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भारत समेत दुनिया भर में गहराया पीने के पानी का संकट, क्या इस तकनीक से बुझेगी प्यास

Mon, 08 Apr 2019 01:07 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Mon, 08 Apr 2019 01:07 PM IST
सार

  • 2050 तक भयानक जल सकट का सामना करेगा भारत
  • डीसेलीनेशन प्लांट से समुद्री जल को किया जा रहा है शुद्ध
  • इस प्रक्रिया से शुद्ध हुए जल की कीमत बहुत ज्यादा
  • देश की 40 फीसदी आबादी को डीसेलीनेशन प्लांट से होगा फायदा

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Drinking water crisis become big issue in India
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

धरती पर तेजी से बढ़ रहे पेयजल संकट को दूर करने के लिए कई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। फिर भी यह समस्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। भूगर्भ जल के अत्याधिक दोहन ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। इस समस्या के गंभीरता का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि भाजपा के घोषणापत्र को जारी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पीने के पानी की कमी को दूर करने के लिए अलग जल शक्ति मंत्रालय बनाया जाएगा। जिसमें नल से जल को घर घर पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पानी के लिए सरकार मिशन मोड में काम करेगी।
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धरती पर पानी का सबसे बड़ा स्रोत समुद्र है हालांकि इसका पानी खारा होने के कारण सीधे पीने के लिए उपयोग में नहीं लाया जा सकता। इसलिए दुनिया के 120 देश समुद्र के पानी से डीसेलीनेशन प्रक्रिया के द्वारा पेयजल संकट को खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए इन देशों में 17 हजार डीसेलीनेशन प्लांट लगाए गए हैं।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2050 तक भारत और चीन पेयजल की भयानक संकट का सामना करेंगे। तब समुद्र का यह खारा पानी लोगों के लिए वरदान साबित होगा। इसके तहत जल शोधन का ऐसा तरीका तैयार किया गया है, जिससे आर्सेनिक और यूरेनियम युक्त पानी को भी पीने लायक बनाया जा सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2030 तक दुनिया के लगभग 4 अरब लोग पेयजल में तब्दील होने वाले इस समुद्री पानी का प्रयोग करने लगेंगे।
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भारत में पहला डीसेलीनेशन प्लांट तमिलनाडु में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर द्वारा स्थापित किया गया था। लेकिन बिजली की कमी और इससे निकलने वाला नमक मशीन की क्षमता को प्रभावित करता था। इसके बाद आईआईटी मद्रास ने कन्याकुमारी में एक सोलर डीसेलीनेशन प्लांट तैयार किया, जिसके पेयजल को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मान्यता भी दे दी है। 

दुनिया के 120 देशों में लगे हैं डीसेलीनेशन प्लांट

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प्रतीकात्मक तस्वीर
दुनिया के 120 देशों में 17000 से ज्यादा लगे डीसेलीनेशन प्लांट से लगभग 6.6 करोड़ क्यूबिक मीटर से ज्यादा साफ पानी तैयार किया जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार इस साफ पानी का दो तिहाई हिस्सा घरेलू कामों में प्रयोग किया जा रहा है, जबकि 30 फीसदी उद्योगों और 3 फीसदी सिंचाई में प्रयोग किया जा रहा है।

भारत के लिए भी स्थिति गंभीर

दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत में भी भूगर्भ जल का वितरण सभी जगह समान नहीं है। देश के पठारी भाग हमेशा से भूगर्भ जल के मामले में कमजोर रहे हैं। उत्तर भारत के मैदान हमेशा से भूगर्भ जल के मामले में संपन्न रहे हैं लेकिन सिंचाई हेतु तेजी से दोहन के कारण इनमें अभूतपूर्व कमी दर्ज की गई है। भारत में भूगर्भ जल की स्थिति पर चिंता जाहिर की जा रही है। जिस तरह भारत में इसका का दोहन हो रहा है इससे भविष्य में स्थितियां खतरनाक होने का अनुमान जताया जा रहा है।

यह भी पढ़ें: विश्व जल दिवस 2019: देश का 50 फीसदी हिस्सा सूखे की चपेट में, 400 करोड़ लोग पेयजल के लिए मोहताज

देश का करीब 50 फीसदी हिस्सा सूखे की चपेट में आने वाला है। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में 400 करोड़ लोगों को स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा है जिसमें 25 फीसदी भारतीय भी शामिल हैं। एक रिपोर्ट में भारत को चेतावनी दी गई है कि यदि भूजल का दोहन नहीं रूका तो देश को बड़े जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। 75 फीसदी घरों में पीने के साफ पानी की पहुंच ही नहीं है। केंद्रीय भूगर्भ जल बोर्ड द्वारा तय मात्रा की तुलना में भूमिगत पानी का 70 फीसदी ज्यादा उपयोग हो रहा है।

वर्तमान समय में देश के 29 फीसदी विकास खण्ड या तो भूगर्भ जल के दयनीय स्तर पर हैं या चिंतनीय हैं और कुछ आंकड़ों के अनुसार 2030 तक लगभग 60 फीसदी ब्लाक चिंतनीय स्थिति में आ जायेंगे।भारत में 40 करोड़ लोग तटीय क्षेत्रों में रहते हैं। समुद्र के किनारे रहने के कारण इन्हें पीने के लिए शुद्ध जल नहीं मिल पा रहा है। अनुमान जताया जा रहा है कि इस तकनीकी के प्रयोग से इन्हें शुद्ध जल मिल सकेगा। 

 

ये बनी हुई है समस्या

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प्रतीकात्मक तस्वीर
भारत  के डिसेलीनेशन से मिलने वाले पानी की लागत को लेकर विश्व बैंक की ओर से दावा किया गया कि इसका खर्च  55 रुपए प्रति लीटर तक जा रहा है, जो मौजूदा बोतलबंद पानी के खर्च से कई गुना ज्यादा है। इसके अलावा पानी के शुद्धीकरण के दौरान बचने वाला नमक मशीन को खराब कर रहा है। इस डिसेलीनेशन मशीन की कीमत भी बहुत ज्यादा है।
 

आपके लिए क्यों जरूरी है जानना

वर्तमान में जल संकट किसी एक देश की समस्या न होकर वैश्विक रूप से लोगों को प्रभावित कर रही है। कुछ ही महीनों पहले दक्षिण अफ्रीका में गहराया पानी का संकट दुनियाभर में सुर्खियां बना रहा। भारत में भी बड़ी आबादी पेयजल के संकट का सामना कर रही है। गर्मियों के मौसम में इसके और गंभीर होने की संभावना जताई जा रही है। अत: इस समस्या के समाधान के लिए हो रहे प्रयासों से जनसरोकार जुड़ा हुआ है। अगर आप इस न्यूज से संबंधित कुछ और जानना चाहते हैं तो हमको बताएं, हम वो खबरें भी आपके सामने रखेंगे। 

कृपया हमारी खबरों पर अपना फीडबैक नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर दें और बताएं कि आमजन से जुड़ी कौन सी खबर आप पढ़ना चाहते हैं। हम आपके फीडबैक के अनुसार खबरों को प्रस्तुत करेंगे।

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