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Rajasthan: 'अगर न्यायपालिका ने घुटने नहीं टेके होते, तो आपातकाल की स्थिति नहीं आती'; उपराष्ट्रपति की टिप्पणी

Sat, 10 Aug 2024 08:06 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Sat, 10 Aug 2024 08:06 PM IST
सार

Rajasthan: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज जोधपुर में राजस्थान उच्च न्यायालय के प्लेटिनम जयंती समारोह की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर अपने विचार रखें। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस दौरान आपातकाल का भी जिक्र किया। 

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During the emergency, the constitution was violated and its basic spirit was crushed: Dhankhar
अगर न्यायपालिका ने घुटने नहीं टेके होते, तो आपातकाल की स्थिति नहीं आती- उपराष्ट्रपति - फोटो : X / @VPIndia

विस्तार

जोधपुर में राजस्थान उच्च न्यायालय के प्लेटिनम जयंती समारोह को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने आपातकाल का भी जिक्र किया। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि अगर उच्चतम स्तर पर न्यायपालिका ने घुटने नहीं टेके होते, असंवैधानिक तंत्रों के आगे नहीं झुकी होती, इंदिरा गांधी की उस तानाशाही के आगे कमजोर नहीं पड़ी होती, तो आपातकाल की स्थिति नहीं आती। हमारा राष्ट्र बहुत पहले ही अधिक विकास प्राप्त कर चुका होता। हमें दशकों तक इंतजार नहीं करना पड़ता।
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'उस काले दौर को भूलना बिल्कुल भी उचित नहीं होगा'
उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि- हम न्यायपालिका की एक बहुत ही उच्च संस्था का हिस्सा हैं, लेकिन उस समय, नागरिकों के मूल अधिकारों के दुर्जेय गढ़ और शीर्ष पर आसीन न्यायपालिका, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के मनमाने तानाशाही शासन के आगे झुक गई। और इसका क्या परिणाम हुआ? लाखों लोगों को सलाखों के पीछे डाल दिया गया, उन्हें अपमान सहना पड़ा। उनमें से कई इस देश के प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मंत्री बने और कई क्षेत्रों में योगदान दिया और योगदान देना जारी रखा। इस देश के किसी भी नागरिक के लिए उस काले दौर को भूलना बिल्कुल भी उचित नहीं होगा।

उपराष्ट्रपति ने बांग्लादेश का भी किया जिक्र
इस दौरान उपराष्ट्रपति ने बांग्लादेश का जिक्र करते हुए कहा कि मैं आपका ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं और वे यह धारणा फैलाना चाहते हैं कि कुछ दिन पहले हमारे पड़ोस में जो हुआ, वह भारत में भी होने वाला है। यह बहुत चिंताजनक है। इस देश का नागरिक संसद में रहते हुए कैसे ऐसा कर सकता है। इनमें से एक प्रतिष्ठित कानूनी बिरादरी से संबंधित है, जबकि दूसरे ने भारतीय विदेश सेवा में पर्याप्त अनुभव प्राप्त किया है। दोनों को शासन में महत्वपूर्ण पदों पर रहने का अवसर मिला है, क्योंकि मंत्री यह कहने में देर नहीं लगाते कि पड़ोस में जो हुआ, वह भारत में भी होगा। सावधान रहें।

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