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West Bengal: ममता बनर्जी ने मणिपुर हिंसा पर जताई चिंता, कहा- बंगाल के लोगों को निकालने के प्रयास जारी

Sat, 06 May 2023 08:29 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 06 May 2023 08:29 PM IST
सार

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया, मणिपुर से हमें जिस तरह के संदेश और एसओएस मिल रहे हैं, उससे बहुत दुखी हूं। मैं मणिपुर के लोगों और देश के विभिन्न हिस्सों के अन्य लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हूं, जो अब वहां फंसे हुए हैं। 

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Efforts on to evacuate Bengal people stranded in strife-torn Manipur  Mamata banerjee
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी - फोटो : पीटीआई

विस्तार

मणिपुर में आरक्षण को लेकर भड़की हिंसा अब तक थमी नहीं है। सेना, असम राइफल और सीआरपीएफ ने भले ही मोर्चा संभाला हुआ है, मगर उनके सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। इस बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि हिंसा प्रभावित राज्य में फंसे पश्चिम बंगाल के लोगों को निकालने को प्रयास किए जा रहे हैं। बनर्जी ने हिंसक झड़पों पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य सचिव एसके द्विवेदी से स्थिति पर नजर रखने और फंसे हुए लोगों को निकालने के प्रयास करने का आग्रह किया। 

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ममता बनर्जी ने अपने ट्वीट में क्या कहा
मुख्यमंत्री बनर्जी ने ट्वीट किया, "मणिपुर से हमें जिस तरह के संदेश और एसओएस मिल रहे हैं, उससे बहुत दुखी हूं। मैं मणिपुर के लोगों और देश के विभिन्न हिस्सों के अन्य लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हूं, जो अब वहां फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा, बंगाल सरकार लोगों के साथ खड़े होने के लिए प्रतिबद्ध है और उसने मणिपुर सरकार के साथ समन्वय में वहां फंसे लोगों को निकालने के लिए हर संभव प्रयास करने का फैसला किया है। मुख्य सचिव को पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने, संकट और निराशा में लोगों की मदद करने का निर्देश दिया गया है। हम हर समय जनता के साथ हैं। सभी से शांति बनाए रखने का आग्रह करती हूं।"
 

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मदद मांगने वालों के लिए जारी किए हेल्पलाइन नंबर
बनर्जी ने सहायता मांगने वालों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी प्रदान किए। मणिपुर में फंसे पश्चिम बंगाल के लोगों की कुल संख्या फिलहाल उपलब्ध नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि मणिपुर में हुई जातीय हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 54 हो गई है जबकि अनाधिकारिक सूत्रों ने कई लोगों के मारे जाने और 150 से अधिक लोगों के घायल होने की बात कही है। इस बीच, इंफाल घाटी में दुकानें और बाजार खुलने और सड़कों पर कारों के चलने से जनजीवन सामान्य हो गया है।
 

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सबसे पहले तोरबुंग इलाके में भड़की थी हिंसा
ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर (एटीएसयूएम) द्वारा तीन मई को आयोजित 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के दौरान मणिपुर के चुराचंदपुर जिले के तोरबुंग इलाके में पहली बार हिंसा भड़की थी। मणिपुर उच्च न्यायालय ने पिछले महीने राज्य सरकार से मेतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग पर चार सप्ताह के भीतर केंद्र को सिफारिश भेजने को कहा था जिसके बाद नगा और कुकी समेत आदिवासियों ने इस मार्च का आयोजन किया था। पुलिस ने बताया कि तोरबुंग में मार्च के दौरान एक सशस्त्र भीड़ ने मेतेई समुदाय के लोगों पर कथित तौर पर हमला कर दिया, जिसके बाद घाटी के जिलों में जवाबी हमले हुए, जिससे पूरे राज्य में हिंसा बढ़ गई।
 

मणिपुर  की आबादी में 53 फीसदी मेतेई 
कई सूत्रों ने कहा कि समुदायों के बीच लड़ाई में कई लोग मारे गए और लगभग सौ घायल हो गए। हालांकि, पुलिस इस बात की पुष्टि करने से बच रही है। मेतेई लोगों की आबादी लगभग 53 फीसदी है और वे ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। आदिवासी, जिनमें नगा और कुकी शामिल हैं, आबादी का 40 फीसदी हिस्सा हैं और ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं। 
 

पंद्रह महीने बाद बांग्लादेश से लौटा किसान
उधर, राज्य के नादिया जिले का एक किसान पड़ोसी देश बांग्लादेश में पंद्रह महीने बिताने के बाद आझ अपने घर लौट आया। किसान खेत में काम के दौरान गलती से सीमा पार कर बांग्लादेश चला गया था। अधिकारियों ने बताया कि छपरा थाना क्षेत्र के ब्रह्मनगर निवासी नासिर शेख खेत में काम करने के दौरान गलती से बांग्लादेशी क्षेत्र में घुस गया और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) ने उसे पकड़ लिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कई इलाकों में बाड़ नहीं है और दोनों पक्षों के लोग अक्सर अनजाने में एक-दूसरे के क्षेत्र में चले जाते हैं।
 

बांग्लादेश की अदालत ने जेल भेज दिया था नासिर
नासिर शेख ने बताया कि उसे बीजीबी द्वारा पुलिस को सौंप दिया गया था और बाद में एक अदालत के समक्ष पेश किया गया, जिसने उसे 2 महीने के लिए जेल भेज दिया था। हालांकि, उन्हें लगभग 15 महीने तक वहां रहना पड़ा और बांग्लादेश में भारतीय उच्चायोग के हस्तक्षेप के बाद ही घर लौट सके। उन्हें बीजीबी ने गेडे चेक पोस्ट पर बीएसएफ को सौंप दिया। उनके भाई सिराज शेख उन्हें लेने के लिए एक स्थानीय पंचायत सदस्य के साथ चेक पोस्ट पर गए।
 

15 महीने बाद स्वदेश लौट सका किसान
उन्होंने कहा, 'मुझे अच्छा लग रहा है कि मैं 15 महीने बाद स्वदेश लौट सका। बांग्लादेश में रहने के दौरान मेरा व्यवहार अच्छा रहा।' उनके चार बच्चे हैं, जबकि उनकी पत्नी की लगभग सात साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके भाई सिराज ने कहा, नासिर हमारे सात भाइयों में सबसे बड़ा है। वह खेतिहर मजदूर के रूप में काम करता है। उनके तीन बेटे और एक बेटी है, जो गिरफ्तारी के बाद अनाथों की तरह रह रहे थे। हम उनकी वापसी से खुश हैं।

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