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बाल संरक्षण गृहों में रह रहे बच्चों की परिवार के पास वापसी सुनिश्चित करें आठ राज्य: एनसीपीसीआर

Sun, 27 Sep 2020 05:01 AM IST
Rajeev Rai न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Sun, 27 Sep 2020 05:01 AM IST
सार

इन राज्यों के संरक्षण गृहों में रह रहे हैं 70 फीसदी से ज्यादा बच्चे
 

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Eight states ensure return of children living in child protection homes to family says NCPCR
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ..

विस्तार

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने आठ राज्यों को निर्देश दिया है कि वे अपने यहां बाल संरक्षण गृहों में रह रहे बच्चों की उनके परिवारों के पास वापसी सुनिश्चित करें। इन राज्यों के संरक्षण गृहों में 70 फीसदी से ज्यादा बच्चे हैं। एनसीपीसीआर ने कहा कि यह हर बच्चे का अधिकार है कि उसका लालन पोषण पारिवारिक माहौल में हो।  

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एनसीपीसीआर ने कहा कि यह फैसला संरक्षण गृहों में रह रहे बच्चों की सुरक्षा की चिंता के मद्देनजर लिया गया है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मिजोरम, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और मेघालय के बाल संरक्षण गृहों में 1.84 लाख (या करीब 72 प्रतिशत) बच्चे हैं। देशभर के बाल संरक्षण गृहों में कुल 2.56 लाख बच्चे हैं। 
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एनसीपीसीआर ने इन राज्यों के जिलाधिकारियों और कलेक्टरों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि बाल संरक्षण गृहों में रह रहे बच्चे अपने परिवार के पास चले जाएं। निर्देश में कहा गया है कि यह काम 100 दिन के अंदर पूरा करने की कोशिश की जाए। इसमें कहा गया है कि जिन बच्चों को उनके परिवार के पास वापस नहीं भेजा जा सकता उन्हें गोद देने की प्रक्रिया शुरू की जाए या फिर पालन गृह में रखा जाए।
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एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा कि यह प्रक्रिया चरणबद्ध रूप में लागू होगी और इसकी शुरुआत इन आठ राज्यों से हो रही है। बाद में इसे देशभर में लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम का सिद्धांत है कि बच्चों को उनके परिवारों के साथ रखा जाए और बाल संरक्षण गृहों में बच्चों को रखना तब अंतिम विकल्प होना चाहिए, जब उन्हें पारिवारिक माहौल देने के दूसरे सभी विकल्पों के लिए प्रयास कर लिए गए हों। 


उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में देखा गया कि कुछ बाल कल्याण समितियां (सीडब्ल्यूसी) परिवार की गरीबी के कारण उन्हें बाल संरक्षण गृह में ही रखने का आदेश दे रही हैं। आप गरीबी की वजह से किसी बच्चे से परिवार के अधिकार को नहीं छीन सकते।

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