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Criminal Laws: आपराधिक कानूनों की जगह लेने वाले विधेयकों के ड्राफ्ट को नहीं मिली मंजूरी, सामने आई ये वजह

Fri, 27 Oct 2023 02:50 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 27 Oct 2023 02:50 PM IST
सार

इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) की जगह भारतीय न्याय संहिता, द कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर (सीआरपीसी) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और और इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम पेश किया गया है। 

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drafts replace criminal laws nor adopted by parliament committee next meeting on 6 november
संसदीय समिति कर रही ड्राफ्ट की जांच - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आपराधिक कानूनों की जगह लेने के लिए लाए गए तीन विधेयकों के ड्राफ्ट को संसदीय समिति ने मंजूर नहीं किया है। दरअसल कुछ विपक्षी सांसदों ने मांग की है कि उन्हें इन विधेयकों का अध्ययन करने के लिए अभी और समय चाहिए। जिसके बाद शुक्रवार की बैठक में विधेयकों के ड्राफ्ट को मंजूरी नहीं मिल पाई। अब संसदीय समिति की अगली बैठक 6 नवंबर को होगी, जिसमें इन विधेयकों के ड्राफ्ट को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। 
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क्या है मंजूरी ना मिलने की वजह
बता दें कि संसदीय समिति इन विधेयकों के ड्राफ्ट की जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, संसदीय समिति में शामिल विपक्षी सांसद पी चिदंबरम ने कमेटी के अध्यक्ष भाजपा सांसद बृज लाल को एक पत्र लिखा है, जिसमें अपना मत देने और विधेयकों के अध्ययन के लिए और समय देने की मांग की गई है। औपनिवेशिक काल के तीन आपराधिक कानूनों की जगह लेने वाले तीन विधेयक बीते मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में पेश किए थे। इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) की जगह भारतीय न्याय संहिता, द कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर (सीआरपीसी) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और और इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम पेश किया गया है। 
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देश में अभियोजन प्रक्रिया की नींव हैं ये कानून
लोकसभा में पेश करने के बाद ये तीनों विधेयक संसद की समिति के पास जांच के लिए भेज दिए गए थे। संसद के अगले सत्र में इन विधेयकों पर सदन में चर्चा हो सकती है। जिन कानूनों को बदला जाएगा, वह भारत में अपराधों की अभियोजन प्रक्रिया की नींव हैं। इनमें से भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) से तय होता है कि कौन सा कृत्य अपराध है और उसके लिए क्या सजा होनी चाहिए। वहीं गिरफ्तारी जांच और मुकदमा चलाने की प्रक्रिया दंड प्रक्रिया संहिता में लिखी हुई है। साथ ही केस के तथ्यों को कैसे साबित किया जाएगा, यह भारतीय साक्ष्य अधिनियम बताता है। सरकार का कहना है कि ये तीनों कानून देश में उपनिवेशवाद की विरासत हैं और इन्हें आज के हालात के अनुसार किया जा रहा है।  
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