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MSCB Case: ED ने राकांपा नेता प्राजक्त और उनके पिता को बनाया आरोपी; चीनी मिल बिक्री में अनियमितताओं का है आरोप
Thu, 31 Aug 2023 11:07 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 31 Aug 2023 11:07 PM IST
सार
ईडी ने इस साल मार्च में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और उनकी पत्नी सुनेत्रा से जुड़ी एक फर्म सहित तीन आरोपियों के खिलाफ मामले में अपना पहला आरोपपत्र दायर किया था। हालांकि, आरोपपत्र में पवार दंपति को आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया था।
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प्रवर्तन निदेशालय।
- फोटो : ANI
विस्तार
महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (MSCB) मामले में दाखिल की गई दो पूरक चार्जशीट में प्रवर्तन निदेशालय ने महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और राकांपा नेता प्राजक्त तनपुरे और अन्य को नामित किया है। इस मामले में उनके पिता और पूर्व सांसद प्रसाद तनपुरे को भी आरोपी बनाया गया है।
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पिता-पुत्र की इस जोड़ी के अलावा प्रवर्तन निदेशालय ने जिन लोगों को आरोपी बनाया है उनमें राज्य के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता रणजीत देशमुख, शिवसेना नेता अर्जुनराव पंडितराव खोतकर, बिल्डर जुगल किशोर तापड़िया और उद्योगपति पद्माकर मुले शामिल हैं। बता दें कि ईडी ने विशेष अदालत के सामने दो पूरक आरोपपत्र 24 अगस्त और 25 अगस्त को दायर किए गए थे।
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ईडी ने इस साल मार्च में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और उनकी पत्नी सुनेत्रा से जुड़ी एक फर्म सहित तीन आरोपियों के खिलाफ मामले में अपना पहला आरोपपत्र दायर किया था। हालांकि, आरोपपत्र में पवार दंपति को आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया था। अब नई चार्जशीट में ईडी ने बिजनेसमैन और चार कंपनियों समेत 11 आरोपियों के नाम जोड़े हैं।
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एफआईआर 22 अगस्त, 2019 के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में दर्ज की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि सहकारी सखार कारखाना (एसएसके) महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससीबी) के तत्कालीन अधिकारियों और निदेशकों द्वारा धोखाधड़ी से बेचा गया था। इसकी बिक्री के लिए बिना उचित प्रक्रिया का पालन बिना किए संबंधित संस्थाओं को औने-पौने दाम में दे दिया गया था।
आरोपपत्र के अनुसार, सहकारी सखार कारखाना को प्राजक्त तानपुरे की कंपनी प्रसाद शुगर एंड एलाइड एग्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड को 26.32 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य के मुकाबले महज 12.95 करोड़ रुपये में बेच दिया गया था। जांच एजेंसी ने कहा है कि उस समय प्राजक्त तनपुरे प्रसाद शुगर एंड एलाइड एग्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड के तत्कालीन निदेशक थे। ऐसे में वे कंपनी के सभी मामलों के प्रभारी थे। आरोपपत्र में कहा गया है कि एसएसके को हासिल करने और बाद में इसे बेचने से संबंधित सभी अवैधताएं उनकी सक्रिय भागीदारी के साथ की गई थीं।
आरोपपत्र में आगे कहा गया है कि प्राजक्त तनपुरे के पिता, प्रसाद तनपुरे, एसएसके की नीलामी के समय एमएससीबी के निदेशक मंडल में थे। जांच एजेंसी ने आगे दावा किया कि यह प्रसाद तनपुरे के प्रभाव के कारण था कि अन्य बैंक निदेशकों और तत्कालीन अध्यक्ष माणिकराव पाटिल ने नीलामी के दौरान नियमों और विनियमों को लागू करने में हस्तक्षेप नहीं किया। इस प्रकार, प्रसाद तनपुरे ने अपने बेटे और एमएससीबी अधिकारियों के बीच एक कड़ी के रूप में काम किया। जिसके परिणामस्वरूप SARFEASI, 2002 के विभिन्न नियमों का उल्लंघन करते हुए एसएसके की बिक्री हुई। साथ ही उन्होंने एसएसके खरीदने के लिए अपने व्यक्तिगत खाते से 25 लाख रुपये की धनराशि भी प्रदान की।
यह मामला सहकारी साखर कारखाना (एसएसके) और सहकारी सूत गिरनिस में कथित घोटाले से संबंधित है। आरोप यह है कि आरोपी व्यक्तियों ने एमएससीबी और जिला केंद्रीय सहकारी बैंक को सौंपी गई संपत्तियों की अवैध मंजूरी और वितरण, अवैध बिक्री के लिए आपराधिक साजिश रची। उस समय अजित पवार महाराष्ट्र के वित्त मंत्री थे।
बैंक में कथित अनियमितताओं को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर होने के बाद मामले की जांच शुरू की गई थी। मामला आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज किया गया था जिसके बाद ईडी ने भी 2019 में कथित मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।