गोविंदाचार्य ने चुनाव आयोग से की मांग, राजनीतिक दलों पर भी लागू हो नोटबंदी की जवाबदेही
गोविंदाचार्य ने कहा कि नोटबंदी कानून और इसके लिए जारी दिशा निर्देश के तहत करेंट अकाउंट में 2.5 लाख से अधिक रकम जमा कराने पर इसकी सूचना आयकर विभाग को दिया जाना अनिवार्य है। ऐसे में इस दौरान अगर राजनीतिक दलों के खातों में भी इसके बराबर या इससे अधिक रकम जमा हुई है तो इसकी जांच आयकर विभाग से कराई जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि 18 नवंबर के बाद दलों के खाते में जमा 500 और 1000 के पुराने नोट को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
दलों को 75 फीसदी से अधिक चंदा नकदी के रूप में
उन्होंने कहा कि दलों को 75 फीसदी से अधिक चंदा नकदी के रूप में दिया जाता है। दल आयकर जांच से बचने के लिए इसे 20,000 रुपये से नीचे की प्राप्ति बताते हैं। ऐसे में या तो नकद दान की व्यवस्था बंद करनी चाहिए या फिर दलों से आयकर वसूला जाना चाहिए।
गोविंदाचार्य के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग में दिए ज्ञापन के जरिए कहा है कि राजनीतिक दलों को चुनावी चंदे पर आयकर विभाग से छूट है न कि नोटबंदी कानून से। ऐसे में देश के सभी राजनीतिक दलों पर नोटबंदी कानून उसी सख्ती से लागू होनी चाहिए जैसे देश के अन्य लोगों और अन्य संस्थाओं पर लागू हो रहा है।