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ED: भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट अवैध खनन, ड्रग तस्करों और आतंकियों को कौन पहुंचा रहा फायदा?

Mon, 20 Jul 2026 08:37 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Mon, 20 Jul 2026 08:37 PM IST
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ED Probes Illegal Mining Near India-Pakistan Border, Questions Links to Drug Smugglers and Terrorists
प्रवर्तन निदेशालय - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर जोनल ऑफिस ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत 16 जगहों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई पठानकोट जिले के भटियन गांव (गोल पंचायत) में शामलात जमीन पर रेत की अवैध माइनिंग के मामले में की गई है। आरोप है कि तत्कालीन एडिशनल डिप्टी कमिश्नर कुलदीप सिंह के एक विवादित आदेश के ज़रिए इस ज़मीन को अवैध रूप से ट्रांसफर किया गया था। भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट अवैध माइनिंग के जरिए ड्रग तस्करों और आतंकियों को फायदा पहुंचाने के इस केस में कई लोग शामिल हैं। छापेमारी के दौरान, रेत और नदी के तल की सामग्री की अवैध माइनिंग से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए हैं। 1.75 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी जब्त की गई। साथ ही, 91,34,322 रुपये बैलेंस वाले बैंक खातों को फ़्रीज करने का आदेश जारी किया गया।

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ईडी ने यह जांच अमृतसर के विजिलेंस ब्यूरो पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर कुलदीप सिंह और आठ अन्य आरोपियों के खिलाफ पठानकोट जिले की गोल पंचायत के भटियान गांव में मौजूद गांव की साझा जमीन (शामलात) को निजी व्यक्तियों को गैर-कानूनी तरीके से ट्रांसफर करने के मामले में दर्ज की गई थी। रावी नदी के किनारे स्थित यह जमीन अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास है। कुलदीप सिंह को पठानकोट में एडीसी (ग्रामीण विकास) के पद पर राज्य सरकार के एक मंत्री की सिफारिश पर उनके रिटायरमेंट से चार दिन पहले नियुक्त किया गया था। उन्होंने सरकारी सेवा से रिटायर होने से एक दिन पहले ही यह आदेश जारी किया था। 
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तलाशी अभियान के दौरान साई स्टोन क्रशर एंड स्क्रीनर, शिव शंकर स्टोन क्रशर और उनसे जुड़ी कंपनियों के साथ-साथ उनके मुख्य मैनेजमेंट अधिकारियों की भी जांच की गई, जो उस ज़मीन से गैर-कानूनी तरीके से रेत निकालने में शामिल थे। केस से जुड़े लोगों और कंपनियों के खिलाफ मुख्य बात यह सामने आई है कि उन्होंने बिना सही मंजूरी और जरूरी टैक्स व रॉयल्टी चुकाए, गैर-कानूनी तरीके से रेत/नदी के तल की सामग्री निकाली। उसे बेचकर उसका ट्रांसपोर्ट किया गया। राज्य सरकार के कुछ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिन पर ऐसी गैर-कानूनी माइनिंग गतिविधि में मदद करने और कोई रोकथाम या सुधारात्मक कदम न उठाने का शक है। वजह, इससे राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ है। 
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जांच में यह भी पता चला है कि इलाके में रात के समय धड़ल्ले से ट्रक/टिपर/एक्सकेवेटर चल रहे थे, जिनमें से कुछ पर नंबर प्लेट भी नहीं थी, जो एक संगठित गैर-कानूनी माइनिंग ऑपरेशन की ओर इशारा करता है। पठानकोट और गुरदासपुर के सीमावर्ती इलाकों में माइनिंग (खनन) के मुद्दे से जुड़ी एक जनहित याचिका (CWP-22567-2012) भी पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था, यह स्पष्ट है कि पठानकोट और गुरदासपुर जिलों के सीमावर्ती इलाकों में, खासकर रावी नदी के पार माइनिंग करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक है। 


ऐसी किसी भी गतिविधि से ड्रग तस्करों, आतंकवादियों और देश-विरोधी तत्वों को मदद मिलती है जो आईएसआई द्वारा पाले-पोसे और नियंत्रित किए जाते हैं। वे देश के अंदरूनी इलाकों में सक्रिय हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को इसे नियंत्रित करने के लिए ज़रूरी कदम उठाने का निर्देश भी दिया था, लेकिन ऐसा लगता है कि यह गतिविधि बिना रुके जारी है। इ्रडी ने उस ज़मीन पर हो रही कथित अवैध माइनिंग गतिविधियों की वैज्ञानिक जांच के लिए 'सर्वे ऑफ इंडिया' से भी मदद मांगी है।

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