{"_id":"57325eed4f1c1bac06919ac6","slug":"dsp-tanzil-murder-case-munir-aide-shadab-arrested-by-stf","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"डीएसपी तंजील हत्याकांड: STF को कामयाबी, मुनीर का गुर्गा शादाब गिरफ्तार","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
डीएसपी तंजील हत्याकांड: STF को कामयाबी, मुनीर का गुर्गा शादाब गिरफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Wed, 11 May 2016 03:54 AM IST
विज्ञापन
- फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डीएसपी तंजील अहमद हत्याकांड के बाद से कुख्यात शार्प शूटर मुनीर के पीछे लगी एसटीएफ ने उसकी ‘किलिंग मशीन ए कंपनी’ के गुर्गे शादाब को मंगलवार को शहर से दबोच लिया। शादाब आलमगीर हत्याकांड में मुनीर के साथ-साथ फरार था और इस पर मुनीर के साथ पांच हजार का इनाम घोषित था। हालांकि शादाब को मुनीर के बारे में कोई सूचना नहीं है। फिर भी इससे मिले अन्य कनेक्शनों की मदद से टीम अब मुनीर को दबोचने में तैयारी में लग गई है।
इंस्पेक्टर सिविल लाइंस सूर्यकांत द्विवेदी के अनुसार शादाब आलम पुत्र अयूब आला निवासी अयूब नगर बिलरियागंज आजमगढ़ 18 सितंबर 2015 को एएमयू में मौलाना आजाद लाइब्रेरी के पास हुई डीएसडब्ल्यू छात्र आलमगीर की हत्या में मुनीर के साथ-साथ फरार था। तभी से उसकी तलाश थी। एसटीएफ की इकाई मुनीर को लेकर शादाब पर काम कर रही थी। इसी दौरान एसटीएफ को सूचना मिली, जिसके आधार पर घेराबंदी कर शादाब को एएमयू से सटी ठंडी सड़क से दबोच लिया गया।
दो साल से मुनीर से मुलाकात नहीं
पुलिस पूछताछ में शादाब ने स्वीकारा है कि वह एएमयू में प्लस टू में दाखिल हुआ था। बीकॉम द्वितीय वर्ष में रहते 2014 में आतिफ व तल्हा पर फायरिंग में निलंबित हो गया। इसके बाद वह आलमगीर हत्याकांड में उसका नाम आया तो वह मुंबई चला गया था। जहां उसने बहन के घर के अलावा अन्य रिश्तेदारियों में फरारी काटी। शादाब की मानें तो वह आलमगीर की हत्या में मौके पर नहीं था। बस मुनीर आदि से संपर्क में जरूर था। 2014 से उसकी मुनीर से मुलाकात तक नहीं हुई। शादाब के पिता दुबई में नौकरी करते हैं, जबकि एक बड़ा भाई आजमगढ़ में कपड़े का व्यापार करता है। पढ़ने-लिखने के लिए परिवार ने उसे एएमयू भेजा, मगर यहां अपराधी बनकर रह गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
इंस्पेक्टर सिविल लाइंस सूर्यकांत द्विवेदी के अनुसार शादाब आलम पुत्र अयूब आला निवासी अयूब नगर बिलरियागंज आजमगढ़ 18 सितंबर 2015 को एएमयू में मौलाना आजाद लाइब्रेरी के पास हुई डीएसडब्ल्यू छात्र आलमगीर की हत्या में मुनीर के साथ-साथ फरार था। तभी से उसकी तलाश थी। एसटीएफ की इकाई मुनीर को लेकर शादाब पर काम कर रही थी। इसी दौरान एसटीएफ को सूचना मिली, जिसके आधार पर घेराबंदी कर शादाब को एएमयू से सटी ठंडी सड़क से दबोच लिया गया।
विज्ञापन
दो साल से मुनीर से मुलाकात नहीं
पुलिस पूछताछ में शादाब ने स्वीकारा है कि वह एएमयू में प्लस टू में दाखिल हुआ था। बीकॉम द्वितीय वर्ष में रहते 2014 में आतिफ व तल्हा पर फायरिंग में निलंबित हो गया। इसके बाद वह आलमगीर हत्याकांड में उसका नाम आया तो वह मुंबई चला गया था। जहां उसने बहन के घर के अलावा अन्य रिश्तेदारियों में फरारी काटी। शादाब की मानें तो वह आलमगीर की हत्या में मौके पर नहीं था। बस मुनीर आदि से संपर्क में जरूर था। 2014 से उसकी मुनीर से मुलाकात तक नहीं हुई। शादाब के पिता दुबई में नौकरी करते हैं, जबकि एक बड़ा भाई आजमगढ़ में कपड़े का व्यापार करता है। पढ़ने-लिखने के लिए परिवार ने उसे एएमयू भेजा, मगर यहां अपराधी बनकर रह गया।
विज्ञापन
ऐसे बनी ‘किलिंग मशीन ए कंपनी’, चंदे से तमंचा आया
पुलिस पूछताछ में शादाब ने स्वीकारा है कि 2013-2014 में एएमयू छात्रसंघ के चुनाव में उनका साथी मंजर सचिव पद पर चुनाव लड़ा। उसी चुनाव प्रचार के दौरान मुनीर, आशुतोष मिश्रा, शादाब, अतीउल्ला आदि की अच्छी दोस्ती हुई और वह खुद दोस्तों के चंदे से अपने लिए तीन हजार रुपये का तमंचा खरीदा था। इसी दौरान आशुतोष मिश्रा के झगड़े को लेकर आतिफ पर तल्हा पर फायरिंग में उसका नाम आया।
आलमगीर हत्याकांड में पहली गिरफ्तारी
बेशक पुलिस की टीम इस गिरफ्तारी को ठंडी सड़क से दिखा रही है। मगर सूत्रों की मानें तो यह दो दिन से एसटीएफ के पास था और लगातार हर पहलू पर मुनीर को लेकर पूछताछ और उससे नए कनेक्शन मिलने के बाद उसकी गिरफ्तारी दिखाई गई है। बता दें कि आलमगीर हत्याकांड में मुनीर के अलावा रेहान, शादाब नामजद थे। इनमें से रेहान ने अदालत में सरेंडर किया था। इसके बाद यह पहली गिरफ्तारी हुई है, जबकि मुनीर अभी फरार है।
जुए में थप्पड़ ने मरवाया आलमगीर, बड़े नाम पीछे
बेशक शादाब ने पूछताछ में आलमगीर हत्याकांड में खुद की मौजूदगी नकारी है। मगर उसने कुछ ऐसे तथ्य उजागर किए हैं, जो चौंकाने वाले हैं। शादाब की मानें तो प्रॉक्टोरियल टीम ने आलमगीर की हत्या से कुछ दिन पहले स्टाफ क्लब पर छापा मारा था। जहां जुआ पकड़ा गया था। यहां आलमगीर ने कई लोगों को थप्पड़ जड़ दिए थे। थप्पड़ खाने वालों में कई बड़े नाम थे। बस उसी दिन उसकी हत्या की प्लानिंग बन गई थी। यह सही है कि आशुतोष का सिर फाड़ने के चलते उससे रंजिश थी और मुनीर को किस तरह प्रयोग किया गया, यह जानकारी नहीं है। मगर उसी रंजिश के बाद हत्या की साजिश रची। यह बातें उसे आलमगीर की हत्या के बाद जानकारी में आ गई थीं।
आलमगीर हत्याकांड में पहली गिरफ्तारी
बेशक पुलिस की टीम इस गिरफ्तारी को ठंडी सड़क से दिखा रही है। मगर सूत्रों की मानें तो यह दो दिन से एसटीएफ के पास था और लगातार हर पहलू पर मुनीर को लेकर पूछताछ और उससे नए कनेक्शन मिलने के बाद उसकी गिरफ्तारी दिखाई गई है। बता दें कि आलमगीर हत्याकांड में मुनीर के अलावा रेहान, शादाब नामजद थे। इनमें से रेहान ने अदालत में सरेंडर किया था। इसके बाद यह पहली गिरफ्तारी हुई है, जबकि मुनीर अभी फरार है।
जुए में थप्पड़ ने मरवाया आलमगीर, बड़े नाम पीछे
बेशक शादाब ने पूछताछ में आलमगीर हत्याकांड में खुद की मौजूदगी नकारी है। मगर उसने कुछ ऐसे तथ्य उजागर किए हैं, जो चौंकाने वाले हैं। शादाब की मानें तो प्रॉक्टोरियल टीम ने आलमगीर की हत्या से कुछ दिन पहले स्टाफ क्लब पर छापा मारा था। जहां जुआ पकड़ा गया था। यहां आलमगीर ने कई लोगों को थप्पड़ जड़ दिए थे। थप्पड़ खाने वालों में कई बड़े नाम थे। बस उसी दिन उसकी हत्या की प्लानिंग बन गई थी। यह सही है कि आशुतोष का सिर फाड़ने के चलते उससे रंजिश थी और मुनीर को किस तरह प्रयोग किया गया, यह जानकारी नहीं है। मगर उसी रंजिश के बाद हत्या की साजिश रची। यह बातें उसे आलमगीर की हत्या के बाद जानकारी में आ गई थीं।