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Climate Change: जलवायु परिवर्तन के कारण रातें भी, नींद में खलल से बिगड़ रही तबीयत; स्वभाव में आक्रामकता

Mon, 24 Jun 2024 04:53 AM IST
विशांत श्रीवास्तव अमर उजाला, न्यूज डेस्क, नई दिल्ली
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, नई दिल्ली Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Mon, 24 Jun 2024 04:53 AM IST
सार

जलवायु में परिवर्तन होने के कारण अब दिन के साथ रातें भी तप रहीं हैं। जिसके कारण लोग सही से सो भी नहीं पा रहे हैं। इससे लोगों की तबीयत बिगड़ रही है और वो स्वभाव से आक्रामक होते जा रहे हैं। 


 

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Due to climate change, health is deteriorating due to sleep disturbance at night; aggression in nature
Climate Change And Food - फोटो : Istock

विस्तार

 जलवायु परिवर्तन न केवल दिन, बल्कि रात में भी बढ़ते तापमान की वजह बन रहा है। इस कारण न केवल लोगों की नींद प्रभावित हो रही है, बल्कि उनके स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। क्लाइमेट सेंट्रल और क्लाइमेट ट्रेंड्स के नए विश्लेषण में यह सामने आया है।

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क्लाइमेट सेंट्रल की स्लीपलेस नाइट्स नामक रिपोर्ट के अनुसार, 2018 से 2023 के बीच पंजाब, जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के शहरों में जलवायु परिवर्तन की वजह से वर्ष में करीब 50 से 80 अतिरिक्त रातें ऐसी दर्ज की गई हैं, जब तापमान 25 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर गया। मेट्रो शहर मुंबई में सबसे ज्यादा बदलाव देखने को मिला है। यहां 65 अतिरिक्त गर्म रातें रही हैं। राज्यों में पश्चिम बंगाल और असम पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है।  जलपाईगुड़ी, गुवाहाटी, सिलचर, डिब्रूगढ़ और सिलीगुड़ी जैसे शहरों में औसतन हर साल 80 से 86 अतिरिक्त रातों का तापमान 25 डिग्री से ऊपर पहुंच गया।  

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रक्तचाप और मधुमेह के साथ आक्रामक हो रहा स्वभाव...रात में शरीर का तापमान कम नहीं होने की वजह से स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। इसके कारण रक्तचाप और मधुमेह का स्तर बढ़ने के साथ-साथ लोगों का स्वभाव आक्रामक होता जा रहा है। यहां तक कि पाचन की समस्याएं भी बढ़ रही हैं। धीरे-धीरे यह मांसपेशीय संरचना पर भी असर डाल रहा है। बच्चों और बुजुर्गों में इससे मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है। कहां क्या असर...रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण कई शहरों में 15 से 50 अतिरिक्त दिन ऐसे रहे जब न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा।  पर्यटक शहर जयपुर में 19 अतिरिक्त  रातें गर्म रहीं। गंगटोक में 54, दार्जिलिंग में 31, शिमला में 30 और मैसूर में 26 अतिरिक्त दिन न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा।
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ऊंची इमारतें और कंक्रीट रात के समय  गर्मी नहीं निकलने देते
विश्लेषण के अनुसार, शहरों में ऊंची इमारतें और कंक्रीट रात के समय अतिरिक्त गर्मी को बाहर नहीं निकलने देते। ऐसे में तापमान ठंडा नहीं हो पाता और रात में भी गर्मी और लू जारी रहती है। डॉ. रॉक्सी मैथ्यू का कहना है कि पेड़ों वाली हरी-भरी जगहें रात में गर्मी को तेजी से मुक्त कर सकती हैं, लेकिन भारत में प्राकृतिक क्षेत्रों की तुलना में ऊंची इमारतों पर अधिक ध्यान दिया जाता है। ऊपर से बेतरतीब शहरी नियोजन, खराब निर्माण गर्मी और बढ़ाने का काम करते हैं।



 
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