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सुप्रीम कोर्ट: इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के लिए हाईकोर्टों को राज्यों की दया पर न छोड़े केंद्र, सीधे पैसा पहुंचाने के करें प्रबंध

Wed, 01 Dec 2021 10:26 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 01 Dec 2021 10:26 PM IST
सार

शीर्ष कोर्ट ने कहा कि कभी-कभी न्यायपालिका उसे दिए जाने वाले धन का पूरा उपयोग करने में असमर्थ होती है। कोर्ट ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की, 'हम कह सकते हैं कि न्यायाधीश कंजूस हैं। वे नहीं जानते कि कैसे पैसा खर्च किया जाए।' 

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Dont leave high courts at state govts mercy for infrastructure funds, Supreme Court tells Centre
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र से कहा कि वह हाईकोर्टों को न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के लिए राज्य सरकारों की दया पर न छोड़े। एक एकीकृत केंद्रीय प्रणाली तैयार की जाए और मांग व जरूरत के अनुसार उससे पैसा सीधा हाईकोर्टों तक पहुंचाया जाए। 

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शीर्ष कोर्ट ने कहा कि कभी-कभी न्यायपालिका उसे दिए जाने वाले धन का पूरा उपयोग करने में असमर्थ होती है। कोर्ट ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की, 'हम कह सकते हैं कि न्यायाधीश कंजूस हैं। वे नहीं जानते कि कैसे पैसा खर्च किया जाए।' 
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कोर्ट ने यह भी कहा कि एक ओर जहां सरकार 'ईज आफ डूइंग बिजनेस', कार्पोरेट मामलों के जल्दी निपटारे, मध्यस्थता से विवादित मामलों के निपटारे व एफडीआई बुलाने की बात कह रही है वहीं, यह भी जरूरी है कि इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए फंड के आवंटन की एक केंद्रीयकृत प्रणाली बनाई जाए। 
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अदालतों के कंप्यूटरीकरण के लिए केंद्र की तारीफ
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका के कंप्यूटरीकरण के लिए केंद्र के प्रयासों की सराहना भी की, क्योंकि फंड की समस्या नहीं है। 17 हजार कोर्ट कंप्यूटरीकृत हो चुकी हैं और न्यायिक अधिकारियों को लैपटॉप दिए जा चुके हैं, ताकि बगैर किसी बाधा के कामकाज चल सके। 

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