Mumbai: वैश्विक चुनौतियों के बीच आर्थिक गतिविधियों में बनी रहेगी मजबूती, खुदरा महंगाई दर में भी आ सकती है कमी
आरबीआई ने लेख में कहा, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 7.7 फीसदी की जीडीपी वृद्धि ने संदेह करने वालों को चौंका दिया है। साथ ही, आंकडों ने इस बात पर भी जोर दिया कि विकास की गति कायम रहने की संभावना है।
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देश में आर्थिक गतिविधियों में व्यापक मजबूती बनी रहने की संभावना है। साथ ही, 2024-25 की पहली तीन तिमाहियों में खुदरा महंगाई मौजूदा 5.6 फीसदी से कम होकर 4.6 फीसदी पर आ सकती है। आरबीआई के बुधवार को जारी बुलेटिन में प्रकाशित लेख में कहा गया है, 2024 में वैश्विक वृद्धि की रफ्तार और धीमी हो सकती है। महंगाई विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में अलग-अलग गति से ब्याज दरों में कटौती का रास्ता साफ कर सकती है। वैशि्वक चुनौतियों के बावजूद कच्चे माल की लागत में कमी और कॉरपोरेट मुनाफे के चलते भारत में आर्थिक गतिविधियों में जारी मजबूती आगे भी बनी रह सकती है।
वृद्धि दर ने संशय करने वाले लोगों को चौंकाया
आरबीआई ने लेख में कहा, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 7.7 फीसदी की जीडीपी वृद्धि ने संदेह करने वालों को चौंका दिया है। साथ ही, आंकडों ने इस बात पर भी जोर दिया कि विकास की गति कायम रहने की संभावना है।
देश में स्टैगफ्लेशन का जोखिम नहीं
आरबीआई के स्टाफ सदस्यों ने बुधवार को कहा, भारत के महंगाई जनित मंदी यानी स्टैगफ्लेशन में फंसने की आशंका कम है। देव प्रसाद रथ, सिलु मुदुली और हिमानी शेखर ने अपने अध्ययन में कहा, भारत में स्टैगफ्लेशन का जोखिम सिर्फ एक फीसदी है क्योंकि इस बार जिंस कीमतों के झटके अधिक गंभीर नहीं हैं। आर्थिक वृद्धि दर में सुस्ती के बीच जब महंगाई तेजी से बढ़ती है तो उस स्थिति को स्टैगफ्लेशन कहते हैं।