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ED: अफ्रीका से कच्चे काजू की आपूर्ति का झूठा वादा, व्यापारियों से ठगे 24 करोड़ रुपये
Thu, 15 Jan 2026 08:47 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 15 Jan 2026 08:47 PM IST
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ईडी
- फोटो : ANI
केरल के व्यापारियों को यह भरोसा दिया गया कि उन्हें अफ्रीका से लाए गए कच्चे काजू की आपूर्ति की जाएगी। मुनाफा कमाने के चक्कर में व्यापारियों ने ज्यादा कुछ सोचे समझे बिना ही ठगों के हाथ में पैसा दे दिया। ठगों ने व्यापारियों से 24.76 करोड़ रुपये एकत्रित कर लिए। जब तय समय पर कच्चे काजू नहीं मिले तो व्यापारियों ने हंगामा करना चालू कर दिया। व्यापारियों को संतुष्ट करने के लिए उन्हें 'स्विफ्ट संदेश' व 'जाली बिल' जैसे दस्तावेज दिए गए। इसका मकसद, जो पैसा लिया था, उसकी वापसी करना था। जब कोई बात नहीं बनी तो मामला पुलिस के पास पहुंच गया। वहां से ईडी ने भी इस केस की जांच प्रारंभ कर दी। अब ईडी ने जांच के दौरान आरोपी अनीश बाबू को गिरफ्तार कर लिया है।
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ईडी की जांच में पता चला है कि विभिन्न शिकायतकर्ताओं से लगभग 24.76 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि एकत्र की गई थी। हालांकि, न तो काजू की आपूर्ति की गई और न ही अग्रिम राशि वापस की गई। इसके बजाय, पीड़ितों को गुमराह करने के लिए जाली और मनगढ़ंत दस्तावेज जैसे बिल ऑफ लैडिंग, स्विफ्ट संदेश और चेक उपलब्ध कराए गए। इस प्रकार एकत्र की गई धनराशि को डायवर्ट किया गया। उसे कई स्तरों पर छिपाया गया। आंशिक रूप से विदेश में रखा गया। इससे अपराध की आय (पीओसी) उत्पन्न हुई। आरोपियों ने उसे अपने कब्जे में लेकर उसका उपयोग किया। यह पीएमएलए 2002 की धारा 3 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध बनता है।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), कोच्चि क्षेत्रीय कार्यालय ने 14.01.2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19(1) के तहत कोल्लम निवासी 35 वर्षीय अनीश बाबू (श्री बाबू जॉर्ज के पुत्र) को गिरफ्तार किया है। ईडी ने केरल पुलिस द्वारा दर्ज और कोल्लम अपराध शाखा द्वारा पुनः दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर इस केस की जांच शुरू की थी। शिकायत में काजू व्यापारियों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था। यह पता चला कि अनीश बाबू ने अपनी कंपनियों, मेसर्स बी सदर्न ट्रेड लिमिटेड (तंजानिया), मेसर्स प्रेज एक्सपोर्ट्स एफजेडई (शारजाह) और मेसर्स वझाविला काजू (कोल्लम) के माध्यम से, तंजानिया/अफ्रीका से कच्चे काजू के आयात और आपूर्ति के झूठे वादे पर कई व्यापारियों से बड़ी रकम हड़प ली।
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जांच के दौरान, अनीश बाबू को 2021 से ही पीएमएलए की धारा 50 के तहत बार-बार समन जारी किए गए थे। 3 जनवरी 2025 को एक बार पेशी को छोड़कर, उनका व्यवहार असहयोगी और टालमटोल वाला रहा। उन्होंने लगातार दस्तावेज पेश करने से इनकार किया। वह जांच में सहयोग करने से भी बचता रहा। उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं एर्नाकुलम सत्र न्यायालय के बाद केरल उच्च न्यायालय के समक्ष पहुंचा। यहां पर जमानत याचिका खारिज हो गई। इसके बाद भारत के सर्वोच्च न्यायालय में यह मामला पहुंचा, लेकिन वहां भी जमानत याचिका खारिज कर दी गईं।
14.01.2026 को, ईडी कार्यालय में अनीश बाबू का बयान दर्ज किया गया, जिसमें उन्होंने टालमटोल भरे जवाब दिए। वह पीओसी के उपयोग और विदेशों में जमा किए गए दस्तावेजों से संबंधित महत्वपूर्ण विवरणों का खुलासा करने में विफल रहा। साक्ष्यों से छेड़छाड़, गवाहों पर प्रभाव और कानूनी प्रक्रिया से बचने की संभावना को देखते हुए, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
इसके बाद, उन्हें 15.01.2026 को एर्नाकुलम स्थित विशेष न्यायालय (पीएमएलए) के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय ने उन्हें 19.01.2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इससे पहले, उच्च न्यायालय ने अनीश बाबू की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह राय व्यक्त की थी कि धन के लेन-देन का पता लगाने के लिए उनकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। ईडी, पीओसी और विशेष रूप से विदेशों में जमा किए गए पीओसी का पता लगाएगी। धन शोधन अपराध में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान करेगी।