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सुप्रीम कोर्ट के बाद आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों पर चुनाव आयोग भी सख्त
Sat, 07 Mar 2020 09:51 PM IST
अनवर अंसारी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Sat, 07 Mar 2020 09:51 PM IST
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चुनाव आयोग (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि राजनीतिक दलों को अपराधी छवि वाले उम्मीदवारों के चयन के साथ ही अपनी जबावदेही सुनिश्चित करनी होगी। चुनाव आयोग ने सुप्रीमकोर्ट के आदेश के आधार पर अपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को लेकर नए मानकों की घोषणा कर दी है। ईसीआई ने कहा है कि अगर राजनीतिक दल नहीं चेते तो कड़ी कार्रवाई के अलावा उनकी मान्यता भी रद्द हो सकती है।
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अब राजनीतिक दलों को अपराधिक उम्मीदवार के अपराधिक इतिहास का ब्यौरा उम्मीदवारी घोषित होने के 48 घंटे के भीतर अखबार में विज्ञापन देकर सार्वजनिक करना होगा। उस उम्मीदवार और उसके अपराधिक इतिहास का ब्यौरा पार्टी के सोशल मीडिया में स्टेटस में अपडेट करना होगा।
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इसके अलावा चुनाव आयोग को 72 घंटे के भीतर उसके बारे में जानकारी तुरंत प्रभाव से देना अनिवार्य हो गया है। ऐसा न करने पर राजनीतिक दल उच्चतम न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई के जिम्मेदार होंगे। अपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों के चयन के मामले में आयोग के नियमों की पालना न करने पर राजनीतिक दलों की मान्यता भी चुनाव आयोग समाप्त कर सकेगा।
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कुल मिलाकर चुनाव आयोग ने सख्त दिशा-निर्देशों के माध्यम से अपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने वाले दलों पर शिकंजा कस दिया है। आयोग के आदेश में कहा गया है कि उम्मीदवारों विरुद्ध दर्ज लंबित मामलों केस डायरी कोर्ट में चल रहे केस का नंबर और उस उम्मीदवार को चुनने की वजह भी बतानी होगी। इसके अलावा उस उम्मीदवार की शैक्षिक योग्यता, उपलब्धियां और स्पष्ट करना होगा की उसकी अपराधिक छवि उसकी जीत का आधार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट अपराधिक छवि के उम्मीदवारों को लेकर खासा सख्त है। यही वजह है कि कोर्ट ने 10 अक्तूबर को इसके लिए पहला आदेश, 19 मार्च 2019 को दूसरा और 13 फरवरी 2020 को तीसरा आदेश देकर इस तरह की उम्मीदवारी को कम करने के लिए चुनाव आयोग से भी नियमों को सख्त करने के लिए आदेशित किया था। इसके बाद शुक्रवार को चुनाव आयोग ने देर शाम एक आदेश जारी कर नियमों को सख्त कर राजनीति दलों को इसकी पालना अनिवार्यता से करने को कहा है।