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पेपर लीक विवाद: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के 47 अफसर बर्खास्त, कुछ पर होगी कानूनी कार्रवाई
Fri, 24 Jul 2026 07:14 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Fri, 24 Jul 2026 07:14 PM IST
सार
NTA Reform: सरकार ने आज एनटीए पर बड़ी कार्रवाई की है। एनटीए के 47 अफसरों को बर्खास्त कर दिया। कुछ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी तैयारी है। ये एनटीए पर सरकार की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि एनटीए का पूरा कायाकल्प किया जाएगा। ऐसे में सवाल है कि परीक्षा व्यवस्था में क्या-क्या बड़े बदलाव होने वाले हैं? आइए, पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं...
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NTA पर सरकार का बड़ा एक्शन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
2026 नीट पेपर लीक विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में बड़े बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। इसी बीच एनटीए ने 47 अफसरों को भी बर्खास्त कर दिया । सरकार की एनटीए पर ये अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। इनमें से कुछ अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। एनटीए के अधिकारियों का कहना है कि एनटीए का पूरा कायाकल्प किया जाएगा और इसके बाद सुधारात्मक कदम लागू किए जाएंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि एजेंसी की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यह कार्रवाई उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी के पंचायती राज मंत्रालय में तबादले के एक दिन बाद सामने आई है।
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क्या एनटीए में और भी बड़े बदलाव हो सकते हैं?
- संभावना है कि एनटीए के कामकाज में भी व्यापक बदलाव किए जा सकते हैं। एजेंसी की आउटसोर्सिंग व्यवस्था में भी बड़ा सुधार किया जा सकता है। परीक्षा संचालन से जुड़े निजी वेंडर्स और सेवा प्रदाताओं के चयन के नियम सख्त किए जा सकते हैं। पेपर लीक रोकने के लिए लीक-प्रूफ परीक्षा प्रणाली विकसित की जा सकती है। परीक्षा की सुरक्षा बढ़ाने के लिए निगरानी और तकनीकी व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
- माना जा रहा है कि विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है। परीक्षा केंद्रों के चयन और उनकी निगरानी के नियमों में बदलाव हो सकता है। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और वितरण प्रक्रिया को और सख्त बनाया जा सकता है। एनटीए की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नए प्रावधान किए जा सकते हैं। परीक्षा प्रक्रिया की नियमित समीक्षा और निगरानी के लिए नई व्यवस्था लागू की जा सकती है।
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NTA में सुधार की जरूरत क्यों महसूस हुई?
- राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में रही है। खासकर 2026 नीट पेपर लीक के कथित मामले के बाद एजेंसी की परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे और परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग तेज हो गई। इसी मुद्दे को लेकर छात्रों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन भी किया। परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की मांग उठाई। छात्रों के आंदोलन के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में रहा। विभिन्न स्तरों पर यह कहा गया कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए NTA की कार्यप्रणाली में बदलाव जरूरी है।
CBSE, NEET विवाद और छात्रों के आंदोलन के बीच क्या-क्या हुआ?
- पिछले दो महीनों से शिक्षा मंत्रालय लगातार विवादों के केंद्र में बना हुआ है। पहले सीबीएसई की कक्षा 12 की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठे और इसके बाद नीट प्रश्नपत्र लीक मामले ने मंत्रालय की मुश्किलें बढ़ा दीं।
- नीट-यूजी को लेकर छात्रों का विरोध अब देशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुका है। यह आंदोलन प्रश्नपत्र लीक, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर चल रहा है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और संसद में इस मामले पर चर्चा की मांग कर रहे हैं।
- इससे पहले 2024 में भी नीट पेपर लीक के आरोप और यूजीसी-नेट प्रश्नपत्र लीक की पुष्टि के बाद तत्कालीन एनटीए महानिदेशक सुबोध कुमार सिंह को पद से हटा दिया गया था। उन्हें करीब चार महीने तक 'अनिवार्य प्रतीक्षा' पर रखा गया, इसके बाद इस्पात मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया और बाद में उनके मूल कैडर छत्तीसगढ़ वापस भेज दिया गया।