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ED: ईडी ने एफसीआरए उल्लंघन मामले में लाइफ मिशन प्रोजेक्ट के पूर्व सीईओ से की पूछताछ, करोड़ों का हुआ था घोटाला
Sat, 18 Feb 2023 01:53 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
पीटीआई, कोच्चि
पीटीआई, कोच्चि
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Sat, 18 Feb 2023 01:53 AM IST
सार
माकपा के राज्य सचिव एम वी गोविंदन ने कहा कि उनकी पार्टी का मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के पूर्व प्रधान सचिव एम शिवशंकर से कोई संबंध नहीं है।
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प्रवर्तन निदेशालय।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को लाइफ मिशन प्रोजेक्ट के पूर्व सीईओ यू वी जोस से केरल सरकार की फ्लैगशिप परियोजना में विदेशी अंशदान के मामले में पूछताछ की।
केरल के त्रिशूर जिले के वडक्कनचेरी में केरल सरकार के लाइफ मिशन प्रोजेक्ट के सिलसिले में जोस से करीब नौ घंटे तक पूछताछ की। माकपा के राज्य सचिव एम वी गोविंदन ने कहा कि उनकी पार्टी का मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के पूर्व प्रधान सचिव एम शिवशंकर से कोई संबंध नहीं है। गोविंदन ने कुछ लोगों पर शिव शंकर को उनकी पार्टी से जोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया। गोविंदन ने संवाददाताओं से कहा, शिवशंकर से उनका कोई लेना-देना नहीं हैं।
सीएम के पूर्व प्रधान सचिव को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है ईडी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बताया कि केरल के मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव एम शिवशंकर ने 2019 के लाइफ मिशन घोटाले में कथित रूप से रिश्वत के रूप में कमीशन जुटाने में सक्रिय सहयोग दिया। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें इससे पहले 2020 में एक राजनयिक सामान के माध्यम से सोने की कथित तस्करी से जुड़े धन शोधन मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था। लाइफ (आजीविका समावेशन वित्तीय सशक्तिकरण) मिशन से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सीबीआई की प्राथमिकी और केरल सरकार के सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) की शिकायत से जुड़ा है, जो यूनिटेक बिल्डर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और साने वेंचर्स एलएलपी के खिलाफ है। मामला लाइफ मिशन परियोजना से कुछ व्यक्तियों द्वारा प्राप्त संदिग्ध आर्थिक लाभ और कुछ लोक सेवकों सहित विभिन्न व्यक्तियों द्वारा प्राप्त अवैध रिश्वत से जुड़ा है।
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क्या है मामला
यह मामला राज्य सरकार की LIFE मिशन परियोजना से संबंधित है। LIFE मिशन योजना के माध्यम से त्रिशूर जिले के वडक्कनचेरी में 140 परिवारों के लिए घर बनाने करार किया गया था। इस योजना कि लिए 18.50 करोड़ रुपये में से 14.50 करोड़ रुपये रेड क्रीसेंट द्वारा संयुक्त अरब अमीरात वाणिज्य दूतावास के माध्यम से दिए गए हैं। अनुबंध में शेष राशि का उपयोग करके एक स्वास्थ्य देखभाल केंद्र के निर्माण का उल्लेख किया गया है। UNITAC के प्रबंध निदेशक संतोष एपन ने बताया था कि स्वप्ना सुरेश सहित आरोपियों ने प्रोजेक्ट के लिए 4.48 करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी। आरोपी स्वप्ना सुरेश और सरिथ पीएस ने आरोप लगाया कि इसमें शिवशंकर का हाथ है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डक्कनचेरी लाइफ मिशन मामले में स्वप्ना सुरेश के बैंक लॉकर से लगभग करीब एक करोड़ रुपये मिले थे। स्वप्ना सुरेश ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया था, यह रकम लाइफ मिशन में शिवशंकर को रिश्वत में मिली है। लेकिन तीन दिनों तक लगातार पूछताछ के बावजूद शिवशंकर ने अपराध कबूल नहीं किया। लेकिन बाद में ईडी ने पर्याप्त सबूत मिलने और उनके परस्पर विरोधी बयानों के कारण गिरफ्तारी की।
चौथी बार हुई शिवशंकर की गिरफ्तारी
केंद्रीय एजेंसियों ने शिवशंकर को चौथी बार गिरफ्तार किया है। इससे पहले 28 अक्टूबर 2020 को ईडी ने सोने की तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। एनआईए ने 25 नवंबर को सोने की तस्करी के एक मामले में उन्हें गिरफ्तार किया। 20 जनवरी 2021 को कस्टम ने उसे डॉलर तस्करी मामले में गिरफ्तार भी किया था। शिवशंकर, जिन्हें लगातार 69 दिन जेल में बिताने के बाद रिहा किया गया था। उन्हें सेवा से निलंबित कर दिया गया था लेकिन बाद में बहाल कर दिया गया।
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केरल के त्रिशूर जिले के वडक्कनचेरी में केरल सरकार के लाइफ मिशन प्रोजेक्ट के सिलसिले में जोस से करीब नौ घंटे तक पूछताछ की। माकपा के राज्य सचिव एम वी गोविंदन ने कहा कि उनकी पार्टी का मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के पूर्व प्रधान सचिव एम शिवशंकर से कोई संबंध नहीं है। गोविंदन ने कुछ लोगों पर शिव शंकर को उनकी पार्टी से जोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया। गोविंदन ने संवाददाताओं से कहा, शिवशंकर से उनका कोई लेना-देना नहीं हैं।
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सीएम के पूर्व प्रधान सचिव को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है ईडी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बताया कि केरल के मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव एम शिवशंकर ने 2019 के लाइफ मिशन घोटाले में कथित रूप से रिश्वत के रूप में कमीशन जुटाने में सक्रिय सहयोग दिया। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें इससे पहले 2020 में एक राजनयिक सामान के माध्यम से सोने की कथित तस्करी से जुड़े धन शोधन मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था। लाइफ (आजीविका समावेशन वित्तीय सशक्तिकरण) मिशन से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सीबीआई की प्राथमिकी और केरल सरकार के सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) की शिकायत से जुड़ा है, जो यूनिटेक बिल्डर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और साने वेंचर्स एलएलपी के खिलाफ है। मामला लाइफ मिशन परियोजना से कुछ व्यक्तियों द्वारा प्राप्त संदिग्ध आर्थिक लाभ और कुछ लोक सेवकों सहित विभिन्न व्यक्तियों द्वारा प्राप्त अवैध रिश्वत से जुड़ा है।
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क्या है मामला
यह मामला राज्य सरकार की LIFE मिशन परियोजना से संबंधित है। LIFE मिशन योजना के माध्यम से त्रिशूर जिले के वडक्कनचेरी में 140 परिवारों के लिए घर बनाने करार किया गया था। इस योजना कि लिए 18.50 करोड़ रुपये में से 14.50 करोड़ रुपये रेड क्रीसेंट द्वारा संयुक्त अरब अमीरात वाणिज्य दूतावास के माध्यम से दिए गए हैं। अनुबंध में शेष राशि का उपयोग करके एक स्वास्थ्य देखभाल केंद्र के निर्माण का उल्लेख किया गया है। UNITAC के प्रबंध निदेशक संतोष एपन ने बताया था कि स्वप्ना सुरेश सहित आरोपियों ने प्रोजेक्ट के लिए 4.48 करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी। आरोपी स्वप्ना सुरेश और सरिथ पीएस ने आरोप लगाया कि इसमें शिवशंकर का हाथ है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डक्कनचेरी लाइफ मिशन मामले में स्वप्ना सुरेश के बैंक लॉकर से लगभग करीब एक करोड़ रुपये मिले थे। स्वप्ना सुरेश ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया था, यह रकम लाइफ मिशन में शिवशंकर को रिश्वत में मिली है। लेकिन तीन दिनों तक लगातार पूछताछ के बावजूद शिवशंकर ने अपराध कबूल नहीं किया। लेकिन बाद में ईडी ने पर्याप्त सबूत मिलने और उनके परस्पर विरोधी बयानों के कारण गिरफ्तारी की।
चौथी बार हुई शिवशंकर की गिरफ्तारी
केंद्रीय एजेंसियों ने शिवशंकर को चौथी बार गिरफ्तार किया है। इससे पहले 28 अक्टूबर 2020 को ईडी ने सोने की तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। एनआईए ने 25 नवंबर को सोने की तस्करी के एक मामले में उन्हें गिरफ्तार किया। 20 जनवरी 2021 को कस्टम ने उसे डॉलर तस्करी मामले में गिरफ्तार भी किया था। शिवशंकर, जिन्हें लगातार 69 दिन जेल में बिताने के बाद रिहा किया गया था। उन्हें सेवा से निलंबित कर दिया गया था लेकिन बाद में बहाल कर दिया गया।