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सुप्रीम कोर्ट: यूनिटेक के पूर्व प्रमोटरों चंद्रा बंधुओं को हिरासत में पूछताछ करने की ईडी की बाधा दूर, जानिए क्या है मामला

Wed, 01 Dec 2021 08:57 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 01 Dec 2021 08:57 PM IST
सार

निदेशालय ने शीर्ष अदालत के 26 अगस्त के आदेश पर स्पष्टीकरण मांगा था जिसके द्वारा चंद्रा बंधुओं को मुंबई की दो अलग-अलग जेलों में स्थानांतरित किया गया था और कहा था कि वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायिक कार्यवाही में भाग लेंगे। निदेशालय का कहना था कि चंद्रा बंधुओं के खिलाफ मिले नए सबूतों को देखते हुए उसे पूर्व प्रमोटरों को हिरासत में पूछताछ की जरूरत है।

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EDs custodial interrogation of former Unitech promoters Chandra brothers removed Latest News Update
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यूनिटेक के पूर्व प्रमोटरों संजय चंद्रा और अजय चंद्रा से नए सिरे से हिरासत में पूछताछ करने में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को आ रही बाधा को दूर कर दिया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा के माध्यम से आरोपियों को पेश करने का उसका पूर्व का आदेश आड़े नहीं आएगा।

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निदेशालय ने शीर्ष अदालत के 26 अगस्त के आदेश पर स्पष्टीकरण मांगा था जिसके द्वारा चंद्रा बंधुओं को मुंबई की दो अलग-अलग जेलों में स्थानांतरित किया गया था और कहा था कि वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायिक कार्यवाही में भाग लेंगे। निदेशालय का कहना था कि चंद्रा बंधुओं के खिलाफ मिले नए सबूतों को देखते हुए उसे पूर्व प्रमोटरों को हिरासत में पूछताछ की जरूरत है।
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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा, हम स्पष्ट करते हैं कि 26 अगस्त, 2021 का आदेश, अभियुक्त को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के उद्देश्य से मजिस्ट्रेट के समक्ष निदेशालय के आवेदन के आड़े नहीं आएगा। मजिस्ट्रेट द्वारा मेरिट के आधार पर आवेदन पर निर्णय किया जाएगा। 
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साथ ही शीर्ष अदालत ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल माधवी दीवान से तिहा? जेल में सीसीटीवी कैमरे, मोबाइल जैमर, बॉडी स्कैनर आदि लगाने की दिल्ली पुलिस आयुक्त राजेश अस्थाना की सिफारिशों पर गृह मंत्रालय द्वारा अनुपालन के बारे में सवाल किया। दीवान ने जवाब दिया कि उन्होंने गृह मंत्रालय की रिपोर्ट का मसौदा देखा है, वह सटीक नहीं है। उन्होंने कहा कि उसमें और कुछ करने जी जरूरत है, इसलिए उन्हें और दो हफ्ते का समय दिया जाए। पीठ ने माधवी के इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया।

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