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दिल्ली लोकसभा चुनाव 2019: यहां का नामदार और कामदार तो कोई और है!

Fri, 03 May 2019 10:13 PM IST
अमर शर्मा अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Fri, 03 May 2019 10:13 PM IST
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east delhi lok sabha candidate 2019 sheila dixit manoj tiwari dilip pandey Lok Sabha Chunav 2019
शीला दीक्षित मनोज तिवारी पूर्वी दिल्ली सीट से आमने-सामने - फोटो : सोशल मीडिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर अपनी रैलियों में स्वयं को कामदार और राहुल गांधी को नामदार कहकर व्यंग करते रहते हैं, लेकिन अगर दिल्ली के संदर्भ में बात करें तो यहां जनता की नजर में नामदार और कामदार की परिभाषा बदल जाती है। दिल्ली का कामदार कौन है? या यहां का सबसे ज्यादा विकास किसने किया, इस सवाल पर लोगों के पास बिना किसी विवाद के एक ही नाम है, और वह नाम शीला दीक्षित का है। ऐसे में जब यही नाम उनके बीच लोकसभा उम्मीदवार के रूप में सामने आ गया है तो जाहिर है कि लोगों को मतदान करते समय एक मजबूत विकल्प मिल गया है। लेकिन तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षितत के लिए यहां की राह आसान भी नहीं है क्योंकि भाजपा सांसद मनोज तिवारी उन्हें यहां से कड़ी टक्कर दे रहे हैं। पूर्वांचल मतदाताओं के गढ़ वाले इस क्षेत्र में वह भोजपुरी स्टार छवि के हैं और दूसरे उनके पास नरेंद्र मोदी के नाम का ब्रांड भी है जो उन्हें दूसरी बार विजेता बनाने में मदद कर सकता है। आम आदमी पार्टी के दिलीप पांडेय भी अरविंद केजरीवाल सरकार के शिक्षा और स्वास्थ्य के काम के सहारे इन्हीं वोटों पर हक जता रहे हैं। 
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सीलमपुर मार्केट में बैग बनाने की एक फैक्ट्री चला रहे परवेज खान का कहना है कि शीला दीक्षित के समय उनकी एरिया सहित पूरी दिल्ली में खूब काम हुआ है। सीलमपुर मार्केट को विकसित करने में जेपी अग्रवाल के समय काफी काम हुआ था।
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लेकिन परवेज खान का यह भी कहना है कि अरविंद केजरीवाल सरकार के आने के साथ ही अब म्यूनिसिपल कार्पोरेशन में किसी काम को करने के लिए एक भी पैसे देने की जरुरत नहीं पड़ती है, जबकि इसके पहले छोटे से छोटे काम के लिए पैसे देने पड़ते थे। 
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पुस्ते-हाइवे का विकास कांग्रेस की देन

सोनिया विहार के 50 वर्षीय पप्पू शर्मा का कहना है कि उनके इलाके में सबसे ज्यादा पूर्वांचल के लोग रहते हैं जो काम के सिलसिले में रोज दिल्ली के करोलबाग, चांदनी चौक, चावड़ी बाजार जैसे मुख्य इलाकों में काम करने के लिए जाते हैं। अब उनके लिए अपने घर से निकलकर अपने काम तक पहुंचने में सिर्फ आधे घंटे का समय लगता है।

जबकि इसके पहले एक घंटे से डेढ़ घंटे के बीच रोजाना आने-जाने में समय लगता था। यह हुआ है पुश्ते की मुख्य रोड और हाईवे के बनने के कारण जो कि कांग्रेस सरकार की देन हुआ करता था। पुश्ते के बनने के बाद ही भजनपुरा जैसे क्षेत्रों में बाढ़ आने से राहत मिल पाई है जबकि इसके पहले उनके घरों में बारिश में पानी भर जाता था। 

राष्ट्रवाद से पहले रोटी है वोटरों का मिजाज 

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Manoj Tiwari-Dilip Pandey-sheila dixit - फोटो : Amar Ujala

सीलिंग पर जवाब मांग रही जनता

सीलमपुर, शास्त्री पार्क और गांधी नगर (पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा) इस क्षेत्र के आर्थिक आधार की रीढ़ है। स्थानीय व्यापारियों के लिए सीलिंग यहां का सबसे प्रमुख मुद्दा है जिनकी वजह से उनके व्यापार पर बहुत नकारात्मक असर पड़ा है।

सीलमपुर में जींस बनाने की एक फैक्ट्री का काम करने वाले एहसान अहमद का कहना है कि स्थानीय बाजार के विकास के नाम पर यहां सैकड़ों लोगों की दुकानें तोड़ दी गई हैं। इससे उनके रोजी-रोजगार पर बहुत नकारात्मक असर पड़ा है। उन पर काम कर रहे हजारों परिवारों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

व्यापारी एहसान अहमद के मुताबिक कांग्रेस ने अपने शासनकाल में दिल्ली का मास्टर प्लान 2021 बनाया था जिसके कारण लोगों को कोई परेशानी नहीं हुई है जबकि भाजपा ने व्यापारियों को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया। अगर केंद्र सरकार चाहती तो दिल्ली के लोगों को यह परेशानी नहीं भुगतनी पड़ती।  

राष्ट्रवाद से पहले रोटी है वोटरों का मिजाज

उत्तरी-पूर्वी दिल्ली से भाजपा उम्मीदवार मनोज तिवारी अपनी हर सभा में नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने की अपील कर रहे हैं। लेकिन क्या उनके वोटरों की पहली प्राथमिकता राष्ट्रवाद ही है? एहसान अहमद की फैक्ट्री में काम कर रहे रमाशंकर का कहना है इस फैक्ट्री में उनके साथ-साथ यूपी-बिहार के लगभग 20 लोग काम करते हैं।

सभी को हर महीने की 10 तारीख को पैसे की उम्मीद रहती है क्योंकि उन्हें दिल्ली में अपने खर्च के साथ-साथ अपने गांव की जिम्मेदारी निभाने के लिए पैसे भेजने की जरुरत रहती है। लेकिन नोटबंदी के दौरान उन सबको काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। अब उन्हें राष्ट्रवाद से ज्यादा रोटी की चिंता सताती है। 
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