Manipur: बिष्णुपुर में पूर्व मुख्यमंत्री के आवास के पास रॉकेट हमला, एक बुजुर्ग की मौत, पांच घायल
एक अधिकारी ने बताया कि जब रॉकेट हमला हुआ तब बुजुर्ग परिसर में कुछ धार्मिक कार्यक्रम में व्यस्त था। इस हमले के बाद मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इस दौरान 13 साल की एक बच्ची समेत पांच लोग भी घायल हुए।
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बीते डेढ़ साल से मणिपुर में हिंसा जारी है। कुकी और मैतेई समुदाय के बीच जारी हिंसा फिलहाल थमती नहीं दिख रही है। इस बीच बिष्णुपुर के मोइरंग इलाके में उग्रवादियों द्वारा किए गए हमले में एक बुजुर्ग की मौत हो गई। इस हमले में अन्य पांच लोग भी घायल हुए। पूर्व मुख्यमंत्री मैरेम्बम कोइरेंग के आवास के परिसर पर रॉकेट गिरा था। जिले में यह दूसरा रॉकेट हमला है।
एक अधिकारी ने बताया कि जब रॉकेट हमला हुआ तब बुजुर्ग परिसर में कुछ धार्मिक कार्यक्रम में व्यस्त था। इस हमले के बाद मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इस दौरान 13 साल की एक बच्ची समेत पांच लोग भी घायल हुए। यह रॉकेट आईएनए मुख्यालय से दो किमी दूर गिरा। इससे पहले दिन में इंफाल से लगभग 45 किमी दूर स्थित ट्रोंग्लाओबी के आवालसीय इलाके में एक ऊंचे स्थान से रॉकेट दागा गया था।
कैसे काम करता है काउंटर ड्रोन सिस्टम
काउंटर ड्रोन तकनीक के पहले चरण में 3 डी रडॉर डिटेक्शन सेंटर ड्रोन को ट्रैक करता है। इसके बाद कैमरे से इसकी विजुअल ट्रेकिंग होती है। कमांड सेंटर इस ड्रोन की फ्रिक्वेंसी का पता लगाता है। इसके बाद रेडियो फ्रिक्वेंसी जैमर दुश्मन के ड्रोन की फ्रिक्वेंसी को जाम कर इसे नीचे गिरा देता है। इस फ्रिक्वेंसी पर दुश्मन ने अगर एक से अधिक ड्रोन भी भेजे होंगे तो वे सभी नीचे गिर जाएंगे। ऐसे में यह तकनीक स्वार्म ड्रोन अटैक में कारगर रहेगी।
ड्रोन हमलों के विरोध में लोगों ने बनाई मानव शृंखला
मणिपुर में जारी ड्रोन हमलों के खिलाफ शुक्रवार को हजारों लोगों ने इम्फाल घाटी के पांच जिलों में मानव शृंखलाएं बनाईं। इन हमलों में दो नागरिकों की मौत हुई है और 12 लोग घायल हुए। प्रदर्शनकारियों ने राज्य में जारी संघर्ष के सरकारी प्रबंधन से भी असंतोष व्यक्त किया। को-ऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (सीओसीओएमआई) की इस रैली में स्कूल और कॉलेज के छात्रों के साथ-साथ महिलाएं भी शामिल हुईं। प्रदर्शनकारियों ने ड्रोन बमबारी को आतंकवादी हमला बताया और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पहले भी हो चुका है ड्रोन हमला
इस घटना के कुछ दिन पहले उग्रवादियों ने इंफाल पश्चिम जिले में ड्रोन से हमला किया था। इस हमले में 23 वर्षीय एक महिला सहित तीन लोग घायल हो गए थे। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उग्रवादियों ने कांगपोकपी जिले के पहाड़ी इलाकों से सेजम चिरांग के निचले इलाके में स्थित गांव पर अंधाधुंध गोलीबारी भी की, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की। यह स्थान कोउत्रुक से तीन किलोमीटर दूर है। यहां रविवार को इसी तरह के ड्रोन के जरिए बम हमले किए गए थे। यहां फायरिंग भी हुई थी, जिसमें दो लोग मारे गए थे और नौ घायल हो गए थे।
डेढ़ साल से हिंसा जारी
बता दें कि मणिपुर में पिछले डेढ़ साल से ही हिंसा जारी है। दरअसल, मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में पिछले साल तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़पें शुरू हुई थीं। राज्य में तब से अब तक कम से कम 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।
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