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111 विमानों की खरीद मामले में उड्डयन मंत्रालय व एयर इंडिया के अफसरों से ईडी करेगी पूछताछ

Thu, 06 Dec 2018 08:02 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Updated Thu, 06 Dec 2018 08:02 PM IST
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ED will interrogate officers of Air India and aviation ministry in case of 111 airplane deal
ED - फोटो : ANI

यूपीए सरकार के कार्यकाल में 111 विमानों की खरीद मामले में हुई कथित अनियमित्तताओं की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जल्द ही उड्डयन मंत्रालय और एयर इंडिया के अफसरों से पूछताछ शुरू करेगा। ये विमान एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस के लिए खरीदे जाने थे। जांच एजेंसी ने संबंधित लोगों को समन भेजने की तैयारी कर ली है।

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सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष एक जनहित याचिका की सुनवाई के बाद इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयर इंडिया के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी। बाद में ईडी ने पीएमएलए के तहत मामला दर्ज कर केस की जांच शुरू की है।
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ईडी द्वारा एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस के विलय, विमानों की खरीद व लाभ के रास्ते को छोड़कर दूसरा मार्ग अपनाना, आदि मामलों की जांच की जा रही है। जब इन विमानों की खरीद का फैसला लिया गया तब यूपीए सरकार में प्रफुल्ल पटेल नागरिक उड्डयन मंत्री थे। करीब 70,000 करोड़ रुपये की राशि से विमान खरीद के इस फैसले ने सबको चौंका दिया था। उस वक्त इंडियन कॉमर्शियल पायलट एसोसिएशन (आईसीपीए) ने भी सरकार के इस फैसले का विरोध जताया था।

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आईसीपीए के पदाधिकारियों का कहना था कि जिस कंपनी को पिछले साल सात हजार करोड़ रुपये का लाभ हुआ हो और जिस पर पहले से ही 50 हजार करोड़ रुपये का कर्ज हो, ऐसे में सत्तर हजार करोड़ रुपए का सौदा कंपनी को बर्बाद कर देगा। बाद में सीएजी ने भी सरकार के इस फैसले पर यह कहते हुए सवाल उठाया था कि 111 विमानों की जरुरत नहीं थी तो फिर इनकी खरीद प्रक्रिया क्यों शुरू की गई।

आरोप था कि तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने विमानों की संख्या को अनावश्यक तौर पर बढ़वा दिया था। उस वक्त एयर इंडिया के सीएमडी वी तुलसीदास और मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी केके पदमनाभन की बैठक में भी ये फैसला लिया गया कि विमान खरीद प्रपोजल पर दोबारा से विचार किया जाए। बाकायदा कहा गया कि इसके लिए नए सिरे से रिपोर्ट तैयार हो। 

तुलसीदास तो इसके लिए तैयार हो गए, मगर उस वक्त मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव वी सुब्रमण्यम, जिनके पास फाइनेंस एडवायजर का चार्ज भी था, वे अड़ गए। उन्होंने सौदे के प्रपोजल में बदलाव का विरोध किया। हालांकि बाद में प्रफुल्ल पटेल ने कहा, इस बाबत दोनों एयरलाइंस कंपनियों को कहा गया था कि वे अपने-अपने ट्रैफिक के हिसाब से विमानों की संख्या तय कर लें। 

एयर इंडिया ने कहा था कि वे इस प्रपोपल में बदलाव चाहते हैं तो दूसरी ओर इंडियन एयरलाइंस ने इसमें किसी भी तरह के संशोधन से मना कर दिया था। इसके बाद यह मामला एम्पावर्ड ग्रुप ऑफ मिनिस्टर ई-जीओएम के पास गया। बैठक के कई माह बाद सुनने को मिला कि मंत्रालय ने कई बातों में ई-जीओएम को अंधेरे में रखा था। उसके समक्ष सभी तत्थ पेश नहीं किए गए थे। 

एयर इंडिया के सीएमडी रहे अश्विनी लोहानी भी तत्कालीन सरकार की विमान खरीद प्रक्रिया एवं दोनों कम्पनियों के विलय पर सवाल उठा चुके हैं। ईडी के एक अधिकारी का कहना है कि इस मामले में समन भेजने की सभी औपचारिकता पूरी कर ली गई हैं। तत्कालीन अफसरों को ईडी मुख्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। इस मामले में तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री से भी पूछताछ होगी। फिलहाल इस केस में पूछताछ के लिए डेढ़ दर्जन लोगों को समन भेजा जाएगा।

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