मोड़ देने की बजाय सीधा 90 डिग्री का तीव्र मोड़ दे दिया गया। इंजीनियर मानते हैं कि कम चौड़ाई और इतने तीव्र मोड़ पर बड़े वाहनों का निकलना बेहद मुश्किल होता है। यह स्थान हादसों का 'हॉटस्पॉट' बन चुका है।
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एक ब्रिज पर तीन-तीन ब्लाइंड स्पॉट
गुजरात के सुरेंद्रनगर में एक ब्रिज पर 45 और 90 डिग्री के ऐसे तीखे मोड़ हैं कि वहां तीन बड़े ब्लाइंड स्पॉट बन गए हैं। इंजीनियरों के अनुसार, चढ़ाई-उतराई के दौरान 45 डिग्री का मोड़ है, जहां भारी वाहनों के मोड़ लेते समय आगे का दृश्य बाधित होता है। वहीं, ब्रिज के बीचों-बीच दोनों तरफ 90-90 डिग्री के मोड़ हैं। इसी कारण एक छात्रा की जान जा चुकी है। वैज्ञानिक तौर पर जब मोड़ इतने तीखे होते हैं तो ड्राइवर को सामने का दृश्य साफ नहीं दिखता, जिससे हादसे की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
लखनऊ में पुल निर्माण में मकान बना बाधा
- फोटो : अमर उजाला वीडियो ग्रैब
पुल के बीच अटक गया मकान
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में केसरीखेड़ा- कृष्णानगर को जोड़ने वाला ओवरब्रिज सिर्फ एक मकान की वजह से आठ महीने से अधर में लटका है। 74 करोड़ की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट बढ़ती लागत के कारण अब 84 करोड़ पर पहुंच चुका है। स्थानीय लोग ट्रैफिक जाम से परेशान हैं। सवाल ये है कि क्या पुल के बीच मकान आने से बचा जा सकता था? एक्सपर्ट्स कहते हैं कि शुरुआती डिजाइनिंग में साफ प्लानिंग न होने से ऐसी स्थितियां बनती हैं। एलडीए सिर्फ नोटिस चस्पा करता है, पर मकान हटाने की ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
यह भी पढ़ें - MP News: भोपाल का 90 डिग्री मोड़ वाला ब्रिज बना सेल्फी स्पॉट, देखने पहुंच रहे लोग, अब PWD करेगा री-डिजाइन
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में केसरीखेड़ा- कृष्णानगर को जोड़ने वाला ओवरब्रिज सिर्फ एक मकान की वजह से आठ महीने से अधर में लटका है। 74 करोड़ की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट बढ़ती लागत के कारण अब 84 करोड़ पर पहुंच चुका है। स्थानीय लोग ट्रैफिक जाम से परेशान हैं। सवाल ये है कि क्या पुल के बीच मकान आने से बचा जा सकता था? एक्सपर्ट्स कहते हैं कि शुरुआती डिजाइनिंग में साफ प्लानिंग न होने से ऐसी स्थितियां बनती हैं। एलडीए सिर्फ नोटिस चस्पा करता है, पर मकान हटाने की ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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फ्लाइओवर से कनेक्शन में इतने फीट का फर्क
मुंबई के अंधेरी इलाके में गोखले ब्रिज को दोबारा बनाने में 90 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसे एक फ्लाइओवर से जोड़ना था, लेकिन दोनों की ऊंचाई में छह फीट का फर्क रह गया। नतीजा, बीएमसी की जमकर किरकिरी हुई। ये ब्रिज 2018 में हादसे के बाद बंद कर दिया गया था। दो लोगों की मौत और तीन घायल हुए थे। अब इसे 11 मई 2025 तक पूरी तरह शुरू करने का दावा किया गया है। हालांकि, इंजीनियरिंग की ये चूक फिर से लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है।
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मुंबई के अंधेरी इलाके में गोखले ब्रिज को दोबारा बनाने में 90 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसे एक फ्लाइओवर से जोड़ना था, लेकिन दोनों की ऊंचाई में छह फीट का फर्क रह गया। नतीजा, बीएमसी की जमकर किरकिरी हुई। ये ब्रिज 2018 में हादसे के बाद बंद कर दिया गया था। दो लोगों की मौत और तीन घायल हुए थे। अब इसे 11 मई 2025 तक पूरी तरह शुरू करने का दावा किया गया है। हालांकि, इंजीनियरिंग की ये चूक फिर से लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है।
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