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Election 2023: त्रिपुरा-नगालैंड और मेघालय में कौन सी पार्टी कितनी मजबूत, जानें क्या हैं यहां के समीकरण?
Wed, 18 Jan 2023 03:39 PM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Wed, 18 Jan 2023 03:39 PM IST
सार
Tripura, Nagaland and Meghalaya Election Date Announcement 2023 : नगालैंड विधानसभा का कार्यकाल 12 मार्च, मेघालय विधानसभा का 15 मार्च और त्रिपुरा विधानसभा का कार्यकाल 22 मार्च को समाप्त हो रहा है। त्रिपुरा में इस वक्त भाजपा की सरकार है। वहीं, नगालैंड में एनडीपीपी के नेफ्यू रियो मुख्यमंत्री हैं। मेघालय में एनपीपी के कोनराड संगमा की सरकार है। दोनों राज्यों में भाजपा सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है।
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त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड विधानसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय के लिए विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान हो गया है। त्रिपुरा में 16 फरवरी और नगालैंड-मेघालय में 27 फरवरी को एक-एक चरण में मतदान होगा। तीनों ही राज्यों में 60-60 सदस्यीय विधानसभा है। त्रिपुरा में इस वक्त भाजपा की सरकार है। वहीं, नगालैंड में एनडीपीपी के नेफ्यू रियो मुख्यमंत्री हैं। मेघालय में एनपीपी के कोनराड संगमा की सरकार है। दोनों राज्यों में भाजपा सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है। नगालैंड विधानसभा का कार्यकाल 12 मार्च, मेघालय विधानसभा का 15 मार्च और त्रिपुरा विधानसभा का कार्यकाल 22 मार्च को समाप्त हो रहा है।
आइए जानते हैं तीनों राज्यों में कौन सी पार्टी कितनी मजबूत है? मौजूदा समीकरण क्या कहते हैं? 2018 में क्या हुआ था और अब तक क्या-क्या बदला?
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आइए जानते हैं तीनों राज्यों में कौन सी पार्टी कितनी मजबूत है? मौजूदा समीकरण क्या कहते हैं? 2018 में क्या हुआ था और अब तक क्या-क्या बदला?
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त्रिपुरा विधानसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
2018 में कैसे रहे थे तीनों राज्यों के नतीजे?
त्रिपुरा : 2018 में पहली बार बनी थी भाजपा की सरकार
2018 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। भाजपा ने यहां 25 साल से शासन कर रहे लेफ्ट को बेदखल किया था। बिप्लब देब राज्य मुख्यमंत्री बने। 2022 में भाजपा ने देब की जगह मानिक साहा को राज्य की कमान सौंपी। अब साह पर भाजपा को सत्ता में वापसी कराने की जिम्मेदारी होगी।
जिलेवार सीटों का आंकड़ा देखें तो पश्चिम त्रिपुरा में सबसे ज्यादा 14 विधानसभा सीटें हैं। 2018 में इन सभी पर भाजपा और गठबंधन की आईपीएफटी ने कब्जा कर लिया। 14 में से 12 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी, जबकि दो पर आईपीएफटी के उम्मीदवारों ने कब्जा कर लिया था। सिपाहीजाला में सीपीएम का दबदबा देखने को मिला था। यहां की नौ में से पांच सीटों पर सीपीएम के उम्मीदवार चुनाव जीते थे, जबकि तीन पर भाजपा और एक पर आईपीएफटी की जीत हुई थी। गोमती की सात में से पांच और दक्षिण त्रिपुरा की सात में से तीन सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। धलाई में भी भाजपा हावी थी। यहां की छह में से पांच पर भाजपा और एक पर गठबंधन की आईपीएफटी को जीत मिली थी। उत्तर त्रिपुरा, उनाकोटी में सीपीएम और भाजपा ने बराबर सीटें हासिल कीं।
हालांकि, बीते कुछ महीनों से राज्य में सियासी उथलपुथल जारी है। एक तरफ भाजपा ने 2018 में जीत दिलाने वाले बिप्लब कुमार देब को हटाकर मानिक साहा को मुख्यमंत्री बना दिया तो कई नेता पार्टी से अलग भी हो गए। भाजपा नेता हंगशा कुमार त्रिपुरा इस साल अगस्त में अपने 6,000 आदिवासी समर्थकों के साथ टिपरा मोथा में शामिल हो गए। वहीं, आदिवासी अधिकार पार्टी भाजपा विरोधी राजनीतिक मोर्चा बनाने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही कई नेता पार्टियां बदल रहे हैं। हमेशा एक-दूसरे की धुर विरोधी रही कांग्रेस और सीपीएम ने इस बार हाथ मिला लिया है। दोनों ही पार्टियों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का एलान किया है।
त्रिपुरा : 2018 में पहली बार बनी थी भाजपा की सरकार
2018 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। भाजपा ने यहां 25 साल से शासन कर रहे लेफ्ट को बेदखल किया था। बिप्लब देब राज्य मुख्यमंत्री बने। 2022 में भाजपा ने देब की जगह मानिक साहा को राज्य की कमान सौंपी। अब साह पर भाजपा को सत्ता में वापसी कराने की जिम्मेदारी होगी।
जिलेवार सीटों का आंकड़ा देखें तो पश्चिम त्रिपुरा में सबसे ज्यादा 14 विधानसभा सीटें हैं। 2018 में इन सभी पर भाजपा और गठबंधन की आईपीएफटी ने कब्जा कर लिया। 14 में से 12 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी, जबकि दो पर आईपीएफटी के उम्मीदवारों ने कब्जा कर लिया था। सिपाहीजाला में सीपीएम का दबदबा देखने को मिला था। यहां की नौ में से पांच सीटों पर सीपीएम के उम्मीदवार चुनाव जीते थे, जबकि तीन पर भाजपा और एक पर आईपीएफटी की जीत हुई थी। गोमती की सात में से पांच और दक्षिण त्रिपुरा की सात में से तीन सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। धलाई में भी भाजपा हावी थी। यहां की छह में से पांच पर भाजपा और एक पर गठबंधन की आईपीएफटी को जीत मिली थी। उत्तर त्रिपुरा, उनाकोटी में सीपीएम और भाजपा ने बराबर सीटें हासिल कीं।
हालांकि, बीते कुछ महीनों से राज्य में सियासी उथलपुथल जारी है। एक तरफ भाजपा ने 2018 में जीत दिलाने वाले बिप्लब कुमार देब को हटाकर मानिक साहा को मुख्यमंत्री बना दिया तो कई नेता पार्टी से अलग भी हो गए। भाजपा नेता हंगशा कुमार त्रिपुरा इस साल अगस्त में अपने 6,000 आदिवासी समर्थकों के साथ टिपरा मोथा में शामिल हो गए। वहीं, आदिवासी अधिकार पार्टी भाजपा विरोधी राजनीतिक मोर्चा बनाने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही कई नेता पार्टियां बदल रहे हैं। हमेशा एक-दूसरे की धुर विरोधी रही कांग्रेस और सीपीएम ने इस बार हाथ मिला लिया है। दोनों ही पार्टियों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का एलान किया है।
मेघालय विधानसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
मेघालय : चुनाव के बाद गठबंधन करके एनपीपी और भाजपा ने सरकार बना ली थी
2018 में राज्य में नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) और भाजपा गठबंधन की सरकार बनी थी। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। हालांकि, बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई थी। चुनाव में अलग-अलग लडे़ एनपीपी-भाजपा ने गठबंधन किया। एनपीपी के कोनराड संगमा मुख्यमंत्री बने। यहां भी चुनाव से पहले राजनीतिक उथल-पुथल जारी है। यहां तक की गठबंधन सरकार चला रही एनपीपी और भाजपा के बीच भी दरारें दिख रही हैं। हाल ही में दो विधायक एनपीपी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए। कहा जहा रहा है कि 2018 की तरह ही इस बार भी दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे। भाजपा ने नए सिरे से मेघालय में संगठन खड़ा किया है। दूसरी पार्टियों के कई नेताओं को पार्टी में शामिल भी कराया है।
2018 में राज्य में नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) और भाजपा गठबंधन की सरकार बनी थी। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। हालांकि, बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई थी। चुनाव में अलग-अलग लडे़ एनपीपी-भाजपा ने गठबंधन किया। एनपीपी के कोनराड संगमा मुख्यमंत्री बने। यहां भी चुनाव से पहले राजनीतिक उथल-पुथल जारी है। यहां तक की गठबंधन सरकार चला रही एनपीपी और भाजपा के बीच भी दरारें दिख रही हैं। हाल ही में दो विधायक एनपीपी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए। कहा जहा रहा है कि 2018 की तरह ही इस बार भी दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे। भाजपा ने नए सिरे से मेघालय में संगठन खड़ा किया है। दूसरी पार्टियों के कई नेताओं को पार्टी में शामिल भी कराया है।
नगालैंड विधानसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
नगालैंड: यहां विपक्ष ही नहीं बचा, सभी ने मिलकर बना ली सरकार
2018 के विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) में दो टुकड़ों में बंट गई थी। बागियों ने नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (NDPP) बनाई। पार्टी के बड़े नेता और राज्य के मुख्यमंत्री रहे नेफ्यू रियो बागी गुट के साथ चले गए। चुनाव से पहले NPF ने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया। भाजपा और NDPP ने मिलकर चुनाव लड़ा। NDPP को 17 तो भाजपा को 12 सीटों पर जीत मिली। गठबंधन सत्ता में आया और नेफ्यू रियो मुख्यमंत्री बने। नेफ्यू रियो के सीएम बनने के बाद 27 सीट जीतने वाली NPF के ज्यादातर विधायक NDPP में शामिल हो गए। इससे NDPP विधायकों का आंकड़ा 42 पर पहुंच गया। वहीं, NPF के केवल चार विधायक बचे। बाद में NPF ने भी सत्ताधारी गठबंधन को समर्थन दे दिया। मौजूदा समय में राज्य विधानसभा के सभी 60 विधायक सत्तापक्ष में हैं।
इस बार यहां सीट बंटवारे में विवाद हो सकता है। भारतीय जनता पार्टी अभी ज्यादा सीटों की डिमांड कर रही है। यही कारण है कि चुनाव से पहले गठबंधन में दरार पड़ सकती है। कुछ दिन पहले ही गृहमंत्री अमित शाह ने नगालैंड का दौरा किया था। इसके बाद एनपीएफ के नेता कुझोलुजो निएनु का बयान आया था। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री शाह ने नगालैंड चुनाव में भाजपा के लिए ज्यादा सीटें मांगी हैं। कुझोलुजो निएनु ने एक मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में कहा कि एनपीएफ नगालैंड की सबसे पुरानी पार्टी है और अकेले दम पर चुनाव लड़ने में सक्षम है।
शाह से पहले भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी सितंबर में नगालैंड का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने एनडीपीपी के साथ 20:40 के वोट शेयर के साथ चुनावी मैदान में उतरने की बात कही थी। मतलब भाजपा 20 और एनडीपीपी के 40 सीटों पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, अब तक दोनों ही ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
2018 के विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) में दो टुकड़ों में बंट गई थी। बागियों ने नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (NDPP) बनाई। पार्टी के बड़े नेता और राज्य के मुख्यमंत्री रहे नेफ्यू रियो बागी गुट के साथ चले गए। चुनाव से पहले NPF ने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया। भाजपा और NDPP ने मिलकर चुनाव लड़ा। NDPP को 17 तो भाजपा को 12 सीटों पर जीत मिली। गठबंधन सत्ता में आया और नेफ्यू रियो मुख्यमंत्री बने। नेफ्यू रियो के सीएम बनने के बाद 27 सीट जीतने वाली NPF के ज्यादातर विधायक NDPP में शामिल हो गए। इससे NDPP विधायकों का आंकड़ा 42 पर पहुंच गया। वहीं, NPF के केवल चार विधायक बचे। बाद में NPF ने भी सत्ताधारी गठबंधन को समर्थन दे दिया। मौजूदा समय में राज्य विधानसभा के सभी 60 विधायक सत्तापक्ष में हैं।
इस बार यहां सीट बंटवारे में विवाद हो सकता है। भारतीय जनता पार्टी अभी ज्यादा सीटों की डिमांड कर रही है। यही कारण है कि चुनाव से पहले गठबंधन में दरार पड़ सकती है। कुछ दिन पहले ही गृहमंत्री अमित शाह ने नगालैंड का दौरा किया था। इसके बाद एनपीएफ के नेता कुझोलुजो निएनु का बयान आया था। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री शाह ने नगालैंड चुनाव में भाजपा के लिए ज्यादा सीटें मांगी हैं। कुझोलुजो निएनु ने एक मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में कहा कि एनपीएफ नगालैंड की सबसे पुरानी पार्टी है और अकेले दम पर चुनाव लड़ने में सक्षम है।
शाह से पहले भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी सितंबर में नगालैंड का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने एनडीपीपी के साथ 20:40 के वोट शेयर के साथ चुनावी मैदान में उतरने की बात कही थी। मतलब भाजपा 20 और एनडीपीपी के 40 सीटों पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, अब तक दोनों ही ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
विधानसभा चुनाव 2023
- फोटो : Amar Ujala
ये है चुनाव का पूरा शेड्यूल
त्रिपुरा चुनाव के लिए 21 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा। 30 जनवरी तक नामांकन होंगे। 31 जनवरी को नामांकन की स्क्रूटनी होगी। नाम वापसी की आखिरी तिथि दो फरवरी तय की गई है। 16 फरवरी को मतदान होगा और दो मार्च को नतीजे आएंगे। इसी तरह मेघालय और नगालैंड के लिए 31 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी होगा। सात फरवरी तक नामांकन किए जा सकेंगे। आठ जनवरी को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 10 फरवरी तक उम्मीदवार नाम वापस ले पाएंगे। 27 फरवरी को मतदान होना है। दो मार्च को नतीजे आएंगे।
त्रिपुरा चुनाव के लिए 21 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा। 30 जनवरी तक नामांकन होंगे। 31 जनवरी को नामांकन की स्क्रूटनी होगी। नाम वापसी की आखिरी तिथि दो फरवरी तय की गई है। 16 फरवरी को मतदान होगा और दो मार्च को नतीजे आएंगे। इसी तरह मेघालय और नगालैंड के लिए 31 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी होगा। सात फरवरी तक नामांकन किए जा सकेंगे। आठ जनवरी को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 10 फरवरी तक उम्मीदवार नाम वापस ले पाएंगे। 27 फरवरी को मतदान होना है। दो मार्च को नतीजे आएंगे।