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ECI: 'बंगाल में हों स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव', CEC ज्ञानेश कुमार ने अधिकारियों ने दिए निर्देश
Sat, 04 Apr 2026 08:28 AM IST
Devesh Tripathi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 04 Apr 2026 08:28 AM IST
सार
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मालदा जिले में सात न्यायिक अधिकारियों को नौ से ज्यादा घंटों तक बंधक बनाए जाने के मामले में कार्रवाई तेज हो गई है। बंगाल पुलिस ने इस मामले के मुख्य साजिशकर्ता मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, अब चुनाव आयोग ने राज्य के अधिकारियों के लिए भी सख्त निर्देश जारी किए हैं।
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सीईसी ज्ञानेश कुमार
- फोटो : ANI
विस्तार
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ मिलकर मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, कोलकाता पुलिस आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में निर्देशित किया है।
सभी स्तरों पर निर्देश लागू
यह निर्देश मंडल आयुक्तों, एडीजीपी, आईजी, जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों, एसएसपी और एसपी सहित सभी स्तर के अधिकारियों पर लागू होंगे। चुनाव आयोग ने इस बात पर जोर दिया है कि चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह से भय, हिंसा, धमकी, प्रलोभन, बूथ कैप्चरिंग, बूथ जैमिंग और मतदान में किसी भी प्रकार की बाधा से मुक्त होनी चाहिए।
क्या मालदा की घटना बनी निर्देशों की वजह?
यह निर्देश मालदा जिले में हाल ही में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद आए हैं, जहां एक अप्रैल को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने तीन महिलाओं समेत सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया था।
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सियासी सरगर्मी और आरोप-प्रत्यारोप
पश्चिम बंगाल में एसआईआर की घोषणा के बाद से ही राजनीति गरमा गई थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया का पुरजोर विरोध करते हुए चुनाव आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था। वहीं, भाजपा ने इसे घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर पेश किया था।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
एनआईए से प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल, 2026 को निर्धारित है, जिसमें संबंधित अधिकारियों को ऑनलाइन उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को न्याय प्रशासन में बाधा डालने का एक बेशर्म और जानबूझकर किया गया प्रयास बताया था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस बात पर चिंता व्यक्त की थी कि पूर्व सूचना के बावजूद राज्य के अधिकारी समय पर सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहे, जिससे अधिकारी घंटों तक बिना भोजन या पानी के रहे। अदालत ने मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक सहित वरिष्ठ राज्य अधिकारियों को उनके निष्क्रियता के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए थे।
अन्य वीडियो
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सभी स्तरों पर निर्देश लागू
यह निर्देश मंडल आयुक्तों, एडीजीपी, आईजी, जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों, एसएसपी और एसपी सहित सभी स्तर के अधिकारियों पर लागू होंगे। चुनाव आयोग ने इस बात पर जोर दिया है कि चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह से भय, हिंसा, धमकी, प्रलोभन, बूथ कैप्चरिंग, बूथ जैमिंग और मतदान में किसी भी प्रकार की बाधा से मुक्त होनी चाहिए।
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क्या मालदा की घटना बनी निर्देशों की वजह?
यह निर्देश मालदा जिले में हाल ही में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद आए हैं, जहां एक अप्रैल को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने तीन महिलाओं समेत सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया था।
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सियासी सरगर्मी और आरोप-प्रत्यारोप
पश्चिम बंगाल में एसआईआर की घोषणा के बाद से ही राजनीति गरमा गई थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया का पुरजोर विरोध करते हुए चुनाव आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था। वहीं, भाजपा ने इसे घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर पेश किया था।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
एनआईए से प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल, 2026 को निर्धारित है, जिसमें संबंधित अधिकारियों को ऑनलाइन उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को न्याय प्रशासन में बाधा डालने का एक बेशर्म और जानबूझकर किया गया प्रयास बताया था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस बात पर चिंता व्यक्त की थी कि पूर्व सूचना के बावजूद राज्य के अधिकारी समय पर सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहे, जिससे अधिकारी घंटों तक बिना भोजन या पानी के रहे। अदालत ने मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक सहित वरिष्ठ राज्य अधिकारियों को उनके निष्क्रियता के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए थे।
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