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ED का बड़ा फैसला: इस वित्त वर्ष 500 चार्जशीट दाखिल करने का लक्ष्य, अब एक से दो साल में पूरी होगी मामलों की जांच

Sun, 22 Feb 2026 05:07 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Sun, 22 Feb 2026 05:07 PM IST
सार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस वित्त वर्ष में धन शोधन के मामलों में 500 चार्जशीट दाखिल करने का लक्ष्य रखा है। एजेंसी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि केस दर्ज होने के एक से दो साल के भीतर जांच पूरी की जाए। यह फैसला गुवाहाटी में हुई जोनल अधिकारियों की बैठक में लिया गया।

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Enforcement Directorate target 500 chargesheet money laundering pmla investigation timeline guwahati meet
ईडी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन के मामलों में तेजी लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने मौजूदा वित्त वर्ष में 500 चार्जशीट दाखिल करने का लक्ष्य तय किया है। साथ ही, जांच अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि केस दर्ज होने के बाद जांच को एक से दो साल के अंदर पूरा कर लिया जाए। हालांकि, बहुत पेचीदा मामलों में इसमें छूट मिल सकती है।
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यह फैसला पिछले साल 19 से 21 दिसंबर के बीच असम के गुवाहाटी में हुई जोनल अधिकारियों की 34वीं तिमाही बैठक में लिया गया। इस बैठक की अध्यक्षता ईडी डायरेक्टर राहुल नवीन ने की। एजेंसी अब दिल्ली से बाहर हर तीन महीने में ऐसी बैठकें कर रही है। इससे पहले केवड़िया (गुजरात) और श्रीनगर में बैठकें हुई थीं। गुवाहाटी में सम्मेलन आयोजित करना पूर्वोत्तर क्षेत्र की रणनीतिक और परिचालन अहमियत को भी दर्शाता है। यह बैठक मौजूदा वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले आखिरी समीक्षा बैठक थी।
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जांच में तेजी और जिम्मेदारी पर जोर
बैठक में अधिकारियों को बताया गया कि पुराने लंबित मामलों को खत्म करने और नई जांच को समय पर पूरा करने के लिए यह लक्ष्य जरूरी है। उन्हें निर्देश दिया गया कि जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए, समय पर अभियोजन शिकायत दाखिल हों और कुर्की या जुर्माने जैसी कार्रवाई कानूनी रूप से ठोस हो। पीएमएलए कानून के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल सावधानी, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ करने, समन और कानूनी नोटिस केवल स्पष्ट आवश्यकता और उचित आधार पर जारी करने पर जोर दिया गया।

इन अपराधों पर रहेगी खास नजर
बैठक में कई प्राथमिकता वाले मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें विदेशों में छिपी अवैध संपत्ति का पता लगाना, गलत इस्तेमाल हो रहे ट्रेड चैनलों की पहचान करना, व्यापार के जरिए धन शोधन और दिवालियापन कानून (आईबीसी) के दुरुपयोग को रोकना शामिल है। इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट, साइबर फ्रॉड, अवैध सट्टेबाजी, ऑनलाइन गेमिंग और शेयर बाजार में हेराफेरी जैसे मामलों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। विदेशी फंडिंग के उन रास्तों पर भी नजर रखने को कहा गया जिनका इस्तेमाल अस्थिरता फैलाने या देश विरोधी गतिविधियों के लिए हो सकता है।

इंटरपोल, भारतपोल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
अधिकारियों को इंटरपोल के साथ-साथ घरेलू 'भारतपोल' प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई, जिसमें अपराधियों के काम करने के तरीकों की जानकारी साझा करने के लिए 'पर्पल नोटिस' जारी करना शामिल है। दूसरे देशों के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (एमएलएटी) लेटर रोगेटरी और प्रत्यर्पण प्रक्रियाओं का पूरा इस्तेमाल करने तथा विदेशी एजेंसियों के साथ पेशेवर संपर्क मजबूत करने पर जोर दिया गया, ताकि सीमा पार धन शोधन और संपत्ति वसूली मामलों में तेजी लाई जा सके।


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चुनौतियां और समय सीमा
अधिकारियों को अब निरस्त हो चुके फेरा (एफईआरए) कानून के तहत लंबित सभी मामलों को 31 मार्च तक निपटाने का निर्देश दिया गया। बैठक में जांच में देरी, कुछ राज्यों में पुलिस का सीमित सहयोग, मैनपावर की कमी, दूरदराज क्षेत्रों में लॉजिस्टिक दिक्कतें, जमीन रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की कमी और डिजिटल संपत्तियों के मूल्यांकन जैसी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।

बैठक के दौरान इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (आईबीबीआई), फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू), इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) सहित अन्य केंद्रीय एजेंसियों ने विषय आधारित प्रस्तुतियां भी दीं।

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