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Economic Survey: मेक इन इंडिया के दम पर भारत बनेगा वैश्विक विनिर्माण केंद्र, GDP में 25 फीसदी योगदान का लक्ष्य

Wed, 01 Feb 2023 05:45 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 01 Feb 2023 05:45 AM IST
सार

मजबूत विकास के रास्ते पर सार्वजनिक खर्च में तेजी, पीएलआई  सेवा क्षेत्र में सुधार और खपत में वृद्धि से ही अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार। कर संग्रह से होने वाली कमाई की भी बड़ी भूमिका। अवसर का लाभ उठाने के लिए तीन बातें अहम- उल्लेखनीय घरेलू मांग की संभावना, विनिर्माण बढ़ाने के सरकार के प्रयास और विशिष्ट जनसांख्यिकीय लाभ।

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Economic Survey: India Has Unique Opportunity to Become Global Manufacturing Hub On the basis of Make in India
विनिर्माण क्षेत्र (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सरकार के प्रयासों और मेक इन इंडिया के दम पर भारत के पास मौजूदा दशक में वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने का अनूठा अवसर है। इसकी वजह यह भी है कि विदेशी कंपनियां जुझारूपन बनाए रखने के लिए विनिर्माण एवं आपूर्ति श्रृंखला रणनीतियों को अपना रही हैं। इससे न सिर्फ देश में निवेश बढ़ेगा बल्कि भारी संख्या में रोजगार बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

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मंगलवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 में कहा गया है कि अमेरिका एवं चीन के बीच व्यापार युद्ध, कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी जटिल चुनौतियों की वजह से आपूर्ति श्रृंखला के झटकों का जोखिम आज के मुकाबले कभी भी इतना अधिक महसूस नहीं किया गया। इसलिए तेजी से बदलते हालात में वैश्विक कंपनियां विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला रणनीतियों को अपना रही हैं। भारत को इस दशक में वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने के इस अनूठे अवसर का लाभ उठाना चाहिए।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि इस अवसर का लाभ उठाने के लिए तीन प्रमुख बातें अहम हैं- उल्लेखनीय घरेलू मांग की संभावना, विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से कदम उठाना और विशिष्ट जनसांख्यिकीय लाभ। इसमें कहा गया है कि वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए मेक इन इंडिया 2.0 के जरिये 27 क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है। इनमें 15 विनिर्माण और 12 सेवा क्षेत्र शामिल हैं।

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  • विनिर्माण क्षेत्र का जीडीपी में 25 फीसदी तक योगदान बढ़ाने का लक्ष्य।
  • मेक इन इंडिया 2.0 के जरिये 27 क्षेत्रों पर दिया जा रहा ध्यान।


5893 कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रियाएं शुरू
दिसंबर 2022 के अंत तक कम से कम 5,893 कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रियाएं (सीआईआरपी) शुरू हो गई थीं। इनमें से 67 फीसदी दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत बंद कर दी गई हैं। यह प्रक्रिया दिसंबर 2016 में लागू हुई थी।


उद्योग : पीएलआई से भारतीय कंपनियों की बढ़ेगी धमक, तीन लाख रोजगार मिले हैं इससे
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की मदद से 14 क्षेत्रों की भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी। इससे अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी में निवेश लाने और भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला का अभिन्न हिस्सा बनाने में मदद मिलेगी। 31 दिसंबर, 2022 तक 14 क्षेत्रों के तहत 717 आवेदनों को मंजूरी दी गई। करीब 100 एमएसएमई को थोक दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों, दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में पीएलआई का लाभ मिला। करीब 47,500 करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश किया गया है। पात्र उत्पादों का 3.85 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन/बिक्री की गई। तीन लाख रोजगार मिले हैं।

एमएसएमई :  ईसीएलजीएस से मिली संजीवनी
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को विभिन्न संकट से उबारने में आपात ऋण सुविधा गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) की बड़ी भूमिका रही है। यह उनकी ओर से भुगतान किए जाने वाले जीएसटी से नजर भी आता है। देश की जीडीपी में करीब 35 फीसदी योगदान देने वाले छह करोड़ से अधिक छोटे उद्योगों को तेजी से कर्ज दिया गया। एमएसएमई क्षेत्र के लिए कर्ज वृद्धि जनवरी से नवंबर, 2022 के दौरान उल्लेखनीय रूप से अधिक और औसतन 30.6 फीसदी से ऊपर रही है। ईसीएलजीएस के तहत कर्ज लेने वाले 83 फीसदी छोटे उद्यम थे।

निर्यात : वैश्विक वृद्धि ने रफ्तार नहीं पकड़ी तो दिखेगा असर
वैश्विक अर्थव्यवस्था अगर रफ्तार नहीं पकड़ती और व्यापार सुस्त रहता है तो 2023-24 में भारत की निर्यात वृद्धि सपाट रह सकती है। दिसंबर, 2022 में भारत का निर्यात 12.2 फीसदी घटकर 34.48 अरब डॉलर रह गया। इस दौरान व्यापार घाटा बढ़कर 23.76 अरब डॉलर पहुंच गया।

कर से कमाई : बजट अनुमान का 65 फीसदी यानी 17.81 लाख करोड़

Economic Survey: India Has Unique Opportunity to Become Global Manufacturing Hub On the basis of Make in India
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock

चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में नवंबर, 2022 तक सकल कर राजस्व बजट अनुमान (27.58 लाख करोड़) का 65 फीसदी या 17.81 लाख करोड़ रुपये रहा है। कर संग्रह बढ़ाने में कॉरपोरेट और व्यक्तिगत आयकर संग्रह की विशेष भूमिका रही।

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, 2014 के बाद भारत के कराधान पारिस्थितिकी तंत्र में पर्याप्त सुधार हुआ है। अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले प्रोत्साहनों को हटा दिया गया है। जीएसटी जैसे सुधारों, कॉरपोरेट कर में कमी, सरकारी संपत्ति कोषों व पेंशन कोषों को कर छूट एवं लाभांश वितरण कर को हटाने से आम लोगों और व्यवसायों पर कर का बोझ कम हुआ है।

  • प्रत्यक्ष कर संग्रह में अप्रैल से नवंबर, 2022 तक 26 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान प्रत्यक्ष कर संग्रह 8.67 लाख करोड़ और अप्रत्यक्ष कर संग्रह 8.91 लाख करोड़ रुपये रहा।
  • नवंबर, 2022 तक जीएसटी संग्रह 5.57 लाख करोड़ था।


रियल एस्टेट : बढ़ने लगे मकानों के दाम
चालू वित्त वर्ष में होम लोन पर बढ़ती ब्याज दरों और संपत्ति की कीमतों में वृद्धि के बावजूद मकानों की बिक्री बढ़ी है। खपत बढ़ने से भी देश के संपत्ति बाजार में सुधार आया है। मकानों के दाम कोरोना काल के दो साल के दौरान ‘मंदा’ रहने के बाद अब फिर बढ़ने लगे हैं। मांग बढ़ने से खाली पड़े मकानों की संख्या भी घट रही है। हालांकि, कई निर्माण सामग्रियों पर आयात शुल्क कम किए जाने से आवासीय संपत्तियों की कीमतें कम होने की उम्मीद है।

विनिवेश : 4.07 लाख करोड़ जुटाए
सरकार ने 9 साल में विनिवेश के जरिये करीब 4.07 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। चालू वित्त वर्ष के लिए निर्धारित विनिवेश लक्ष्य का 48 फीसदी ही हासिल किया जा सका है। 18 जनवरी, 2022 तक विनिवेश से 31,000 करोड़ रुपये जुटाए गए, जबकि बजट में इसका अनुमान 65,000 करोड़ रुपये का है। आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, एअर इंडिया के निजीकरण से सार्वजनिक परिसंपत्तियों की विनिवेश पहल में नई जान आई।

  • 2014-15 से लेकर 18 जनवरी, 2023 तक 154 विनिवेश सौदों से करीब 4.07 लाख करोड़ की राशि जुटाई गई। इसमें 3.02 लाख करोड़ रुपये अल्पांश हिस्सेदारी बिक्री से मिले। 69,412 करोड़ 10 केंद्रीय उपक्रमों में रणनीतिक विनिवेश से आए हैं।
  • सरकार भारतीय पोत परिवहन निगम, एनएमडीसी स्टील लि. बीईएमएल, एचएलएल लाइफकेयर, भारतीय कंटेनर निगम, विजाग स्टील और आईडीबीआई बैंक में भी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश में है। इनके अगले वित्त वर्ष में पूरा होने की उम्मीद है।


बैंकिंग : पूंजी में सुधार, अब मुनाफे में
बैंकिंग क्षेत्र ने कर्ज की मांग के अनुरूप कदम उठाए हैं। जनवरी-मार्च, 2022 तिमाही से ही बैंकों की कर्ज वृद्धि सालाना आधार पर दहाई अंक में रही है और यह अधिकांश क्षेत्रों में बढ़ रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) की पूंजी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। ये बैंक अब नियमित अंतराल पर लाभ कमा रहे हैं। इन बैंकों के एनपीए के जल्द समाधान के लिए भारतीय ऋणशोधन एवं दिवालिया बोर्ड (आईबीबीआई) तेजी से कदम उठा रहा है।

  • सरकार भी पीएसबी में पर्याप्त पूंजी बनाए रखने के लिए पर्याप्त वित्तीय समर्थन देती रही है। इससे इन बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई और इन्हें ऋण वित्तपोषण में आई कमी की भरपाई करने में मदद मिली है।
  • कॉरपोरेट बॉन्ड पर ब्याज बढ़ने और बाह्य वाणिज्यिक कर्ज पर ब्याज बढ़ने से ये वित्तीय साधन कम आकर्षक हो गए हैं।

रोजगार : तेजी से बने मौके, इसलिए घटी बेरोजगारी

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रोजगार (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया

श्रम बाजार और रोजगार क्षेत्र सुधार करते हुए कोविड-पूर्व के दौर से भी बेहतर स्थिति में आ गया है। दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान समेत पिछले कुछ वर्षों में किए गए प्रयासों की वजह से ऐसा संभव हुआ है। रियल एस्टेट क्षेत्र में उछाल के साथ निर्माण गतिविधियों में तेजी से भी रोजगार के अवसर पैदा हुए। प्रवासी श्रमिकों की शहर की ओर वापसी हुई। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष रोजगार दे रही है। इससे बेरोजगारी जुलाई-सितंबर, 2022 में घटकर 7.2% रह गई, जो 2019 की समान अवधि में 8.3 फीसदी थी।

  • सितंबर तिमाही में 8.3 फीसदी से घटकर 7.2 फीसदी रही बेरोजगारी

काम पाने वालों में ज्यादातर युवा
रोजगार पाने वालों में अधिकतर युवा हैं। ईपीएफओ से अप्रैल-नवंबर, 2022 में 13.2 लाख सदस्य जुड़े। 2021 की समान अवधि में यह आंकड़ा 8.8 लाख था। ईपीएफ खाताधारकों की संख्या 2022-21 के मुकाबले 2021-22 में 58.7% व कोरोना पूर्व स्तर की तुलना में 55.7% बढ़ गई।

कृषि : अच्छा रहा प्रदर्शन निवेश बढ़ाने की जरूरत
कृषि क्षेत्र ने अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि, जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव, खेती की बढ़ती लागत और अन्य चुनौतियों को देखते हुए इस क्षेत्र को नई दिशा देने की जरूरत है। अन्य चुनौतियों में छोटी जोत भूमिधारिता, कृषि मशीनीकरण की दिशा में कम प्रगति, कम उत्पादकता और छुपी बेरोजगारी आदि शामिल हैं। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि देश में विकास और रोजगार के लिए कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में ऋण वितरण के लिए एक किफायती, समय पर और समावेशी दृष्टिकोण के जरिये क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जाना चाहिए। 75 फीसदी ग्रामीण महिला श्रमिक कृषि क्षेत्र में कार्यरत हैं।

  • पिछले छह वर्षों में कृषि क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर 4.6 फीसदी रही है। यह क्षेत्र 2020-21 के 3.3 फीसदी की तुलना में 2021-22 में 3% की दर से बढ़ा है।
  • 2021-22 में कृषि निर्यात 50.2 अरब डॉलर के उच्चस्तर पर पहुंच गया।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड, सूक्ष्म सिंचाई कोष, जैविक एवं प्राकृतिक खेती जैसी नीतियों से खेती की लागत घटाने में मदद मिली है। 

रुपये में वैश्विक व्यापार बढ़ाने की आवश्यकता

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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock

घरेलू मुद्रा में अस्थिरता रोकने के लिए रुपये में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने की जरूरत है। इससे वैश्विक बाजारों में व्यापार की लागत घटाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, भारतीय निर्यातकों को विदेशी ग्राहकों से रुपये में अग्रिम भुगतान लेने और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से घरेलू मुद्रा को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा के तौर पर बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी। रुपये को अतंरराष्ट्रीय मुद्रा के तौर पर बढ़ावा देने और भारत से निर्यात पर जोर देकर वैश्विक व्यापार में वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए आरबीआई ने जुलाई, 2022 में एक अधिसूचना जारी कर आयात/निर्यात के बिल, भुगतान एवं निपटान भारतीय रुपये में करने की अतिरिक्त सुविधा को अनुमति दी थी।

एफडीआई: गिरावट के बाद अब फिर बढ़ने की उम्मीद
भारत की उच्च आर्थिक वृद्धि और कारोबारी माहौल को अधिक बेहतर बनाने के उपायों के कारण आने वाले महीनों में देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) फिर से बढ़ने की उम्मीद है। वैश्विक अनिश्चितता से चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में विनिर्माण क्षेत्र में एफडीआई प्रवाह घटा है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के मुताबिक, अप्रैल-सितंबर में एफडीआई प्रवाह 14% घटकर 26.9 अरब डॉलर रह गया।
 

5जी सेवा: खुल सकते हैं कई नए आर्थिक अवसर
5जी सेवाओं की शुरुआत से नए आर्थिक अवसर खुल सकते हैं। इससे विकास के लिए पारंपरिक बाधाएं दूर करने में मदद मिल सकती है। स्टार्टअप और व्यवसायों द्वारा नवाचार को बढ़ावा दिया जा सकता है। डिजिटलीकरण की लहर, स्मार्टफोन की बढ़ती पैठ और प्रौद्योगिकी अपनाने ने पारंपरिक और नए युग के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। नवंबर, 2022 तक 117 करोड़ टेलीफोन ग्राहक थे। 83.7 करोड़ के पास इंटरनेट कनेक्शन था।

शिक्षा: स्कूल छोड़ने की दर में लगातार आई कमी
हाल के वर्षों में सभी स्तरों पर लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए स्कूल छोड़ने की दर में लगातार गिरावट देखी गई है। स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों में नामांकन में वृद्धि हुई है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि इस वित्तीय वर्ष में लैंगिक समानता में भी सुधार हुआ है।
2022 में 26.5 करोड़ बच्चों ने स्कूल में प्रवेश लिया था। प्री-प्राइमरी में एक करोड़ बच्चे, प्राइमरी में 12.2 करोड़, उच्च प्राइमरी में 6.7 करोड़, माध्यमिक में 3.9 करोड़ और उच्च माध्यमिक में 2.9 करोड़ बच्चे थे।

देशभर में भुगतान में 24.13 फीसदी की आई बढ़ोतरी
देशभर में डिजिटल भुगतान सितंबर तक के एक साल में 24.13 फीसदी बढ़ गया। आरबीआई के सूचकांक से यह आंकड़ा सामने आया है। देश में ऑनलाइन लेनदेन को अपनाने की दर पर नजर रखने वाले आरबीआई-डीपीआई के मुताबिक सितंबर, 2022 में यह सूचकांक 377.46 पर रहा। मार्च में यह 349.30 और सितंबर, 2021 में 304.06 रहा था। भुगतान ढांचे व भुगतान प्रदर्शन में खासी वृद्धि के दम पर सभी मानकों पर आरबीआई-डीपीआई सूचकांक बढ़ा है। मार्च, 2018 में डिजिटल भुगतान की वृद्धि पर नजर रखने को सूचकांक की शुरुआत हुई थी।

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