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Earthquakes: सोनीपत, रोहतक-शिमला और किन्नौर में आया भूकंप, हिमालय रीजन की धरती के नीचे कुछ बड़ा हो रहा है!

Fri, 06 Oct 2023 10:31 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Fri, 06 Oct 2023 10:31 PM IST
सार

एक अक्टूबर से लेकर छः अक्टूबर तक उत्तर भारत के इलाके में धरती लगातार ही कहीं न कहीं कांप रही है। हरियाणा हिमाचल उत्तराखंड में धरती के नीचे पैदा हुई प्लेटों के टकराने की ऊर्जा रिलीज हो रही है। वैज्ञानिकों का कहना है छोटे-छोटे भूकंप बड़े भूकंप की आशंका कम करते हैं लेकिन बड़े भूकंप का खतरा भी बना रहता है।

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Earthquake in Sonipat, Rohtak-Shimla and Kinnaur, something big is happening under soil of Himalayan region
हिमालय। - फोटो : iStock

विस्तार

नेपाल में आए भूकंप के बाद लगातार उत्तरी भारत के हिमालयन रीजन में भूकंप के झटके आ रहे हैं। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के आंकड़ों के मुताबिक यह झटका सिर्फ हिमालय रीजन ही नहीं बल्कि इसके साथ-साथ मैदानी इलाकों में भी आ रहे हैं। बीते 24 घंटे के भीतर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला और उसके ही जिले किन्नौर में भी भूकंप आया। जबकि इसके साथ ही उत्तराखंड के चमोली और उत्तरकाशी समेत हरियाणा के रोहतक और सोनीपत में भी बीते एक सप्ताह के भीतर अलग-अलग इंटेंसिटी के भूकंप के झटकों को महसूस किया गया। भू वैज्ञानिकों के मुताबिक एक अक्टूबर से लेकर अब तक जिस तरीके से उत्तर भारत खासतौर से हिमालय रीजन में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं वह फिलहाल यह बताते हैं की जमीन के भीतर आपस में टकराने वाली प्लेटों के बाद पैदा हुई ऊर्जा की मात्रा भरी हुई है। जो किसी बड़े भूकंप की ओर भी इशारा कर रही है।

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नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के आंकड़े बताते हैं कि एक अक्टूबर से लेकर 6 अक्टूबर तक उत्तर भारत के हिमालयन रीजन में भूकंप के काफी झटके महसूस किए गए। नेपाल में आए भूकंप के झटकों को छोड़ दिया जाए तो गुरुवार की शाम 4 बजे के करीब हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में 2.8 की तीव्रता की भूकंप का झटका लगा था। जिसको शायद ही हिमाचल की राजधानी में लोगों को एक भूकंप महसूस हुआ हो। इसके थोड़ी देर बाद ही गुरुवार को तकरीबन साढ़े  चार बजे बजे के करीब हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में भी भूकंप के झटके लगे। जिसकी तीव्रता भी शिमला के बराबर 2.8 की ही थी।
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नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक आरएस द्विवेदी कहते हैं कि क्योंकि 2.8 की तीव्रता इतनी ज्यादा नहीं होती है जिसको बहुत महसूस किया जा सके। लेकिन जिस सीस्मिक जोन में हिमाचल प्रदेश आता है वह खतरनाक श्रेणी में है। ऐसे में इससे थोड़ी भी ज्यादा तीव्रता वाला भूकंप हिमाचल के कमजोर हो चुके पहाड़ों के लिए बड़ा खतरा भी हो सकता है।
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नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के आंकड़े बताते हैं कि हिमाचल प्रदेश की तरह ही हिमालयन रीजन में स्थित उत्तराखंड के चमोली और उत्तरकाशी में भी बीते दो दिनों से भूकंप के झटके लगे हैं। उत्तरकाशी में जहां पर गुरुवार को 3.2 की इंटेंसिटी का भूकंप आया। वहीं बुधवार यानी 4 अक्टूबर को चमोली में 2.6 की तीव्रता का भूकंप का झटका लगा था। वरिष्ठ वैज्ञानिकों के मुताबिक 2 अक्टूबर को भी उत्तराखंड के चमोली में बहुत हल्का 1.5 इंटेंसिटी का भूकंप आया था। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी में दर्ज उत्तर भारतीय इलाकों में रोहतक और सोनीपत का नाम भी बीते एक सप्ताह के भीतर आए भूकंपों के झटकों के नाम पर दर्ज है। 1 अक्टूबर को हरियाणा के रोहतक में 2.6 की तीव्रता का भूकंप आया था। जबकि उसके तीसरे दिन यानी तीन  अक्टूबर को सोनीपत में 2.7 की तीव्रता का भूकंप आया। भू वैज्ञानिकों का कहना है कि जिस तरीके के झटकों की यह तीव्रता है उसका बहुत असर तो नहीं होता है लेकिन लगातार आने वाले इन झटकों को समझना बेहद जरूरी है।
 
वरिष्ठ भू वैज्ञानिक एसएन द्विवेदी कहते हैं कि जिस तरीके से हिमालयन रीजन में लगातार भूकंप के झटके आ रहे हैं इसमें उत्तराखंड हिमाचल प्रदेश समेत नेपाल का वह इलाका भी शामिल है जिसमें बड़ी तीव्रता का भूकंप अभी तीन दिन पहले आया था, वह एक चिंता की बात तो जरूर है। द्विवेदी कहते हैं कि लगातार आ रहे भूकंप के झटके इस बात की तस्दीक करते हैं कि धरती के नीचे प्लेटो के आपस में टकराने की वजह से ऊर्जा तो बनी ही हुई है। जो छोटे-छोटे भूकंपों के माध्यम से रिलीज भी हो रही है। उनका मानना है कि इस तरीके के छोटे-छोटे भूकंप एक तरह से धरती के भीतर मौजूद ऊर्जा को न सिर्फ काम करते हैं बल्कि किसी बड़े भूकंप की संभावना को भी बहुत हद तक कम करने का एक प्रयास वैज्ञानिक दृष्टिकोण से माना जाता है। लेकिन एक बात यह भी तय है कि लगातार हिमालयन रीजन खासतौर से उस इलाके में इन भूकंप को महसूस किया जा रहा है जहां फॉल्ट लाइन है तो यह एक चिंताजनक बात भी हो जाती है। 

 
वरिष्ठ भू वैज्ञानिक डॉ. हरीश चंद्रा बताते हैं कि पूरी दुनिया में हिमालयन रेंज से लगते देश भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। क्योंकि इंडियन प्लेट और यूरेशिया प्लेट दोनों एक दूसरे से नीचे खिसक रही है। इसलिए रोजाना ही कहीं न कहीं छोटे भूकंप आते रहते हैं। लेकिन जब इन दोनों प्लेटों को टकराने के लिए ज्यादा जगह मिल जाती  है तो टकराहट जोरदार होती है जो भूकंप की तीव्रता को बढ़ा देती है। डॉ हरीश कहते हैं कि लेकिन इन बड़े भूकंप से पहले छोटी टकराहट होती है। जिनकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर एक से तीन या  उसके आस पास की होती है। हालांकि वह कहते हैं अगर ये छोटे छोटे भूकंप लगातार आते रहे तो बड़े भूकंप की आशंका कम हो जाती है। क्योंकि धरती के अंदर प्लाटों के टकराने से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा किसी ने किसी स्तर पर रिलीज होती रहती है। लेकिन दूसरी और खतरा इस बात का भी बना रहता है कि कहीं लगातार बनी हुई ऊर्जा से छोटे-छोटे भूकंपों के बाद कोई बड़ा भूकंप ना आ जाए।

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