चुनावी चंदा: नीतीश कुमार की पार्टी का दावा- लिफाफे में ₹10 करोड़ के अज्ञात बॉन्ड आए, जदयू के खजाने में गए पैसे
इलेक्टोरल बॉन्ड से मिलने वाले चुनावी चंदे के बारे में रोचक जानकारी सामने आई है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी का दावा है कि उनके कार्यालय में लिफाफे में बंद 10 करोड़ रुपये मूल्य के बॉन्ड अज्ञात स्रोत से आए। पार्टी ने कहा कि इस बॉन्ड को भुनाने के बाद पूरे पैसे चंदे के तौर पर जदयू के खजाने में जमा हुए।
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इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए मिलने वाला चंदा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार में सत्ताधारी पार्टी- जनता दल यूनाइटेड (JDU) को 10 करोड़ रुपये का अज्ञात चंदा मिला है। बिहार में जदयू के कार्यालय में मिले अज्ञात चंदे के बारे में जदयू ने चुनाव आयोग को बताया कि लगभग पांच साल पहले- साल 2019 में उनके दफ्तर पर लिफाफे में बंद 10 करोड़ रुपये का अज्ञात बॉन्ड पहुंचा। पार्टी ने आयोग को यह भी बताया कि उसने बॉन्ड को चुनावी चंदे के रूप में भुनाया और पूरी राशि जदयू के बैंक खाते में गई। हालांकि, पार्टी ने स्वीकार किया कि उसके पास अभी भी बॉन्ड खरीदने वाले के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
चुनाव आयोग ने रविवार को विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा सौंपे गए सैकड़ों सीलबंद लिफाफों का खुलासा किया। बिहार की सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा की गई फाइलिंग से पता चला कि उसे कुल 24 करोड़ रुपये से अधिक के चुनावी बांड मिले हैं। पार्टी ने क्रमशः एक करोड़ रुपये और दो करोड़ रुपये के बांड के लिए दानदाताओं के रूप में भारती एयरटेल और श्री सीमेंट के नामों को भी उजागर किया।
हैदराबाद और पटना में जारी किए गए बांड
एक अन्य फाइलिंग में, जेडी (यू) ने इन बांडों के माध्यम से कुल 24.4 करोड़ रुपये के दान का खुलासा किया, जिनमें से कई हैदराबाद और कोलकाता में एसबीआई शाखाओं से जारी किए गए थे और कुछ पटना में जारी किए गए थे।
हालांकि, सबसे दिलचस्प फाइलिंग पार्टी के बिहार कार्यालय द्वारा की गई थी जिसमें कहा गया था कि उसे 3 अप्रैल, 2019 को अपने पटना कार्यालय में प्राप्त बांड के दाताओं के विवरण के बारे में जानकारी नहीं थी, और न ही उसने जानने की कोशिश की क्योंकि उस समय उस समय सुप्रीम कोर्ट से कोई आदेश नहीं था।
जेडीयू ने कहा, 'कोई व्यक्ति 03 अप्रैल 2019 को पटना में हमारे कार्यालय में आया और एक सीलबंद लिफाफा दिया। जब इसे खोला गया तो हमें चुनावी बांड का एक गुच्छा मिला, जिसमें प्रत्येक एक करोड़ रुपये के 10 बांड थे। इसलिए ऐसी स्थिति को देखते हुए हम दानदाताओं के बारे में अधिक जानकारी देने में असमर्थ हैं।'