जोखिम भरी है 300 किलोमीटर की राह: सीएपीएफ की हवाई यात्रा बंद होने से आतंकियों को मिलेगा मौका!
'कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन' के महासचिव रणबीर सिंह के अनुसार, हमें पुलवामा हमले को नहीं भूलना चाहिए। उस आत्मघाती हमले की साजिश, पाकिस्तान के आतंकी संगठनों द्वारा रची गई थी। वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अर्धसैनिक बलों के लिए 'एयर कूरियर सर्विस' ऐसे वक्त में बंद की गई है, जब घाटी के ऊंचे पहाड़ों पर बर्फ पिघलनी शुरू हो गई है...
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जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व के आतंक से प्रभावित इलाकों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा में सेंध लग सकती है। वजह, अब इन इलाकों में जवानों की आवाजाही सड़क मार्ग से होगी। अर्धसैनिक बलों के लिए 'एयर कूरियर सर्विस' को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। 'कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन' ने इसे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों के लिए बुरी खबर बताया है। एसोसिएशन का कहना है कि जेएंडके में लगभग तीन सौ किलोमीटर का क्षेत्र जोखिम भरा है। ऐसे क्षेत्रों में आईईडी, हैंड ग्रेनेड, ड्रोन और आत्मघाती हमले का अंदेशा बना रहता है। सीएपीएफ की हवाई यात्रा बंद होने से अब दोबारा काफिलों की शुरुआत हो सकती है। जवानों की सुरक्षा के मद्देनजर भारी संख्या में रोड ओपनिंग पार्टियां लगानी पड़ेंगी। घाटी में अभी 170 आतंकी, जिनमें 77 विदेशी (पाकिस्तानी आतंकवादी) और 93 स्थानीय आतंकी शामिल हैं। पहाड़ों पर बर्फ पिघलने के साथ ही इनकी सक्रियता बढ़ने लगी है।
आतंकी गतिविधियों में एकाएक तेजी आने लगी है
'कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन' के महासचिव रणबीर सिंह के अनुसार, हमें पुलवामा हमले को नहीं भूलना चाहिए। उस आत्मघाती हमले की साजिश, पाकिस्तान के आतंकी संगठनों द्वारा रची गई थी। 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। आतंकी हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अर्धसैनिक बलों के लिए 'एयर कूरियर सर्विस' शुरू की गई थी। यह सेवा ऐसे वक्त में बंद की गई है, जब घाटी के ऊंचे पहाड़ों पर बर्फ पिघलनी शुरू हो गई है। घाटी में पिछले दो दिन में कई आतंकी हमले हुए हैं। 'एयर कूरियर सर्विस' बंद होने का मतलब अब फिर से काफिलों का दौर शुरू हो जाएगा, जिसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए विभिन्न रास्तों पर जवानों को तैनात करना पड़ेगा। इन बलों की कई बटालियनें 300 किलोमीटर लंबे जम्मू, पटनीटॉप, रामबन, बनिहाल, काजीगुंड, अनंतनाग व श्रीनगर सहित दूसरे क्षेत्रों में तैनात हैं। वहां तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग पर फिर से रोड ओपनिंग पार्टियां तैनात करनी पड़ेंगी। रणबीर सिंह का कहना है, इसके लिए भारी भरकम बजट व मैनपावर की जरूरत पड़ेगी। इतना सब इंतजाम करने के बावजूद आतंकी हमले का साया मंडराता रहेगा। रेलवे के आउटर सिग्नल पर लिखी लाइनें 'सावधानी हटी और दुर्घटना घटी' का नियम कश्मीर घाटी में बखूबी लागू होता है।
काफिलों पर कोई भी अनहोनी हो सकती है
हवाई यात्रा सेवा बंद होने के बाद जवानों को एक जगह से दूसरी जगह तक आने-जाने में ज्यादा समय लगेगा। जवानों में मानसिक तनाव बढ़ेगा। कहीं पर सड़क खिसक जाएगी तो कहीं मुख्य मार्ग पर पहाड़ी का हिस्सा टूट कर आ जाएगा। बेमौसम बरसात व बर्फबारी के चलते जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग, जिसके कई दिनों तक बंद रहने की नौबत आ जाती है, उस हालत में किलोमीटरों लंबे काफिलों पर कोई भी अनहोनी हो सकती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय को अविलंब विचार कर फिर से एयर कूरियर सर्विस को चालू करना चाहिए। यहां जवानों की सुरक्षा की बात है। वे देश की हिफाजत करते हैं तो सरकार का भी फर्ज है कि उन्हें जरुरी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान, जहां आजकल राजनीतिक हालात ठीक नहीं है, ऐसे में उसकी सीमा से लगते राज्यों में विशेष सतर्कता बरतनी होगी। वहां की राजनीतिक उठापटक में पाक सेना की भूमिका रहती है। आईएसआई, जिसके पास कई बड़े आतंकी समूह हैं, उसके चलते बॉडर पर आतंकी गतिविधियों में तेजी के आसार हो सकते हैं। ऐसे हालात में 'एयर कूरियर सर्विस' को अविलंब बहाल करने की जरूरत है।
सीमा पार स्थित लॉन्च पैड्स पर बड़ी संख्या में मौजूद हैं आतंकी
पाकिस्तान और पीओके में लॉन्च पैड्स पर आतंकवादी मौजूद हैं। सूत्रों के मुताबिक, इनकी संख्या करीब तीन सौ है। ये आतंकी, भारतीय सीमा में घुसपैठ का मौका तलाश रहे हैं। वे भारतीय सीमा में हमला करने की फिराक में हैं। पिछले दिनों केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए बताया था कि पाकिस्तान और पीओके में बड़ी संख्या में आतंकियों के लॉन्च पैड मौजूद हैं। हालांकि कुछ वर्षों में सीमा पार से होने वाली घुसपैठ के मामलों में कमी देखी गई है। साल 2018 में इस तरह की 143 घटनाएं, 2019 में 138 घटनाएं और 2020 में 51 घटनाएं घटी थीं। इस साल 34 घटनाएं हुई हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच एक साल से नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर संघर्ष विराम लागू है। केंद्र सरकार, एलओसी पर सुरक्षा इंतजाम की नियमित समीक्षा करती है। सूत्रों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा, गुरेज सेक्टर, कुपवाड़ा जिले के केरन और माछिल सेक्टर में आतंकी मौजूद हैं। सीमा पार के लांचिंग पैड, दुधनियाल और अठमुगम पर भी घुसपैठ के लिए 70 आतंकी तैयार बैठे हैं। लोसार, सोनार, सरदारी, केल और तेजिन में कम से कम 40 आतंकवादी मौजूद हैं। ये आतंकी बर्फ पिघलने का इंतजार कर रहे हैं।