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ECI: बंगाल में मतदाता सूची संशोधन के बीच तबादलों पर क्यों भड़का चुनाव आयोग? राज्य सरकार को दे दी सख्त चेतावनी

Tue, 27 Jan 2026 11:09 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: हिमांशु चंदेल Updated Tue, 27 Jan 2026 11:09 PM IST
सार

Election Commission On Transfers: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान अधिकारियों के तबादलों पर चुनाव आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई है। आयोग ने कहा कि बिना पूर्व अनुमति किए गए तबादले उसके निर्देशों का उल्लंघन हैं। आइए, विस्तार से जानते हैं कि इस मामले में चुनाव आयोग क्या कुछ कहा है।

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Election Commission flags transfers Electoral Roll Observers during ongoing SIR in Bengal
चुनाव आयोग - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान अधिकारियों के तबादलों को लेकर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। चुनाव आयोग ने कहा है कि मतदाता सूची से जुड़े अधिकारियों के तबादले आयोग की पूर्व अनुमति के बिना किए गए, जो उसके निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। आयोग ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। इससे प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

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चुनाव आयोग ने किसे लिखा पत्र?
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र लिखकर आपत्ति जताई है। आयोग ने याद दिलाया कि 27 अक्टूबर 2025 को राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की घोषणा की गई थी। इस प्रक्रिया के दौरान यह साफ निर्देश दिया गया था कि मतदाता सूची संशोधन से जुड़े किसी भी अधिकारी का तबादला आयोग की पूर्व मंजूरी के बिना नहीं किया जाएगा।
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किन अधिकारियों के तबादलों पर उठे सवाल?

  • आयोग ने बताया कि 28 नवंबर 2025 को उसने 12 इलेक्टोरल रोल ऑब्जर्वर और पांच डिविजनल कमिश्नरों की नियुक्ति की थी।
  • अश्विनी कुमार यादव, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर के ईआरओ।
  • रंधीर कुमार, उत्तर 24 परगना और कोलकाता उत्तर के ईआरओ।
  • स्मिता पांडे, पश्चिम बर्धमान, पूर्व बर्धमान और बीरभूम की ईआरओ।
  • इन अधिकारियों के तबादले 1 दिसंबर 2025, 20 जनवरी 2026 और 21 जनवरी 2026 को किए गए, जिनकी आयोग से पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी।


चुनाव आयोग ने इसे गंभीर क्यों माना?

  • चुनाव आयोग ने कहा कि ये सभी अधिकारी एसआईआर के लिए आयोग के अधीन प्रतिनियुक्त माने जाते हैं।
  • बिना अनुमति तबादला आयोग की निष्पक्षता पर असर डाल सकता है।
  • मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
  • इससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
  • आयोग ने इसे 27 अक्टूबर 2025 के निर्देशों का उल्लंघन बताया है।


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राज्य सरकार को क्या संदेश दिया?

आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान उसके आदेशों का सख्ती से पालन होना चाहिए। आयोग का कहना है कि मुख्य सचिव की जिम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि आयोग से जुड़े किसी भी अधिकारी का तबादला उसकी अनुमति के बिना न हो। यह पत्र नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन से स्पीड पोस्ट और ई-मेल के जरिए भेजा गया है।

सूत्रों के मुताबिक, अगर राज्य सरकार संतोषजनक जवाब नहीं देती है, तो चुनाव आयोग और कड़े कदम उठा सकता है। माना जा रहा है कि यह मामला बंगाल में प्रशासन और चुनाव आयोग के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है। आने वाले दिनों में इस पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और आयोग की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।

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