कोरोना के नए स्ट्रेन ने बढ़ाई मुश्किलें, सभी पैसेंजर ट्रेनें शुरू होने में लग सकता है समय
दिसंबर 2020 तक रेलवे का राजस्व 93,201.54 करोड़ रुपये था, जबकि दिसंबर 2019 में यह 1,30,195.36 करोड़ रुपये रहा था। इस हिसाब से रेलवे को कुल 36,993.82 करोड़ रुपये का राजस्व कम हासिल हुआ...
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कोविड 19 के कम होते मामलों के बीच कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भारत में भी वायरस का नया स्ट्रेन तेजी से पैर पसारता नजर आ रहा है। वहीं केरल, महाराष्ट्र, पंजाब, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। राज्यों में बढ़ते मामलो को देखते हुए रेलवे भी अलर्ट हो गया हैं। फिलहाल पैसेंजर ट्रेनों के लिए यात्रियों को इंतजार करना पड़ सकता है।
रेलवे मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने के अनुरोध पर कहा, कुछ राज्यों में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे है। ऐसे में सभी पैसेंजर ट्रेनें एक साथ शुरू करने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। राज्यों से हम लागतार चर्चा कर रहे हैं। बढ़ते सक्रमण के कारण राज्य अभी पहले की तरह ट्रेन सेवा शुरू करने के पक्ष में नजर नहीं आ रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा, अभी 65 फीसदी ट्रेनें चल रही हैं। जनवरी में 250 से अधिक ट्रेनें बढ़ाई गईं और इसके बाद चरणबद्ध तरीके से ट्रेनों की संख्या और बढ़ाई जा सकती है। वर्तमान में देश भर में कुछ उपनगरीय ट्रेन सेवाओं के साथ सिर्फ स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं जो पूरी तरह से आरक्षित होती हैं।
कोरोना से रेलवे को भी हुआ करोड़ों का नुकसान
कोविड-19 का असर भारतीय रेलवे पर भी देखने को मिला। रेल मंत्रालय की तीन फरवरी को संसद में दी गई रिपोर्ट के अनुसार रेलवे को 37 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। दिसंबर 2019 और दिसंबर 2020 में हुई रेलवे की कुल यातायात आमदनी को लेकर रिपोर्ट बनाई गई। इसमें सामने आया कि वर्ष 2020 में रेलवे का राजस्व करीब 37 हजार करोड़ रुपये कम रहा है।
इस रिपोर्ट में रेलवे ने माना कि लॉकडाउन के चलते ट्रेन परिचालन रुकने से ये नुकसान हुआ है। दिसंबर 2020 तक रेलवे का राजस्व 93,201.54 करोड़ रुपये था, जबकि दिसंबर 2019 में यह 1,30,195.36 करोड़ रुपये रहा था। इस हिसाब से रेलवे को कुल 36,993.82 करोड़ रुपये का राजस्व कम हासिल हुआ।