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ED: जीएसटी घोटाले के लिए बनाई 135 फर्जी कंपनियां, 5000 करोड़ के नकली चालान तो 734 करोड़ की फर्जी आईटीसी बनाई
Mon, 07 Jul 2025 05:33 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Mon, 07 Jul 2025 05:33 PM IST
सार
ईडी ने जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई), जमशेदपुर द्वारा दर्ज की गई कई शिकायतों के आधार पर केस की जांच शुरू की थी। इन शिकायतों के माध्यम से फर्जी आईटीसी बनाने और उसे आगे बढ़ाने से जुड़ी एक परिष्कृत धोखाधड़ी का पता चला था।
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- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), रांची जोनल कार्यालय ने पांच जुलाई को विशेष न्यायालय (पीएमएलए), रांची के समक्ष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत एक अभियोजन शिकायत (पीसी) दायर की है। यह मामला एक बड़े जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) धोखाधड़ी सिंडिकेट से जुड़ा है। इस सिंडिकेट के चार मास्टरमाइंड शिव कुमार देवड़ा, मोहित देवड़ा, अमित कुमार गुप्ता और अमित अग्रवाल उर्फ विक्की भालोटिया हैं। इन्हीं के खिलाफ पीसी दायर की गई है। आरोप है कि इन चारों व्यक्तियों ने जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाला करने के लिए 135 फर्जी कंपनियां बनाई थीं। लगभग 5000 करोड़ रुपये के फर्जी चालान जनरेट किए गए और 734 करोड़ रुपये की फर्जी आईटीसी तैयार की गई।
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ईडी ने जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई), जमशेदपुर द्वारा दर्ज की गई कई शिकायतों के आधार पर केस की जांच शुरू की थी। इन शिकायतों के माध्यम से फर्जी आईटीसी बनाने और उसे आगे बढ़ाने से जुड़ी एक परिष्कृत धोखाधड़ी का पता चला था। ईडी की जांच से पता चला है कि शिव कुमार देवड़ा और उनके सहयोगियों की अगुवाई में सिंडिकेट ने 135 फर्जी कंपनियों का जाल बनाया था। ये कंपनियां, केवल कागजों पर मौजूद थीं। इनका इस्तेमाल, माल या सेवाओं की वास्तविक आपूर्ति के बिना 5000 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी चालान जारी करने के लिए किया गया था। इस कार्यप्रणाली के जरिए सिंडिकेट ने धोखाधड़ी से 734 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी आईटीसी तैयार की। इतना ही नहीं, इन आईटीसी को आगे भी बढ़ा दिया गया।
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इस अवैध रूप से तैयार किए गए क्रेडिट को फिर कमीशन पर विभिन्न लाभार्थी फर्मों को बेच दिया गया। उन फर्मों ने इसका इस्तेमाल अपनी जीएसटी देनदारियों से बचने के लिए किया। जांच के परिणामस्वरूप अब तक 5.29 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों की पहचान कर उन्हें कुर्क किया गया है। 8.98 लाख रुपये की नकदी जब्त की गई है, जबकि 62.90 लाख रुपये के बैंक बैलेंस को फ्रीज करने में सफलता मिली है। इस मामले में पहले ईडी ने झारखंड और पश्चिम बंगाल में कई परिसरों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया था। इसके अलावा, उक्त चारों आरोपियों को भी 8 जुलाई को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया गया। फिलहाल वे सभी न्यायिक हिरासत में हैं।
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