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J&K: दहशतगर्दों पर नकेल से परेशान हुआ पाकिस्तान, बचे हैं एक लोकल व 40 विदेशी आतंकी; अब निशाने पर मददगार

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 17 Sep 2026 08:24 PM IST
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J&K Crackdown Puts Pakistan-Backed Terror Network Under Pressure, Only 1 Local and 40 Foreign Militants Left
भारत पाकिस्तान बॉर्डर (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में जारी सुरक्षा बलों के ऑपरेशनों का असर यह हुआ कि अब प्रदेश में दहशतगर्दों पर नकेल कसती जा रही है। लोकल आतंकियों की भर्ती पूरी तरह बंद हो चुकी है। पिछले साल केवल एक स्थानीय व्यक्ति, पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों का सदस्य बना था। जेएंडके में फिलहाल एक लोकल आतंकी तो 40 विदेशी (पाकिस्तानी) आतंकवादी सक्रिय बताए गए हैं। लोकल स्तर पर बंद हुई आतंकियों की भर्ती से पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान, परेशान हो गया है। वहां की खुफिया इकाई 'आईएसआई' बड़े पैमाने पर अपने लॉन्चिंग पैड को एक्टिव कर रही है। लॉन्चिंग पैड पर घुसपैठ के लिए करीब 125 आतंकियों को तैयार किया गया है। दूसरी तरफ सर्दियों में घुसपैठ को पूरी तरह रोकने के लिए भारतीय सुरक्षा बलों ने कमर कस ली है। अब सुरक्षा बलों के टारगेट पर जेएंडके में मौजूद आतंकियों के 'मददगार' हैं।

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उधमपुर जिले में बुधवार रात को सुरक्षा बलों ने जिन दो आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया है, वे पाकिस्तानी हैं। सद्दाम और मुस्तफा, दोनों दहशतगर्द, पाकिस्तान के आतंकी संगठन 'जैश-ए-मोहम्मद' से जुड़े थे। इस वर्ष जेएंडके में 15 दहशतगर्द मारे गए हैं। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में स्थानीय स्तर पर आतंकियों की भर्ती बंद होने से पाकिस्तानी आईएसआई तिलमिला उठी है। जहां चार-पांच साल पहले तक करीब डेढ़ सौ लोकल आतंकियों की भर्ती की सूचनाएं सामने आती रही हैं, वहीं अब वह आंकड़ा जीरो पर पहुंच गया है। यही बात आईएसआई की परेशानी की वजह है। इसके चलते उसे पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय सीमा से साठ सत्तर किलोमीटर अंदर आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप, दोबारा से शुरू करने पड़ रहे हैं। बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के ऐसे ज्यादातर कैंप तबाह कर दिए थे।  
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खास बात है कि पहले जो लॉन्चिंग पैड, अंतरराष्ट्रीय सीमा से पांच दस किलोमीटर के दायरे में होते थे, अब उन्हें भी सीमा से काफी अंदर स्थापित किया गया है। आईएसआई पर पाकिस्तान में ही नए आतंकी तैयार कर उन्हें जम्मू कश्मीर में भेजने का दबाव बढ़ रहा है। दूसरी तरफ भारतीय सुरक्षा बलों ने बॉर्डर पर ड्रोन, सीआईबीएमएस एवं दूसरे हाईटेक उपकरणों की मदद से फुलप्रूफ चौकसी की है। ऐसे में आईएसआई के लिए आतंकियों की घुसपैठ कराना आसान नहीं है। 
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केंद्रीय एजेंसियों के एक अधिकारी बताते हैं, अब आईएसआई का परेशान होना लाजमी है। लोकल स्तर पर भर्ती बंद है और सीमा पार से भी आतंकी घुसपैठ नहीं कर पा रहे हैं। जेएंडके में जो चालीस पाकिस्तानी आतंकी बचे हैं, उनका भी देर सवेर मारे जाना तय है। सर्दियों में बर्फबारी से पहले अक्तूबर और नवंबर में सुरक्षा बलों का गहन सर्च ऑपरेशन शुरू हो रहा है। 
राज्य में छिपे आतंकियों को स्थानीय 'ओवर ग्राउंड वर्कर' से भरपूर मदद मिल रही है। इनके नेटवर्क को तोड़ना सुरक्षा बलों के लिए किसे बड़े टॉस्क से कम नहीं है। सेना, सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस द्वारा 'ओवर ग्राउंड वर्कर' तक पहुंचने के लिए लगातार सर्च अभियान चलाया जा रहा है। संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। जंगलों में छिपे आतंकियों तक पहुंचने के लिए इस बार सीआरपीएफ की विशेष इकाई 'कोबरा' को विशेष जिम्मेदारी दी जा रही है। 

पाकिस्तान के आतंकी संगठन 'जैश-ए-मोहम्मद' और 'लश्कर-ए-तैयबा' एवं इनके मुखौटे संगठनों से जुड़े 'ओजीडब्लू' की संख्या लगभग दो सौ बताई जा रही है। ये लोग, आतंकियों को राशन, गैस सिलेंडर और टैंट सप्लाई के अलावा सेना व दूसरे केंद्रीय बलों की मूवमेंट का अलर्ट भी देते हैं। सुरक्षा बल, ऐसे ओवर ग्राउंड वर्कर्स की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।

पाकिस्तान से आए आतंकी, जम्मू कश्मीर के जंगलों या पहाड़ी गुफाओं में छिपे हैं।

वे सामान्य फोन से बातचीत नहीं करते। यही वजह है कि उन्हें आसानी से ट्रैक नहीं किया जा सकता। सुरक्षा बलों को ज्यादातर सूचनाएं मुखबिरों के माध्यम से ही मिलती हैं। हालांकि मुखबिरों की सूचना को क्रॉस चैक किया जाता है, लेकिन कई बार इंटेल इनपुट, पूरी तरह से स्पष्ट नहीं होता। उस स्थिति में जोखिम या नुकसान की संभावना बनी रहती है। जेएंडके में फिलहाल नए आतंकी सामने नहीं आ रहे। उनकी भर्ती पूरी तरह बंद हो चुकी है। विभिन्न इलाकों में जो आतंकी मौजूद हैं, वही अपने स्लीपर सेल या हाईब्रिड टेरोरिस्ट की मदद से हमला करने का प्रयास करते हैं। 

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