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पोखरण में 14 सितंबर से ड्रोनाथॉन-2026: ड्रोन से ड्रोन रोधी सिस्टम तक, दिखेगी भारत की स्वदेशी तकनीक की ताकत
Tue, 08 Sep 2026 05:11 PM IST
देवेश त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Tue, 08 Sep 2026 05:11 PM IST
सार
भारतीय वायुसेना 14 से 16 सितंबर 2026 तक जैसलमेर की पोखरण रेंज में 'ड्रोनाथॉन-2026' का आयोजन करेगी। इसका उद्देश्य देश में विकसित मानवरहित हवाई प्रणाली और ड्रोन रोधी प्रणालियों की क्षमताओं को प्रदर्शित और परखना है। कार्यक्रम में स्थिर प्रदर्शन के साथ लाइव प्रदर्शन भी होंगे।
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ड्रोनाथॉन 2026
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
ड्रोन तकनीक युद्ध और निगरानी के क्षेत्र में तेजी से अहम होती जा रही है। इसी के मद्देनजर भारतीय वायुसेना देश में विकसित ड्रोन और ड्रोन रोधी तकनीकों की क्षमता परखने की तैयारी कर रही है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय वायुसेना 14 से 16 सितंबर 2026 तक जैसलमेर की पोखरण रेंज में 'ड्रोनाथॉन-2026' आयोजित करेगी। इसमें घरेलू रक्षा कंपनियां, स्टार्टअप और नवोन्मेषक अपनी तकनीक का प्रदर्शन करेंगे।
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'ड्रोनाथॉन-2026' क्या है और इसका आयोजन क्यों किया जा रहा है?
यह भारतीय वायुसेना की ऐसी पहल है, जिसमें देश में विकसित मानवरहित हवाई प्रणाली और ड्रोन रोधी प्रणाली को एक ही मंच पर प्रदर्शित और परखा जाएगा। इसका प्रमुख उद्देश्य घरेलू निर्माताओं को अपनी तकनीकी क्षमता दिखाने का अवसर देना है। साथ ही वायुसेना और उद्योग के बीच संवाद बढ़ाकर ऐसी तकनीकों की पहचान करना है, जो वास्तविक परिचालन जरूरतों के अनुरूप हों।
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यह आयोजन कब और कहां होगा?
'ड्रोनाथॉन-2026' का आयोजन 14 से 16 सितंबर 2026 तक जैसलमेर की पोखरण रेंज में किया जाएगा। पोखरण का चयन महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां वास्तविक परिस्थितियों के करीब तकनीकों का परीक्षण और प्रदर्शन किया जा सकता है। कार्यक्रम में केवल उपकरणों को प्रदर्शित नहीं किया जाएगा, बल्कि उनकी परिचालन क्षमता का लाइव प्रदर्शन भी होगा।
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इस कार्यक्रम में किस तरह की तकनीक दिखाई जाएगी?
आयोजन में ड्रोन और उन्हें रोकने वाली प्रणालियों की नई क्षमताओं पर विशेष ध्यान रहेगा। कार्यक्रम के प्रमुख क्षेत्र इस प्रकार हैं:- निगरानी और टोही से जुड़ी तकनीकें, जिनकी मदद से संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार नजर रखने और महत्वपूर्ण सूचनाएं जुटाने की क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है।
- स्वायत्त संचालन और ड्रोन के झुंड से जुड़ी तकनीकें भी प्रदर्शित की जाएंगी। इनका उद्देश्य एक साथ कई मानवरहित प्रणालियों के संचालन और समन्वय जैसी क्षमताओं को परखना है।
- इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से जुड़ी प्रणालियां भी आयोजन का हिस्सा होंगी। इनमें ऐसे समाधान शामिल हो सकते हैं, जो बदलते युद्धक्षेत्र में ड्रोन से जुड़े खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ाएं।