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नवरात्रों में एक माह तक गुलजार रहेगी अर्थव्यवस्था, होगा सात लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त कारोबार!

Sat, 05 Oct 2019 02:30 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 05 Oct 2019 02:30 PM IST
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Economy will stable till Deepawali, additional rs 7 lakh crore business give extra boost to market
नवरात्र - फोटो : अमर उजाला
नवरात्रों में हर किसी का यह प्रयास रहता है कि उस पर देवी की कृपा हो जाए। सबकी अपनी-अपनी मनोकामना होती है। कृपा पाने के लिए लोग व्रत रखते हैं, पूजा करते हैं। हालांकि इस बार अर्थव्यवस्था में मंदी की बात हो रही है। खैर जो भी हो, यह तय है कि नवरात्रों से लेकर दीपावली तक बाजारी अर्थव्यवस्था गुलजार रहेगी।
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कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल कहते हैं कि इस माह के दौरान करीब सात लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त कारोबार होता है। केवल नवरात्रों की बात करें तो दस दिन में अर्थव्यवस्था को 2.15 लाख करोड़ रुपये का बैकअप मिल जाता है, वहीं  इस त्योहारी सीजन में कुल मिलाकर व्यापार में 30 फीसदी की बढ़ोतरी होती है।

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नवरात्र थाली की डिमांड

कैट के पदाधिकारी बताते हैं कि नवरात्र पर बाजारों में रौनक आने लगती है। दो दिन पहले पूजा पाठ, व्रत और खाने पीने का सामान खरीदने के लिए लोग बाजार में निकलते हैं। नारियल, फूल और फलों की बिक्री बीस फीसदी तक बढ़ जाती है। परचून का सामान और दूध की खपत में भी इतना ही इजाफा देखने को मिलता है। पिछले कई वर्षों से नवरात्र थाली का चलन बढ़ गया है। इस बार भी पांच सितारा होटलों से लेकर सामान्य रेस्टोरेंट में व्रत रखने वालों के लिए खाने की थाली मिल रही है।

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फाइव स्टार में इस थाली का रेट दो हजार रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक पहुंच जाता है। जबकि सामान्य रेस्टोरेंट में यही थाली पांच सौ रुपये तक मिल रही है। घर बैठे भी ऑर्डर भी दिया जा सकता है।

45 लाख करोड़ रुपये का सालाना कारोबार

कैट की मानें तो हमारे देश में 45 लाख करोड़ रुपये का सालाना कारोबार होता है। यह कारोबार 365 दिन में नहीं, बल्कि 250 दिन में होता है। बाकी सौ दिनों की छुट्टी रहती है। प्रवीण खंडेलवाल के मुताबिक इस कारोबार को अगर डॉलर में गिने तो यह 600 बिलियन डॉलर तक पहुंचता है। एक माह में यह कारोबार 5 लाख 40 हजार करोड़ रुपए के आसपास रहता है। नवरात्रों में यह बाजारी अर्थव्यवस्था तीस फीसदी का उछाल लेती है। बाजारों की रौनक दीपावली तक देखने को मिलती है। करीब एक माह में 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यायार हो जाता है।

बाजार में तीस फीसदी का उछाल

त्योहारों के इस सीजन में खासतौर पर नवरात्र से दीपावली तक लोग जमकर खरीदारी करते हैं। कोई भी वर्ग हो इन दिनों में वह अपनी हैसियत से बाहर जाकर पैसा खर्च करता है। सोना-चांदी, गाड़ी, कपड़े या घर का कोई दूसरा सामान ज्यादातर इसी एक माह में खरीदा जाता है। वैसे भी हमारे समाज में सदियों से यह परंपरा रही है कि दीपावली पर नया सामान या खरीदा जाए। खंडेलवाल बताते हैं कि इसे शुभ माना जाता है। व्यापारी के लिए यह समय लक्ष्मी के आगमन का होता है। यही वजह है कि अर्थव्यवस्था में चाहे कितनी भी मंदी आ जाए लेकिन इस एक माह में तीस फीसदी का जो उछाल आता है, वह बाजारों को लंबे समय के लिए गुलजार रखने में कारगर साबित होता है।

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