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PM Modi: 'न्याय की भाषा वही हो, जो न्याय पाने वाले को समझ आए...', पीएम मोदी का 'ईज ऑफ जस्टिस' पर जोर

Sat, 08 Nov 2025 07:13 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 08 Nov 2025 07:13 PM IST
सार

PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जीवन में सरलता और कारोबार करने में आसानी के लिए न्याय मिलने में सुगमता होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि कानून की भाषा सरल होनी चाहिए ताकि न्याय चाहने वाले लोग इसे समझ सकें।
 

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Ease of justice must to ensure ease of living, language of law should be simple: PM Modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : एक्स/एएनआई/वीडियो ग्रैब

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि न्याय की भाषा वही होनी चाहिए, जो न्याय पाने वाले को समझ आए। उन्होंने कहा कि कानूनी मसौदा बनाते समय इसका ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने 80 हजार से अधिक फैसलों का 18 भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने की सुप्रीम कोर्ट की पहल की सराहना भी की और भरोसा जताया कि यह आगे हाईकोर्ट और जिला स्तर पर भी होगा। पीएम मोदी राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'वाणिज्य न्यायालयों के स्थायी अंतरराष्ट्रीय मंच' की छठी पूर्ण बैठक को संबोधित कर रहे थे। 
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पीएम मोदी ने अपने संबोधन में क्या कहा?
उन्होंने कहा, हम कानूनी जानकारी को हर दरवाजे तक पहुंचा सकते हैं। साथियों, कानूनी मदद से जुड़ा एक और पहलू है, जिसकी मैं अक्सर चर्चा करता हूं। न्याय की भाषा वही हो, जो न्याय पाने वाले को समझ आए। जब कानून का मसौदा तैयार किया जाता है, तब इसका ध्यान रखना बहुत जरूरी है। जब लोग कानून को अपनी भाषा में समझते हैं, तो इससे (कानून का) बेहतर अनुपालन होता है और मुकदमेबाजी कम होती है। इसके साथ ही, यह भी आवश्यक है कि फैसले और कानूनी दस्तावेज को स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराया जाए। यह वाकई बहुत सराहनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 80 से अधिक फैसलों को 18 भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने की पहल की है। मुझे पूरा विश्वास है कि यह प्रयास आगे हाईकोर्ट और जिला स्तर पर भी जारी रहेगा। 
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'कानूनी जागरूकता को बढ़ाना हमारी प्राथमिकता'
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, हम सभी यह भी जानते हैं कि कानूनी जागरूकता का क्या महत्व होता है। एक गरीब व्यक्ति तब तक न्याय नहीं पा सकता, जब तक उसे अपने अधिकारों का ज्ञान न हो। वह कानून को नहीं समझता है और प्रणाली (सिस्टम) की जटिलता से डर महसूस करता है। इसलिए कमजोर वर्ग, महिलाओं और बुजुर्गों में कानूनी जागरूकता को बढ़ाना हमारी प्राथमिकता है। आप सभी और हमारी अदालतें इस दिशा में निरंतर प्रयास करते रहें। मैं समझता हूं हमारे युवा, खासकर कानून के छात्र इसमें बदलावकारी भूमिका निभा सकते हैं। कानून के युवा छात्रों को प्रोत्साहित किया जाए कि वे गरीबों और गांव में रहने वाले लोगों से जुड़ें, उन्हें उनके कानूनी अधिकार और कानूनी प्रक्रिया समझाएं, तो इससे उन्हें समाज की नस को सीधे महसूस करने का अवसर मिलेगा। 


सुनिश्चित किया जाए 'ईज ऑफ जस्टिस'
उन्होंने कहा, जब न्याय सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि देखे बिना हर व्यक्ति तक पहुंचता है, तभी वह सामाजिक न्यााय की नींव बनता है। कानूनी सहायता इस बात में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि न्याय तक सबकी पहुंच हो। राष्ट्रीय स्तर से लेकर तालुका स्तर तक कानूनी सेवाओं वाले अधिकारी, न्यायपालिका और आम आदमी के बीच सेतु का काम करते हैं। मुझे संतोष है कि आज लोक अदालतों और मुकदमेबाजी से पहले विवादों के समाधान से लाखों विवाद जल्दी, सौहार्दपूर्ण और कम खर्च में सुलझाए जा रहे हैं। भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए 'कानूनी सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली' के तहत केवल तीन साल में लगभग आठ लाख आपराधिक मामलों का निपटारा किया गया। सरकार के प्रयासों ने देश के गरीब, दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित को 'ईज ऑफ जस्टिस' सुनिश्चित किया।

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पीएम मोदी ने कहा, साथियों, पिछले 11 वर्षों में हम लगातार 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और 'ईज ऑफ लीविंग' पर मजबूती के साथ हम कुछ न कुछ कदम उठा रहे हैं। कारोबार के लिए चालीस से अधिक अनावश्यक अनुपालनों को हटाया गया। जन विश्वास अधिनियम के माध्यम से 3,400 कानूनी धाराओं का गैर-अपराधीकरण किया गया है। 15 हजार से अधिक अप्रसांगिक और पुराने कानून रद्द किए गए हैं। दशकों से चली आ रही पुरानी धाराओं को अब भारतीय न्याय संहिता से बदला गया है। साथियों जैसा मैंने पहले भी कहा कि 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और 'ईज ऑफ लीविंग' तभी संभव है, जब 'ईज ऑफ जस्टिस' भी सुनिश्चित हो। 



 
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