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कोरोना मुफ्त जांच: सुप्रीम कोर्ट पहुंचे एम्स के डॉक्टर कौशल, निजी लैबों ने भी लगाई गुहार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 11 Apr 2020 04:32 PM IST
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टर कौशल कांत मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट को अपने पहले के आदेश में संशोधन करने के लिए याचिका दायर की है। उन्होंने अदालत से अपने पहले के आदेश में संशोधन करने की अपील की है, जिसमें सभी निजी प्रयोगशालाओं को मुफ्त में कोविड-19 की जांच करने के निर्देश दिए गए थे। डॉक्टर कौशल कांत एम्स के रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के पूर्व सदस्य रहे हैं।


 


निजी लैबों में मुफ्त कोरोना टेस्ट करने के आदेश में बदलाव की गुहार
निजी लैबों में कोरोना का टेस्ट मुफ्त करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में बदलाव की गुहार की गई है। डॉक्टर कृष्णकांत मिश्रा ने याचिका में कोर्ट से अपने पिछले आदेश में बदलाव करने की मांग की है। मिश्रा ने अपनी याचिका में कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों (ईडब्ल्यूएस) को छोड़ बाकी तमाम लोगों से आईसीएमआर द्वारा तय 4500 रुपये लेने की अनुमति दी जाए।

ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लोगों के टेस्ट की भरपाई सरकार करें। महामारी को देखते हुए अगले कुछ समय में बड़ी संख्या में टेस्ट करने की जरूरत है, ऐसे में प्राइवेट लैब पर अत्यधिक बोझ पड़ेगा। 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों और निजी लैबों में भी कोरोना का मुफ्त टेस्ट करने का आदेश दिया था।

गर्मी की छुट्टियां रद्द करने की मांग

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने शनिवार को चीफ जस्टिस से ग्रीष्म अवकाश को रद्द करने की मांग की है। एसोसिएशन ने कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण कामकाज में हुए नुकसान की भरपाई जरूरी है। 16 मई से 5 जुलाई तक का ग्रीष्म अवकाश प्रस्तावित है।

भारतीयों की वापसी को लेकर याचिका
अमेरिका में फंसे भारतीयों को वापस लाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। वरिष्ठ वकील विभा दत्ता मखीजा ने अपनी याचिका में कहा कि अमेरिका में कोरोना का प्रकोप बड़े पैमाने पर है। वहां बड़ी संख्या में भारतीय फंसे हुए हैं। ऐसे में सरकार मानवता और कानूनी कर्तव्यों को निभाते हुए वहां फंसे लोगों लाने की व्यवस्था करे।

निजी प्रयोगशालाओं ने खड़े किए हाथ, कहा- मुफ्त जांच के लिए साधन नहीं

कोरोना वायरस की मुफ्त जांच के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर देश की निजी प्रयोगशालाओं ने हाथ खड़े कर दिए। इनका कहना है कि कोविड-19 की मुफ्त जांच के लिए हमारे पास साधन नहीं हैं। सरकार को रास्ता निकालना चाहिए, जिससे निजी प्रयोगशालाएं बढ़ती मांग के बीच जांच का काम जारी रख सकें।

डॉ. डैंग्स लैब के सीईओ डॉक्टर अर्जुन डैंग ने कहा, ‘हम शीर्ष अदालत के आदेश को स्वीकार करते हैं, जिसका उद्देश्य कोविड-19 जांच की पहुंच बढ़ाने और इसे आम आदमी के लिए आसान बनाना है। निजी लैब के लिए कई चीजों की लागत तय है, जिनमें रीएजेंट्स, उपभोग की वस्तुओं, कुशल कामगारों और उपकरणों का रख-रखाव शामिल है।

कोरोना की जांच में भी संक्रमण नियंत्रण के कई उपाय करने पड़ते हैं। जैसे व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई), संक्रामक परिवहन तंत्र और साफ सफाई की जरूरत। सरकार द्वारा तय 4500 रुपये की दर में निजी लैब बमुश्किल लागत निकाल पाती हैं। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश का पालन करते हुए हम अभी जांच मुफ्त कर रहे हैं और इस बारे में सरकार की तरफ से चीजों को और स्पष्ट किए जाने का इंतजार है।
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