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Manipur: मणिपुर के हालात से ऐसे बिगड़ सकती है नॉर्थ ईस्ट की आबोहवा, नहीं दिया दखल तो बढ़ेगी मुश्किल

Mon, 24 Jul 2023 07:58 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Mon, 24 Jul 2023 07:58 PM IST
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सार
रक्षा मामले से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मणिपुर में दो समुदायों के बीच होने वाले विवाद को अगर अब भी नहीं कंट्रोल किया जा सका, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। वह कहते हैं कि असम में बनाए गए शरणार्थी केंद्र में पहुंच रहे लोग इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि मणिपुर के लोगों और वहां की जाति विशेष समुदाय में डर बना हुआ है...
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Due to situation in Manipur, the situation of North East may worsen
Manipur Relief camp - फोटो : PTI

विस्तार

मणिपुर में कुकी और मैतेई समुदाय के बीच चल रहा विवाद नॉर्थ ईस्ट के और कई राज्यों का फैल सकता है। इसकी आशंका इसलिए भी जताई जा रही है कि मणिपुर के अलावा नार्थ ईस्ट के और भी कुछ राज्यों में इन दोनों समुदाय के लोग रहते हैं। जिस तरीके से मिजोरम से एक समुदाय के लोगों का पलायन शुरू हुआ है, उससे रक्षा मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह बहुत ही गंभीर मसला होता जा रहा है।इसकी आंच नॉर्थ ईस्ट के और कई राज्यों तक फैल सकती है। हालात यह हो गए हैं कि मणिपुर छोड़ने वाले लोगों के लिए असम में शरणार्थी कैंप तक बना दिए गए हैं।

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बीते कुछ समय से मणिपुर सुलग रहा है। रक्षा मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि हालात तो पहले से ही बदहाल थे, लेकिन वीडियो के वायरल होने के बाद अभी स्थितियां को और ज्यादा कंट्रोल करने की जरूरत है। रक्षा मामलों से जुड़े विशेषज्ञ और लंबे समय तक नॉर्थ ईस्ट में सेवाएं देने वाले कर्नल (रि.) आरएन लांबा कहते हैं कि मणिपुर के जिन दो समुदायों में विवाद चल रहा है, वह सिर्फ मणिपुर तक ही सीमित नहीं है। उनका कहना है कि इस समुदाय के लोग आसपास के राज्यों मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और असम के भी कुछ हिस्सों समेत अरूणाचल प्रदेश में रहते हैं। कर्नल लांबा कहते हैं कि जिस तरीके से मणिपुर में वीडियो वायरल होने के बाद मिजोरम से एक विशेष जाति समुदाय के लोगों का पलायन शुरू हुआ है, वह चिंता का विषय है।

सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का मानना है कि मणिपुर के साथ-साथ नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में पूरी नजर बनी हुई है। खुफिया एजेंसी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि जिन दो समुदायों को लेकर मणिपुर में विवाद चल रहा है, उसी समुदाय के कुछ और लोग आसपास के राज्यों में भी रहते हैं। इसलिए उन राज्यों के पुलिस विभाग समेत स्थानीय खुफिया एजेंसियों को भी अलर्ट पर रखा गया है। ताकि  वह पूरी गतिविधि पर नजर बनाए रहें। मणिपुर के मैतेई समुदाय से ताल्लुक रखने वाले हेरेन कहते हैं कि उनके समुदाय से जुड़े हुए लोग अब मणिपुर के आसपास के राज्यों से या तो पलायन कर रहे हैं या फिर खौफ में जी रहे हैं। वह कहते हैं कि यह स्थितियां बेहतर बिल्कुल नहीं हैं। उनका कहना है कि जिस तरीके से राज्य सरकार ने मणिपुर में लापरवाही बरती उसका खामियाजा आज सभी लोगों को उठाना पड़ रहा है।

रक्षा मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि हालात काबू नहीं किए गए, तो सुलग रहे मणिपुर का असर निश्चित तौर पर नॉर्थ ईस्ट के अन्य राज्यों में भी देखने को मिलेगा। इसके पीछे विशेषज्ञों का अपना तर्क है। रक्षा मामले से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मणिपुर में दो समुदायों के बीच होने वाले विवाद को अगर अब भी नहीं कंट्रोल किया जा सका, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। वह कहते हैं कि असम में बनाए गए शरणार्थी केंद्र में पहुंच रहे लोग इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि मणिपुर के लोगों और वहां की जाति विशेष समुदाय में डर बना हुआ है। रक्षा मामलों से जुड़े विशेषज्ञ और नॉर्थ ईस्ट में खुफिया एजेंसियों से जुड़े रहे एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि इस पूरे मामले में सिर्फ जातिगत समुदाय की लड़ाइयां ही माहौल नहीं खराब कर रहीं हैं, बल्कि नशे के कारोबार से जुड़े कार्टेल भी मणिपुर और नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों के हालात को खराब कर रहे हैं। इसलिए यहां के हालात को अब जल्द से जल्द दुरुस्त करना नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में शांति बहाली की पहल होगी।

वहीं असम प्रशासन भी बीते कुछ दिनों से सीमाई इलाकों का दौरा कर रहा है और लोगों की सुविधा के लिए सभी जरूरी निर्देश भी दे रहा है। जानकारी के मुताबिक मणिपुर से असम पहुंचे कुछ लोग अपने रिश्तेदारों के घर ठहरे हुए हैं। वहीं अन्य ने विभिन्न कैंपों में शरण ली हुई है। ये कैंप विभिन्न प्राइमरी स्कूलों और कम्युनिटी हॉल्स में लगाए गए हैं। शरणार्थियों को राशन मुहैया करा दिया गया है। चाचर के एसपी नुमुल महातो कहते हैं कि सीमाई इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, ताकि हिंसा की कोई घटना ना होने पाए। असम के दो जिले चाचर और दिमा हसाओ मणिपुर के साथ 200 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं।

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