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सख्ती: 2029 से बीएस-7 टायरों व ब्रेक तक का प्रदूषण मापा जाएगा, तीन चरणों में लागू होगा प्रस्ताव

Thu, 15 Oct 2026 03:40 AM IST
नितिन गौतम अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 15 Oct 2026 03:40 AM IST
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emission standards 2029 bs7 norms to measure pollution from tyres and brakes implemented in three phases
वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
केंद्र सरकार देशभर में अप्रैल, 2029 से चरणबद्ध ढंग से नए भारत स्टेज-7 (बीएस-7) उत्सर्जन मानकों को लागू करने की तैयारी में है। नए मानक वैश्विक स्तर पर लागू यूरो-7 नियमों के अनुकूल होंगे। सड़क परिवहन मंत्रालय ने सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में संशोधन के मसौदे पर लोगों से 30 दिनों में सुझाव मांगे हैं। बीएस-7 में हानिकारक प्रदूषकों पर पहले से ज्यादा सख्त प्रतिबंध लगेंगे। शुरुआत में इन्हें सभी कारों व एसयूवी पर लागू किया जाएगा। 2030 से छोटे मालवाहक वाहनों व अप्रैल 2031 से बसों व भारी वाणिज्यिक वाहनों पर लागू किया जाएगा। दोपहिया के लिए नियमों की घोषणा बाद में होगी। 
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अप्रैल 2029 से नए उत्सर्जन मानक लागू होंगे
मसौदे में अप्रैल 2029 से कारों के लिए एग्जॉस्ट उत्सर्जन, ईंधन, बिजली खपत व बैटरी की क्षमता से जुड़े नियम लागू करने का प्रस्ताव है। कार्बन मोनोऑक्साइड की सीमा पेट्रोल इंजन के लिए 1,000 व डीजल इंजन के लिए 500 मिलीग्राम प्रति किमी रखी गई है।
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सड़क पर भी उत्सर्जन जांच कंपनियां सिर्फ प्रयोगशाला जांच के आधार पर मानकों के पालन का प्रमाण नहीं देंगी। वाहनों में ऑन बोर्ड मॉनिटरिंग सिस्टम गाड़ी के सड़क पर चलते वक्त वास्तविक उत्सर्जन की निगरानी करेगा।
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ब्रेक व टायर से निकलने वाले कणों पर रोक : 1 अप्रैल 2031 से ब्रेक-पार्टिकल उत्सर्जन सीमा लागू होगी। ईवी के लिए ब्रेक-पार्टिकल सीमा 3 मिलीग्राम प्रति किमी व अन्य पावरट्रेन श्रेणियों के लिए 7 मिलीग्राम प्रति किमी है।

ईवी की बैटरी की न्यूनतम क्षमता : इलेक्ट्रिक व प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों की बैटरी को 5 साल या एक लाख किमी तक 75% और 8 या 1.6 लाख किमी तक 67% प्रदर्शन क्षमता बनाए रखनी होगी।

एन्वायरन्मेंटल व्हीकल पासपोर्ट मिलेगा : इसके जरिये वाहन के उत्सर्जन, ईंधन या बिजली की खपत और बैटरी की सेहत से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।

अप्रैल 2029 से नए उत्सर्जन मानक लागू होंगे : मसौदे में अप्रैल 2029 से कारों के लिए एग्जॉस्ट उत्सर्जन, ईंधन, बिजली खपत व बैटरी की क्षमता से जुड़े नियम लागू करने का प्रस्ताव है। कार्बन मोनोऑक्साइड की सीमा पेट्रोल इंजन के लिए 1,000 व डीजल इंजन के लिए 500 मिलीग्राम प्रति किमी रखी गई है।

बीएस-6 से बड़ा दायरा
बीएस-6  में केवल साइलेंसर से निकलने वाले धुएं व हानिकारक गैसों की निगरानी की जाती थी,  पर बीएस-7 का दायरा काफी बड़ा है। पहली बार ईवी और हाइब्रिड गाड़ियों की बैटरी की टिकाऊ क्षमता और उम्र के भी न्यूनतम मानक तय किए जाएंगे।

पुरानी गाड़ियों पर असर नहीं : नए नियम अप्रैल 2029 के बाद बनने वाले वाहनों पर लागू होंगे। अगर आप अभी बीएस-6 या पुरानी गाड़ी चला रहे हैं, तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
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