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Tareekh Pe Tareekh Court: जस्टिस चंद्रचूड़ बोले- हम नहीं चाहते कि सुप्रीम कोर्ट बने 'तारीख पे तारीख' अदालत

Fri, 09 Sep 2022 09:12 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 09 Sep 2022 09:12 PM IST
सार

एक मामले में पेश हुए वकील को जवाब देते हुए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने फिल्म 'दामिनी' के एक संवाद को याद करते हुए कहा कि ये देश का सर्वोच्च न्यायालय है और हम चाहते हैं कि इस अदालत को कुछ सम्मान मिले।

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Don't want SC to become 'Tareekh pe Tareekh' court: SC judge Chandrachud
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि हम नहीं चाहते कि सुप्रीम कोर्ट तारीख पे तारीख कोर्ट बने। उन्होंने वकीलों द्वारा मामलों को लंबा खींचने की प्रवृत्ति क संबंध में ये बात कही। जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली ने एक मामले पर सुनवाई के दौरान उस वक्त नाखुशी जताई जब वकील ने मामले पर बहस करने के लिए और समय मांगा और कहा कि उन्होंने स्थगन के लिए एक पत्र भेजा है। इस पर पीठ ने कहा, हम मामले को स्थगित नहीं करेंगे। अधिक से अधिक हम बोर्ड के अंत में लिए जाने वाले मामले को पारित कर सकते हैं लेकिन आपको मामले पर बहस करनी होगी। हम नहीं चाहते कि सुप्रीम कोर्ट 'तारीख पे तारीख' कोर्ट बने। हम इस धारणा को बदलना चाहते हैं।

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एक हिंदू पुजारी की ओर से दीवानी अपील में पेश हुए वकील को जवाब देते हुए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने फिल्म 'दामिनी' के एक संवाद को याद करते हुए कहा कि ये देश का सर्वोच्च न्यायालय है और हम चाहते हैं कि इस अदालत को कुछ सम्मान मिले। पीठ ने कहा कि जहां न्यायाधीश अगले दिन की सुनवाई की तैयारी करते हुए आधी रात तक जगते हैं और मामले की फाइलों को ध्यान से देखते हैं, वहीं दूसरी तरफ वकील आते हैं और स्थगन की मांग करते हैं। अदालत न मामले को पारित कर दिया और बाद में जब बहस करने वाले वकील मामले में पेश हुए तो पीठ ने अपील में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए पुजारी को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा।
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एक अन्य मामले में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने एक वकील के खिलाफ एक उच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणी को हटाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि  उच्च न्यायालय को अदालत कक्ष में अनुशासन बनाए रखना होगा और शीर्ष अदालत के लिए किसी के गलत आचरण की टिप्पणियों को हटाना उचित नहीं होगा। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करने पर पीठ नाराज हो गई और कहा कि इस याचिका में मांगी गई राहत नहीं दी जा सकती। अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने के अधिकार से संबंधित है।
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