ED: 311 करोड़ का लॉक्सम एप साइबर निवेश घोटाला, नेपाल के रास्ते भारत में घुसते वक्त पकड़ा गया मास्टरमाइंड
नई दिल्ली ने 'लॉक्सम एप' के माध्यम से देश के सबसे बड़े साइबर-सक्षम निवेश धोखाधड़ी केस को अंजाम देने वाले प्रमुख आरोपी और भगोड़े आर्थिक अपराधी भूपेश अरोड़ा की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
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ईडी ने लोक्सम ऐप साइबर निवेश घोटाले के आरोपी पर शिकंजा कस दिया है। विशेष न्यायालय (पीएमएलए), नई दिल्ली ने 'लॉक्सम एप' के माध्यम से देश के सबसे बड़े साइबर-सक्षम निवेश धोखाधड़ी केस को अंजाम देने वाले प्रमुख आरोपी और भगोड़े आर्थिक अपराधी भूपेश अरोड़ा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कई वर्षों तक कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के बाद, भूपेश अरोड़ा को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 11.07.2025 को गिरफ्तार किया था। साइबर धोखाधड़ी की जांच से बचने के लिए 2022 की शुरुआत में वह अपने साथियों के साथ दुबई भाग गया था। नेपाल सीमा के रास्ते जब आरोपी भूपेश अरोड़ा ने भारत में गुप्त रूप से प्रवेश करने की कोशिश की तो प्रवर्तन एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया था।
ईडी ने मेसर्स शिनदाई टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, भूपेश अरोड़ा, रोहित विज और अन्य के खिलाफ ईसीआईआर संख्या एचवाईजेडओ/46/2022 के तहत पीएमएलए, 2002 के तहत जांच शुरू की थी। पुलिस स्टेशन, साइबर अपराध, हैदराबाद द्वारा यह मामला एफआईआर संख्या 1352/2022 दिनांक 26.07.2022 के तहत दर्ज किया गया था। ईडी ने उक्त केस के आधार पर पर ही उक्त केस की जांच पड़ताल शुरु की। इसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ चीनी नागरिकों ने भारतीय नागरिकों के साथ मिलकर एक निवेश ऐप 'लॉक्सम' के माध्यम से विभिन्न व्यक्तिगत निवेशकों को धोखा दिया है। इसे एक प्रतिष्ठित फ्रांसीसी एमएनसी के हिस्से के रूप में गलत तरीके से पेश किया गया है। निवेश पर अवास्तविक रिटर्न की पेशकश की गई। इस ऐप के माध्यम से प्राप्त/एकत्रित निवेश को विभिन्न मनी चेंजर के माध्यम से विदेशी मुद्रा में परिवर्तित करके देश के बाहर भेज दिया गया था।
ईडी ने पीएमएलए, 2002 के तहत अभियोजन शिकायत दर्ज की है, जिसमें लॉक्सम ऐप को एक धोखाधड़ी वाले निवेश मंच के रूप में उजागर किया गया है। यह एक प्रतिष्ठित फ्रांसीसी एमएनसी के साथ झूठे लिंक पेश करता है। हजारों बेखबर निवेशकों को अत्यधिक रिटर्न के वादों के साथ फुसलाया गया था। केवल शेल संस्थाओं, आभासी खातों और भुगतान गेटवे के एक जटिल जाल के माध्यम से उनके धन को छीन लिया गया था। जांच के दौरान, पांच परिसरों में तलाशी ली गई, जहां विभिन्न डिजिटल उपकरणों के साथ-साथ 2.01 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई।
ईडी के अनुसार, 500 से अधिक बैंक खातों का विश्लेषण किया गया, जिसमें पता चला कि 311 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध की आय (पीओसी) को रंजन मनीकोर्प प्राइवेट लिमिटेड और केडीएस फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड के खातों में डालने से पहले ज़िंदाई टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और संबद्ध संस्थाओं के माध्यम से प्रसारित किया गया था। जांच में लगभग 903 करोड़ रुपये के विदेशी मुद्रा लेनदेन का भी पता चला है, जो समान आईपी पते और भुगतान गेटवे से समन्वित भुगतान तंत्र के साथ काम करने वाली फर्जी संस्थाओं के माध्यम से किया गया था। ये पैटर्न साइबर-सक्षम मनी लॉन्ड्रिंग पर वित्तीय कार्रवाई टास्क फोर्स (एफएटीएफ) द्वारा चिह्नित प्रकारों के अनुरूप हैं। भूपेश अरोड़ा अवैध आय के शोधन में एक महत्वपूर्ण साजिशकर्ता के रूप में उभरा है।
पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों सहित साक्ष्य, मनी चेंजर्स और अन्य बिचौलियों के साथ मिलीभगत करके नकद निकासी, विदेशी मुद्रा रूपांतरण और धन की सीमा पार आवाजाही की व्यवस्था करने में उसकी भूमिका की पुष्टि करते हैं। लॉक्सम ऐप घोटाला दर्शाता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह अवैध धन के निवेश, स्तरीकरण और एकीकरण के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, आभासी खातों और भुगतान मध्यस्थों का शोषण करते हैं। यह मामला ऐसे अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी नेटवर्क को ध्वस्त करने और साइबर-सक्षम धन शोधन के अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने के ईडी के निरंतर संकल्प को रेखांकित करता है।