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ED: 400 लोगों को प्लॉट बुक करने का लालच देकर 500 करोड़ जुटाए, घर दिया नहीं और श्रीलंका में होटल बना लिया

Thu, 21 Aug 2025 08:04 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 21 Aug 2025 08:04 PM IST
सार

ईडी ने दिल्ली ईओडब्ल्यू और गुरुग्राम ईओडब्ल्यू की पुलिस शाखाओं द्वारा आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत अमित कत्याल, राजेश कत्याल, क्रिश रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर और आरोपपत्र के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी।

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ED: 500 crores raised by luring 400 people to book plots
ईडी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गुरुग्राम जोनल कार्यालय ने मेसर्स क्रिश रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड, अमित कत्याल और अन्य से जुड़े रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामले के संबंध में विशेष न्यायालय, गुरुग्राम के समक्ष 28.07.2025 को एक अभियोजन शिकायत दर्ज की है। इसमें सैकड़ों निर्दोष प्लॉट खरीदारों से उनकी मेहनत की कमाई को ठगने और अमित कत्याल व उनके परिवार के सदस्यों के व्यक्तिगत लाभ के लिए उसका दुरुपयोग करने का आरोप है। ईडी के अनुसार, आरोपियों ने 400 से अधिक भोले भाले लोगों को प्लॉट बुक करने का लालच देकर 500 करोड़ रुपये जुटा लिए। उन लोगों को घर दिया नहीं, मगर आरोपियों ने श्रीलंका में एक होटल प्रोजेक्ट में पैसा लगा दिया। न्यायालय ने शिकायत में सभी आरोपियों को 19.08.2025 को नोटिस जारी करने में अपनी सहमति दी है। 

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ईडी ने दिल्ली ईओडब्ल्यू और गुरुग्राम ईओडब्ल्यू की पुलिस शाखाओं द्वारा आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत अमित कत्याल, राजेश कत्याल, क्रिश रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर और आरोपपत्र के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी। ईडी की जांच में आरोपी अमित कत्याल की धोखाधड़ी और फर्जी गतिविधियों का खुलासा हुआ है, जिसमें उसने भोले-भाले प्लॉट खरीदारों को अपने प्रोजेक्ट के बदले प्लॉट बुक करने का लालच दिया। समूह की कंपनी ने कानून के तहत आवश्यक वैध लाइसेंस के बिना ही 400 से अधिक ग्राहकों से 500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्र की है। अपराध की आय (पीओसी) को तुरंत उसके निजी खातों और उसके व उसके परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाली अन्य फर्जी कंपनियों में भेज दिया गया। आरोपी ने ऐसी फर्जी कंपनियों में फर्जी निदेशक भी नियुक्त किए, जिनके पास विभिन्न अचल संपत्तियां थीं। जांच के दौरान, यह भी पता चला कि घर खरीदारों से एकत्र की गई 205 करोड़ रुपये की राशि को एक फर्जी कंपनी मेसर्स महादेव इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से श्रीलंका के कोलंबो में एक रियल एस्टेट सह होटल परियोजना में लगा दिया गया।
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कुर्की में गुरुग्राम के सेक्टर 63 और 65 में जमीन, नई दिल्ली में प्रमुख संपत्ति, गुरुग्राम के सेक्टर 70 में एक व्यावसायिक जमीन और श्रीलंका के कोलंबो में लक्जरी रियल एस्टेट सह होटल परियोजना शामिल थी। इससे पहले, ईडी ने 12.03.2024 और 18.10.2024 को तलाशी ली थी, जिसके परिणामस्वरूप 18.60 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी और भारत और श्रीलंका दोनों में स्थित पीओसी से अर्जित अमित कत्याल और परिवार के सदस्यों की चल और अचल संपत्तियों को कुर्क करते हुए तीन अनंतिम कुर्की आदेश जारी किए थे। सभी कुर्की आदेशों की अब एलडी एडजुकेटिंग अथॉरिटी द्वारा पुष्टि की गई है, और एलडी स्पेशल कोर्ट, गुरुग्राम के समक्ष जब्ती के लिए प्रार्थना की गई है। 
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ईडी की जांच से पता चला है कि मुख्य आरोपी अमित कत्याल ने गुरुग्राम में प्लॉट के रूप में विकसित की जाने वाली 70 एकड़ जमीन के बदले में एकत्रित धन को धोखाधड़ी और आपराधिक रूप से गबन करने के बाद, कभी भी भोले-भाले खरीदारों को प्लॉट सौंपने का इरादा नहीं किया था। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में सामने आया है कि अविकसित भूमि को वास्तविक प्लॉट खरीदारों (जिसका मूल्य अब बाजार दरों के अनुसार 2000 करोड़ रुपये से अधिक है) से अलग करने के कई प्रयास किए गए हैं, जिसमें एक ही प्लॉट को कई निवेशकों को आवंटित करना, एनसीएलटी के समक्ष एक प्रीपैकेज्ड इन्सॉल्वेंसी याचिका दायर करने के लिए काल्पनिक लेनदारों का निर्माण करना, अन्य प्रयासों के अलावा सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त रेफरी के समक्ष प्लॉट खरीदारों की सूची को जानबूझकर गलत तरीके से प्रस्तुत करना शामिल है। 

मुख्य आरोपी कंपनी यानी मेसर्स कृष रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड ने गलत बयानी का सहारा लेकर और अपनी ही संबंधित संस्थाओं मेसर्स मैक्रोट्रेड कॉम प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स हेवन ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड से 154 करोड़ रुपये के फर्जी लेनदारों को दिखाकर आईबीसी कार्यवाही शुरू करके एनसीएलटी, चंडीगढ़ का दरवाजा खटखटाया था, जिसका एकमात्र उद्देश्य भूमि और चल रही परियोजनाओं के रूप में अपनी शेष संपत्ति पर नियंत्रण हासिल करना और निर्दोष प्लॉट खरीदारों को धोखा देना था।

ईडी की जाँच से यह भी पता चला है कि न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति (जिसे प्लॉट खरीदारों के दावों और प्रतिदावों पर विचार करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त किया गया है) के समक्ष प्रस्तुत प्लॉट खरीदारों की सूची भी प्रमोटर के लाभ के लिए गलत तरीके से प्रस्तुत की गई थी। ईडी ने कुछ ऐसे प्लॉट खरीदारों के नामों की भी पहचान की जो समिति के समक्ष प्रस्तुत सूची का हिस्सा नहीं थे। जांच के दौरान, यह भी पाया गया कि पीओसी का उपयोग मेसर्स गुड अर्थ प्राइवेट लिमिटेड, द वन ट्रांसवर्क्स स्क्वायर प्राइवेट लिमिटेड (एक श्रीलंका स्थित कंपनी), हेवन ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड जैसी संस्थाओं और प्रमोटरों के परिवार के सदस्यों और उनके कर्मचारियों के नाम पर संपत्ति/भूमि/फ्लैट खरीदने के लिए किया गया था। 


उपरोक्त संपत्तियों को ईडी द्वारा विभिन्न अनंतिम कुर्की आदेशों के माध्यम से कुर्क किया गया था, जिनमें से सभी मौजदा समय में पुष्ट हैं। जांच से यह भी पता चला है कि अमित कत्याल की पूर्व पत्नी और बेटे जैसे प्रमुख रिश्तेदारों ने सेंट किट्स और न्यूविस के पासपोर्ट के साथ विदेशी नागरिकता प्राप्त कर ली है। उनका बेटा श्रीलंका में संपत्तियों के लाभकारी स्वामित्व का दावा कर रहा है। मामले में आगे की जांच जारी है।

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