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ED Raid on Uddhav Ministries: ED के शिकंजे में फंसे उद्धव के मंत्रियों पर क्या है आरोप, जानें कितने पुराने हैं
Sun, 31 Jul 2022 11:41 AM IST
जयदेव सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जयदेव सिंह
Updated Sun, 31 Jul 2022 11:41 AM IST
सार
अनिल परब ED के निशाने पर आने वाले महाराष्ट्र सरकार के तीसरे मंत्री हैं। इससे पहले अनिल देशमुख और नवाब मलिक पर भी ED कार्रवाई कर चुकी है। आइये जानते हैं कि इन तीनों पर क्या आरोप लगे हैं?
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शिकंजे में उद्धव सरकार के मंत्री
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार के एक मंत्री से जुड़े ठिकानों पर छापा मारा। उद्धव सरकार में परिवहन मंत्री अनिल परब के सात ठिकानों पर छापेमारी की गई। बताया जा रहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में ये कार्रवाई हुई है। परब ED के निशाने पर आने वाले महाराष्ट्र सरकार के तीसरे मंत्री हैं। इससे पहले अनिल देशमुख और नवाब मलिक पर भी ED कार्रवाई कर चुकी है। आइये जानते हैं कि इन तीनों पर क्या आरोप लगे हैं?
अनिल परब पर क्या हैं आरोप?
ED ने गुरुवार को महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और शिव सेना नेता अनिल परब से जुड़े ठिकनों पर छापेमारी शुरू की। परब पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। इस दौरान परब से मुंबई, पुणे और रत्नागिरी जिलों के सात ठिकानों पर छापा मारा। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा कि परब को सलाखों के पीछे जाने के लिए तैयार रहना चाहिए। परब, अनिल देशमुख और नवाब मलिक के बाद उद्धव ठाकरे सरकार के तीसरे मंत्री हैं, जिन पर जेल जाने का खतरा मंडरा रहा है। अनिल देशमुख और नवाब मलिक भी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों के चलते जेल जा चुके हैं।
सितंबर 2021 में उद्धव सरकार के पूर्व मंत्री अनिल देशमुख घूस लेने और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ED के शिकंजे में आए थे। उस वक्त भी अनिल परब का नाम चर्चा में आया था। परब को ईडी ने पूछताछ के लिए भी बुलाया था। परब पर 10 पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर में करोड़ों रुपये घूस लेने का आरोप है। मुंबई पुलिस के सब इंस्पेक्टर सचिन वझे की बर्खास्तगी के बाद से सवालों में थे। कहा जाता है कि एक पत्र में वझे ने दावा किया गया था कि परब ने उन्हें एक निजी ट्रस्ट से 50 करोड़ रुपये की जबरन वसूली करने के लिए कहा था। वझे ने आरोप लगाया था कि परब ने बीएमसी के लिस्टेड कॉन्ट्रैक्टरों से कम से कम दो करोड़ की वसूली करने को कहा था। हालांकि, परब ने सभी आरोपों से इनकार किया था। नासिक आरटीओ के एक निलंबित यातायात इंस्पेक्टर ने भी परब पर इसी तरह के आरोप लगाए थे।
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कौन हैं अनिल परब?
57 साल के अनिल परब महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य हैं। शिवसेना के बड़े नेताओं में शामिल परब को दिसंबर 2019 में उद्धव सरकार में मंत्री बनाया गया था।
अनिल देशमुख पर क्या मामला है?
ED अनिल देशमुख के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की जांच कर रही है। देशमुख के खिलाफ अप्रैल 2021 में CBI ने FIR दर्ज की थी। उस वक्त अनिल देखमुख उद्धव ठाकरे सरकार में गृह मंत्री थे। जांच के दौरान ED ने खुलासा किया कि मंत्री रहते हुए देशमुख ने ऑर्केस्ट्रा बार मालिकों से 4.7 करोड़ रुपये की घूस ली। इस काम में मुंबई पुलिस के सब इंस्पेक्टर रहे सचिन वझे की मदद ली गई। ये वसूली दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के बीच की गई थी। मामले के खुलासे के बाद वझे के बर्खास्त कर दिया गया।
ED के मुताबिक 4.18 करोड़ रुपये की ये घूस दिल्ली स्थित चार अलग-अलग शेल कंपनियों में जमा की गई थी। इन कंपनियों ने ये पूरी रकम बाद में श्री साईं शिक्षण संस्थान ट्रस्ट को दान दे दी। ये चैरिटेबल ट्रस्ट अनिल देशमुख और उनके परिवार द्वारा चलाया जाता है।
इसके साथ ही ED ने देशमुख के वर्ली स्थित फ्लैट को लेकर भी आरोप तय किए हैं। इसमें कहा गया है कि उनकी पत्नी के नाम पर ये फ्लैट 2004 में कैश देकर खरीदा गया। हालांकि, इसकी सेल डीड फरवरी 2020 में बनी, जब देशमुख गृह मंत्री थे।
ED के मुताबिक देशमुख परिवार ने प्रिमियर पोर्ट लिंक्स प्राइवेट लिमिटेड में 50 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की। जिसका बाजार मूल्य करीब 5.34 करोड़ रुपये है। इसके लिए देशमुख परिवार ने महज 17.95 लाख रुपये चुकाए।
नवाब मलिक पर क्या आरोप हैं?
ED मलिक की एक जमीन डील मामले में जांच कर रहा है। मलिक ने यह डील भगोड़े अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर से की थी। कहा जाता है कि कुर्ला के एलबीएस रोड पर स्थित ये तीन एकड़ जमीन 85 लाख में खरीद गई। इसके लिए 30 लाख में सेल एग्रीमेंट किया गया। बाकी पैसा कैश में दिया गया। ED के मुताबिक ये डील मार्केट रेट से बहुत कम में हुई। ED का दावा है कि 2005 में हुई इस डील में अंडरवर्ल्ड से जुड़े सरदार शाहवली खान ने अहम भूमिका निभाई।
ED के मुताबिक ये जमीन मूल रूप से मुनीरा प्लम्बर थी, जिसे हसीना पारकर और उसके करीबी सलीम पटेल ने हथिया लिया था। इसके लिए पटेल के नाम की फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी बनाई गई। इसे के जरिए अंडरवर्ल्ड से संबंध रखने वाले पटेल ने जमीन नवाब मलिक को बेची। इस बात की जानकारी जमीन की मालिक मुनीरा को भी नहीं थी। मुनीरा ने ED को बताया कि उसने कभी भी मलिक से जमीन बेचने के संबंध में संपर्क नहीं किया। यहां तक की उसे अपनी जमीन बिकने की जानकारी भी पिछले साल मीडिया रिपोर्ट के जरिए हुई।
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अनिल परब पर क्या हैं आरोप?
ED ने गुरुवार को महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और शिव सेना नेता अनिल परब से जुड़े ठिकनों पर छापेमारी शुरू की। परब पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। इस दौरान परब से मुंबई, पुणे और रत्नागिरी जिलों के सात ठिकानों पर छापा मारा। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा कि परब को सलाखों के पीछे जाने के लिए तैयार रहना चाहिए। परब, अनिल देशमुख और नवाब मलिक के बाद उद्धव ठाकरे सरकार के तीसरे मंत्री हैं, जिन पर जेल जाने का खतरा मंडरा रहा है। अनिल देशमुख और नवाब मलिक भी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों के चलते जेल जा चुके हैं।
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सितंबर 2021 में उद्धव सरकार के पूर्व मंत्री अनिल देशमुख घूस लेने और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ED के शिकंजे में आए थे। उस वक्त भी अनिल परब का नाम चर्चा में आया था। परब को ईडी ने पूछताछ के लिए भी बुलाया था। परब पर 10 पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर में करोड़ों रुपये घूस लेने का आरोप है। मुंबई पुलिस के सब इंस्पेक्टर सचिन वझे की बर्खास्तगी के बाद से सवालों में थे। कहा जाता है कि एक पत्र में वझे ने दावा किया गया था कि परब ने उन्हें एक निजी ट्रस्ट से 50 करोड़ रुपये की जबरन वसूली करने के लिए कहा था। वझे ने आरोप लगाया था कि परब ने बीएमसी के लिस्टेड कॉन्ट्रैक्टरों से कम से कम दो करोड़ की वसूली करने को कहा था। हालांकि, परब ने सभी आरोपों से इनकार किया था। नासिक आरटीओ के एक निलंबित यातायात इंस्पेक्टर ने भी परब पर इसी तरह के आरोप लगाए थे।
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कौन हैं अनिल परब?
57 साल के अनिल परब महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य हैं। शिवसेना के बड़े नेताओं में शामिल परब को दिसंबर 2019 में उद्धव सरकार में मंत्री बनाया गया था।
अनिल देशमुख पर क्या मामला है?
ED अनिल देशमुख के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की जांच कर रही है। देशमुख के खिलाफ अप्रैल 2021 में CBI ने FIR दर्ज की थी। उस वक्त अनिल देखमुख उद्धव ठाकरे सरकार में गृह मंत्री थे। जांच के दौरान ED ने खुलासा किया कि मंत्री रहते हुए देशमुख ने ऑर्केस्ट्रा बार मालिकों से 4.7 करोड़ रुपये की घूस ली। इस काम में मुंबई पुलिस के सब इंस्पेक्टर रहे सचिन वझे की मदद ली गई। ये वसूली दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के बीच की गई थी। मामले के खुलासे के बाद वझे के बर्खास्त कर दिया गया।
ED के मुताबिक 4.18 करोड़ रुपये की ये घूस दिल्ली स्थित चार अलग-अलग शेल कंपनियों में जमा की गई थी। इन कंपनियों ने ये पूरी रकम बाद में श्री साईं शिक्षण संस्थान ट्रस्ट को दान दे दी। ये चैरिटेबल ट्रस्ट अनिल देशमुख और उनके परिवार द्वारा चलाया जाता है।
इसके साथ ही ED ने देशमुख के वर्ली स्थित फ्लैट को लेकर भी आरोप तय किए हैं। इसमें कहा गया है कि उनकी पत्नी के नाम पर ये फ्लैट 2004 में कैश देकर खरीदा गया। हालांकि, इसकी सेल डीड फरवरी 2020 में बनी, जब देशमुख गृह मंत्री थे।
ED के मुताबिक देशमुख परिवार ने प्रिमियर पोर्ट लिंक्स प्राइवेट लिमिटेड में 50 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की। जिसका बाजार मूल्य करीब 5.34 करोड़ रुपये है। इसके लिए देशमुख परिवार ने महज 17.95 लाख रुपये चुकाए।
नवाब मलिक पर क्या आरोप हैं?
ED मलिक की एक जमीन डील मामले में जांच कर रहा है। मलिक ने यह डील भगोड़े अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर से की थी। कहा जाता है कि कुर्ला के एलबीएस रोड पर स्थित ये तीन एकड़ जमीन 85 लाख में खरीद गई। इसके लिए 30 लाख में सेल एग्रीमेंट किया गया। बाकी पैसा कैश में दिया गया। ED के मुताबिक ये डील मार्केट रेट से बहुत कम में हुई। ED का दावा है कि 2005 में हुई इस डील में अंडरवर्ल्ड से जुड़े सरदार शाहवली खान ने अहम भूमिका निभाई।
ED के मुताबिक ये जमीन मूल रूप से मुनीरा प्लम्बर थी, जिसे हसीना पारकर और उसके करीबी सलीम पटेल ने हथिया लिया था। इसके लिए पटेल के नाम की फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी बनाई गई। इसे के जरिए अंडरवर्ल्ड से संबंध रखने वाले पटेल ने जमीन नवाब मलिक को बेची। इस बात की जानकारी जमीन की मालिक मुनीरा को भी नहीं थी। मुनीरा ने ED को बताया कि उसने कभी भी मलिक से जमीन बेचने के संबंध में संपर्क नहीं किया। यहां तक की उसे अपनी जमीन बिकने की जानकारी भी पिछले साल मीडिया रिपोर्ट के जरिए हुई।