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डीआरडीओ: पहले से ज्यादा घातक है 'पिनाक' का नया अवतार, एलएसी पर तैनात होगा शिव के धनुष सा गरजने वाला मिसाइल सिस्टम
Sat, 11 Dec 2021 08:49 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Sat, 11 Dec 2021 08:49 PM IST
सार
पोखरण रेंज में पिनाक-ईआर का सफल परीक्षण पूरा किया गया। यह सेना में एक दशक से सेवा दे रहे पिनाका की जगह लेगा।
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पिनाक रॉकेट
विस्तार
पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से निर्मित पिनाक गाइडेड रॉकेट लॉन्चर सिस्टम अब अपने नए अवतार के साथ दुश्मन के मंसूबों को ध्वस्त करने के लिए तैयार है। चीन और पाकिस्तान से चल रहे तनाव के बीच डीआरडीओ ने शनिवार को पिनाक के नए संस्करण पिनाक-ईआर(विस्तारित रेंज) का पोखरण में सफल परीक्षण पूरा कर लिया है। इस परीक्षण के सफल होने के बाद यह स्वदेशी मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर और भी ज्यादा खतरनाक हो गया है।
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सिस्टम की फील्ड फायरिंग रेंज मापने के लिए परीक्षण
मंत्रालय के अनुसार यह परीक्षण सिस्टम की फील्ड फायरिंग रेंज मापने के लिए किए गए। इस दौरान 24 रॉकेटों को विभिन्न हथियारों की क्षमता के साथ अलग अलग रेंज पर दाग कर जांचा गया। सभी परीक्षण परिणाम संतोषजनक रहे। इस रॉकेट सिस्टम को पुणे स्थित डीआरडीओ की आयुध अनुसंधान एवं विकास स्थापना (एआरडीई) और उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (एचईएमआरएल) ने मिलकर तैयार किया है।
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#WATCH | DRDO and Indian Air Force flight-tested indigenously designed and developed helicopter launched stand-off anti-tank (SANT) Missile from Pokhran range on today pic.twitter.com/nzdcPTWwAR
— ANI (@ANI) December 11, 2021
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परीक्षण में उपयोग हुए रॉकेट निजी क्षेत्र के रक्षा उद्योग द्वारा तैयार किए गए थे। मंत्रालय ने बताया कि औद्योगिक सहयोगियों के सफल योगदान से स्पष्ट है कि वे पिनाक-ईआर के रॉकेट सिस्टम के लिए उत्पादन करने के लिए तैयार हैं। डीआरडीओ ने उन्हें उत्पादन व गुणवत्ता मानक बनाए रखने में सहयोग भी दिया। डीआरडीओ द्वारा विकसित करने के बाद तकनीक हस्तांतरण के तहत यह उत्पादन करवाया गया।
खूबियों से कांप उठेगा दुश्मन
पिनाक पहले 44 सेकेंड में 12 रॉकेट दागने वाला मिसाइल लॉन्चर सिस्टम था। इसकी मारक क्षमता 38 किलोमीटर तक थी, लेकिन अपग्रेड होने के बाद यह 44 सेकेंड में ताबड़तोड़ 72 रॉकेट दाग सकता है। वहीं यह 75 किलोमीटर दूरी तक सटीक निशाना लगा सकने में भी सक्षम है।
कारगिल युद्ध में सटीक रहा था पिनाका मार्क-1
1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने पिनाक मार्क-1 संस्करण का इस्तेमाल किया था, जिसने पहाड़ की चौकियों पर तैनात पाकिस्तानी चौकियों को सटीकता के साथ निशाना बनाया था और युद्ध में दुश्मन को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया था।